आवाज द वाॅयस/ मास्को( रूस)
जब कूटनीति की मेज पर रूहानियत और व्यापार का संगम होता है, तो रिश्तों में एक अलग ही गहराई आती है। रूस की राजधानी मास्को में कुछ ऐसा ही नजारा देखने को मिला। अजमेर शरीफ दरगाह के गद्दी नशीन और चिश्ती फाउंडेशन के अध्यक्ष हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने अपनी हालिया रूस यात्रा के दौरान भारत और रूस के संबंधों को एक नया आयाम दिया है। उनकी यह यात्रा महज एक दौरा नहीं, बल्कि 'आध्यात्मिक कूटनीति' की एक ऐसी मिसाल है जो दोनों देशों के बीच व्यापार, शांति और आपसी भरोसे के सेतु को और मजबूत करती है।
भारतीय दूतावास में कूटनीति की नई इबारत
हाजी सैयद सलमान चिश्ती ने मास्को में भारतीय राजदूत महामहिम विनय कुमार से मुलाकात की। इस उच्च स्तरीय बैठक में उप-मिशन प्रमुख निखिलेश गिरी और दूतावास के अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी मौजूद थे। प्रतिनिधिमंडल में अल वकील मैनपावर कंपनी के निदेशक सुहैल वकील और रूस के डिप्टी ग्रैंड मुफ्ती शेख दामिर हजरत के प्रतिनिधि इलियास भी शामिल रहे।
इस मुलाकात का एजेंडा सिर्फ औपचारिक नहीं था। बातचीत के केंद्र में था भारत और रूस का वह साझा भविष्य जो ब्रिक्स (BRICS) जैसे संगठनों के जरिए वैश्विक शांति की राह खोलता है। चर्चा के दौरान व्यापारिक रिश्तों को लेकर गंभीर मंथन हुआ। खासकर मानव संसाधन और द्विपक्षीय व्यापार के क्षेत्र में कैसे नई संभावनाएं तलाशी जाएं, इस पर जोर दिया गया। सलमान चिश्ती ने इस बात पर जोर दिया कि जब दो देशों के बीच व्यापार और आध्यात्मिक विचार मिलते हैं, तो वह गठबंधन सिर्फ कागजों तक सीमित नहीं रहता बल्कि लोगों के दिलों तक पहुंचता है।
Be like the Sun — grace without condition. Be like the River — generous without making any differences. Be like the Earth — hospitable to all. Timeless Sufi wisdom shared by Haji Syed Salman Chishty 🇮🇳@voices_of_faith Voices of Faith Festival, @BarbicanCentre Barbican Centre… pic.twitter.com/B1nXL3TvVM
— Haji Syed Salman Chishty (@sufimusafir) April 20, 2026
यूरोप की सबसे बड़ी मस्जिद में अमन की दुआ
आध्यात्मिक यात्रा का अगला पड़ाव मास्को की भव्य 'ग्रैंड कैथेड्रल मस्जिद' थी। यह यूरोप की सबसे बड़ी मस्जिदों में से एक है। यहाँ सैयद सलमान चिश्ती की मुलाकात हजरत दामिर मुखेतिदिनोव से हुई। हजरत दामिर रूस के मुसलमानों के धार्मिक बोर्ड के पहले उपाध्यक्ष और मास्को इस्लामिक संस्थान के प्रिंसिपल हैं।
इन दो महान आध्यात्मिक शख्सियतों के बीच संवाद बेहद गहरा और प्रभावशाली रहा। बातचीत का मुख्य मुद्दा था कि भारत और रूस के मुस्लिम समुदायों के बीच बौद्धिक और सांस्कृतिक संबंधों को कैसे और अधिक गहरा किया जाए। उन्होंने युवाओं के लिए शैक्षिक आदान-प्रदान और इस्लामी मूल्यों पर आधारित व्यापारिक पहल शुरू करने पर चर्चा की। चिश्ती परंपरा का मूल मंत्र 'मोहब्बत सबके लिए, नफरत किसी से नहीं' इस पूरी बातचीत के दौरान गूंजता रहा।
मुलाकात के अंत में दोनों नेताओं ने मिलकर विश्व शांति, एकता और भाईचारे के लिए दुआ मांगी। मस्जिद के विशाल गुंबद के नीचे उठी वे दुआएं इस बात का प्रतीक थीं कि आज की दुनिया को हथियारों से ज्यादा रूहानी मरहम की जरूरत है।

व्यापार और विरासत का अद्भुत मेल
अक्सर कूटनीति को बंद कमरों और फाइलों तक सीमित माना जाता है। लेकिन सैयद सलमान चिश्ती की इस पहल ने दिखाया कि जन-कूटनीति (People-to-People Diplomacy) कितनी असरदार हो सकती है। बैठक में शामिल सुहैल वकील जैसे व्यापारिक विशेषज्ञों की मौजूदगी ने स्पष्ट किया कि भारत अब रूस के साथ केवल रणनीतिक ही नहीं, बल्कि जमीनी स्तर पर आर्थिक रिश्तों को भी नई ऊंचाइयों पर ले जाना चाहता है।
दोनों देशों के बीच सदियों पुराने सभ्यतागत संबंधों को याद करते हुए सलमान चिश्ती ने कहा कि भारत और रूस के बंधन प्राचीन और पवित्र हैं। जब आध्यात्मिक ज्ञान के साथ कूटनीतिक दूरदृष्टि और ईमानदारी से किया गया व्यापार हाथ मिलाते हैं, तो हम केवल देशों के बीच साझेदारी नहीं बनाते, बल्कि लोगों के बीच शांति का निर्माण करते हैं।
ब्रिक्स और वैश्विक शांति की राह
रूस और भारत दोनों ही ब्रिक्स के महत्वपूर्ण सदस्य हैं। इस मंच पर दोनों देशों का तालमेल दुनिया की अर्थव्यवस्था और सुरक्षा के लिए बेहद जरूरी है। सैयद सलमान चिश्ती की मास्को यात्रा ने इस बात को रेखांकित किया कि धार्मिक और सांस्कृतिक नेतृत्व भी अंतरराष्ट्रीय राजनीति में सकारात्मक भूमिका निभा सकता है। अंतर-धार्मिक संवाद के जरिए समुदायों के बीच फैली गलतफहमियों को दूर करना और एक साझा वैश्विक विकास का सपना देखना ही इस यात्रा का असली उद्देश्य रहा।
एक सकारात्मक संदेश
इस ऐतिहासिक दौरे के बाद मास्को से लेकर अजमेर तक एक ही संदेश जा रहा है कि शांति का रास्ता बातचीत और सेवा से होकर गुजरता है। हाजी सैयद सलमान चिश्ती का यह कदम उन लोगों के लिए एक जवाब है जो धर्म को विवाद का विषय मानते हैं। उन्होंने दिखाया कि कैसे एक दरगाह से निकला अमन का पैगाम सात समंदर पार एक दूसरे देश में जाकर वहां की कूटनीति को मानवीय चेहरा दे सकता है।
मास्को की सड़कों पर भारत की इस रूहानी खुशबू ने रूसी नागरिकों और वहां रहने वाले भारतीय समुदाय को गौरवान्वित किया है। आने वाले समय में इस यात्रा के परिणाम व्यापारिक समझौतों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों के रूप में धरातल पर दिखाई देंगे। भारत और रूस की यह दोस्ती अब केवल सरकारों के बीच नहीं, बल्कि संतों, व्यापारियों और आम जनता के बीच एक अटूट रिश्ते में तब्दील हो रही है। यह वास्तव में एक नए युग की शुरुआत है।