रामनवमी 2026: आस्था, मर्यादा और धर्म की विजय का पावन पर्व

Story by  दयाराम वशिष्ठ | Published by  onikamaheshwari | Date 26-03-2026
Ram Navami 2026: A Sacred Festival of Faith, Righteous Conduct, and the Triumph of Dharma
Ram Navami 2026: A Sacred Festival of Faith, Righteous Conduct, and the Triumph of Dharma

 

दयाराम वशिष्ठ

सनातन धर्म में अनेक पर्व और उत्सव मनाए जाते हैं, लेकिन रामनवमी का महत्व अत्यंत विशेष है। यह वह दिव्य दिन है जब भगवान विष्णु ने मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम के रूप में पृथ्वी पर अवतार लिया। राम नवमी सत्य, धर्म, मर्यादा और आदर्श जीवन के सिद्धांतों का उत्सव है। इस दिन भारतवर्ष में भक्ति और उल्लास का वातावरण देखने को मिलता है। मंदिरों में विशेष पूजा-अर्चना होती है, घरों में भगवान श्रीराम की आराधना की जाती है और भक्तजन रामायण, रामचरितमानस तथा रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करते हैं। इस दिन भक्त भगवान राम के बालरूप की पूजा करते हैं और उनका जन्मोत्सव अत्यंत हर्षोल्लास के साथ मनाते हैं। 
 
Ram Navami 2025: Puja Vidhi, Shubh Muhurat, Samagri, Timings, Mantra,  Procedure, Aarti & Other Details

राम नवमी का धार्मिक महत्व

राम नवमी सनातन धर्म में धर्म की सत्य की स्थापना का प्रतीक पर्व है। इस दिन अयोध्या नगरी में राजा दशरथ के घर भगवान विष्णु ने राम रूप में जन्म लिया था। शास्त्रों के अनुसार जब पृथ्वी अधर्म, अत्याचार और राक्षसी शक्तियों से पीड़ित हो गई थी, तब देवताओं की प्रार्थना पर भगवान विष्णु ने श्रीराम के रूप में अवतार लिया।
 
राम नवमी की पौराणिक कथा

वाल्मीकि रामायण के अनुसार अयोध्या के राजा दशरथ के कोई संतान नहीं थी। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने अपने गुरु महर्षि वशिष्ठ के निर्देशानुसार पुत्रकामेष्टि यज्ञ करवाया। यज्ञ की समाप्ति के बाद यज्ञकुंड से दिव्य खीर प्रकट हुई। कुंड से प्राप्त खीर को राजा दशरथ ने अपनी तीनों रानियों कौशल्या, कैकेयी और सुमित्रा को वितरित का दी। इसी खीर के प्रभाव से समय आने पर चार दिव्य पुत्रों का जन्म हुआ जिन्हें श्रीराम, लक्ष्मण, भरत और शत्रुघ्न के नाम से जाना गया। वाल्मीकि रामायण के बालकाण्ड के 18वें सर्ग में भगवान श्रीराम के जन्म का वर्णन इस प्रकार किया गया है-
 
ततो यज्ञसमाप्तेौ ऋतूनां षट्स्वत्यये।
ततः षण्मास्यतीते तु चैत्रे नावमिके तिथौ।। 
 
अर्थात् पुत्रकामेष्टि यज्ञ की समाप्ति के बाद छह ऋतुएँ बीतने पर बारहवें महीने अर्थात् चैत्र मास की नवमी तिथि को, पुनर्वसु नक्षत्र में, जब ग्रह-नक्षत्र अत्यंत शुभ स्थिति में थे, तब माता कौशल्या ने सर्वलोकपूजित, दिव्य लक्षणों से युक्त भगवान श्रीराम को जन्म दिया।
 
भगवान श्रीराम का आदर्श जीवन

भगवान श्रीराम को मर्यादा पुरुषोत्तम कहा जाता है। इसका अर्थ है वह पुरुष जो जीवन की मर्यादाओं और धर्म के नियमों का सर्वोत्तम पालन करता है। उन्होंने अपने जीवन में एक पुत्र, एक भाई, एक पति, एक मित्र और एक राजा के रूप में ऐसे आदर्श स्थापित किए जो युगों-युगों तक मानवता के लिए प्रेरणा बने रहेंगे।
 
वाल्मीकि रामायण में भगवान श्रीराम के बारे में कहा गया है-
 
रामो विग्रहवान् धर्मः साधुः सत्यपराक्रमः।
राजा सर्वस्य लोकस्य देवानाम् इव वासवः॥
 
अर्थात् भगवान श्रीराम धर्म के साकार स्वरूप हैं। उनका स्वभाव अत्यंत सज्जन है और उनका पराक्रम सत्य तथा न्याय पर आधारित है। जैसे देवताओं के राजा इन्द्र होते हैं, वैसे ही श्रीराम सभी लोकों के आदर्श राजा हैं। 
 
राम नवमी की पूजा विधि

राम नवमी के दिन भक्त विशेष रूप से मध्यान्ह काल में भगवान श्रीराम की पूजा करते हैं। पूजा विधि इस प्रकार है- सुबह ब्रह्म मुहूर्त में उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र धारण करें। इसके बाद सूर्य देव को तांबे के लोटे से जल, अक्षत और सिंदूर डालकर अर्घ्य दें। घर के पूजा स्थान पर एक चौकी रखकर उस पर पीला कपड़ा बिछाएँ। इसके बाद भगवान राम, माता सीता, लक्ष्मण और हनुमान जी की मूर्ति या चित्र स्थापित करें।
 
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भगवान का आह्वान करें और गंगाजल से स्नान कराकर चंदन, पीले पुष्प, वस्त्र और आभूषण अर्पित करें। इसके बाद भगवान को खीर, केसर भात, पंजीरी और मिठाइयों का भोग लगाएँ। भोग में तुलसी दल अवश्य शामिल करें। पूजा के दौरान राम नाम का जाप करें और यथा संभव रामचरितमानस, रामायण तथा रामरक्षा स्तोत्र का पाठ करें। अंत में दीपक, धूप और कपूर से भगवान की आरती उतारें। राम नवमी के दिन भगवान श्रीराम के बालरूप की पूजा करना अत्यंत शुभ माना जाता है। कई स्थानों पर रामलला को पालने में झुलाया जाता है और मंदिरों में भव्य झाँकियाँ निकाली जाती हैं। साथ ही इस दिन घर के मुख्य द्वार पर धर्म ध्वजा लगाना अत्यंत शुभकारी माना जाता है।         
                           
भगवान श्रीराम की भक्ति 

भगवान श्रीराम की भक्ति जीवन में मर्यादा, अनुशासन और कर्तव्यपरायणता को स्थापित करने का मार्ग है। गोस्वामी तुलसीदास जी ने रामचरितमानस में भगवान के स्मरण के लिए लिखा है-
 
रामहि केवल प्रेमु पियारा। जानि लेहु जो जान निहारा।।

अर्थात् भगवान राम को केवल प्रेम प्रिय है। जो व्यक्ति सच्चे मन से प्रेम और भक्ति के साथ उनका स्मरण करता है, वे उसकी सभी मनोकामनाएँ पूर्ण करते हैं।  राम नवमी का यह पावन पर्व हमें यह संदेश देता है कि जीवन में धर्म, सत्य और मर्यादा का पालन ही सच्चा मार्ग है। भगवान श्रीराम का जीवन मानवता के लिए एक आदर्श है, जो हमें कर्तव्य, त्याग, प्रेम और न्याय का मार्ग दिखाता है।
अंत में भगवान श्रीराम के चरणों में नतमस्तक होकर। 
 
लोकाभिरामं रणरंगधीरं राजीवनेत्रं रघुवंशनाथम्।
कारुण्यरूपं करुणाकरं तं श्रीरामचन्द्रं शरणं प्रपद्ये॥
 
अर्थात् जो समस्त लोकों को आनंद देने वाले हैं, युद्धभूमि में अत्यंत धैर्यवान और वीर हैं, जिनकी आँखें कमल के समान सुंदर हैं, जो रघुवंश के स्वामी हैं, जो करुणा के स्वरूप और दया के सागर हैं; ऐसे श्रीरामचन्द्र जी की मैं शरण ग्रहण करता हूँ।
 
Rama Navami 2026: Dates, Timings, Significance & FAQs
 
राम नवमी कब है?

 पंचांग के अनुसार इस वर्ष राम नवमी का पावन पर्व 26 मार्च को मनाया जाएगा। पंचांग के अनुसार, चैत्र माह के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 48 मिनट पर प्रारंभ होगी और 27 मार्च को सुबह 10 बजकर 6 मिनट पर समाप्त होगी। राम नवमी का मध्याह्न काल 26 मार्च को सुबह 11 बजकर 27 मिनट से लेकर दोपहर 1 बजकर 54 मिनट के बीच होगा। राम नवमी पर भगवान श्रीराम की पूजा के लिए मध्याह्न काल को विशेष महत्व दिया जाता है, कहा जाता है कि भगवान राम का जन्म मध्याह्न काल में ही हुआ था। इसलिए राम नवमी 26 मार्च को मनाई जाएगी।
 
रामनवमी का महत्व: हम रामनवमी क्यों मनाते हैं? 

रामनवमी हिंदू धर्म का वसंतकालीन त्योहार है, जो भगवान विष्णु के सातवें अवतार, हिंदू भगवान राम के जन्म का उत्सव मनाता है। यह त्योहार वसंत नवरात्रि के समापन का प्रतीक है। यह त्योहार वसंत नवरात्रि का एक हिस्सा है और हिंदू पंचांग के चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष के नौवें दिन पड़ता है ।
 
राम नवमी क्यों मनाई जाती है?

राम नवमी को हिंदू धर्म के पांच सबसे महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक माना जाता है, क्योंकि यह अयोध्या में राजा दशरथ और रानी कौशल्या के पुत्र भगवान राम की जयंती का प्रतीक है। भगवान राम को हिंदू भगवान विष्णु का सातवां अवतार माना जाता है। इस शुभ दिन पर, भगवान राम और भगवान विष्णु के भक्त राम कथा का पाठ करने के साथ-साथ श्रीमद भागवत और रामायण  जैसे पवित्र हिंदू ग्रंथों के श्लोकों का पाठ करके इस दिन को मनाते हैं। 
 
भक्तों में यह मान्यता है कि रामनवमी के पर्व पर प्रार्थना करने और उत्सव मनाने से जीवन में दिव्य शक्ति आती है और पृथ्वी से बुरी शक्तियां या नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है। लोग रामनवमी को अलग-अलग तरीकों से मनाते हैं; कुछ भक्त मंदिरों में जाते हैं, तो कुछ अपने घरों में ही प्रार्थना करते हैं। भजन और कीर्तन गाए जाते हैं, मंदिरों में मिठाई और फल जैसी धार्मिक वस्तुएं चढ़ाई जाती हैं, भगवान राम और भगवान विष्णु के नाम पर विस्तृत पूजा-अर्चना  की जाती है, लेकिन उद्देश्य एक ही होता है - भगवान राम के प्रति भक्ति और श्रद्धा प्रकट करना, और जीवन में सकारात्मक ऊर्जा का स्वागत करना।
 
रामनवमी अनुष्ठान

राम नवमी के अवसर पर श्रद्धालु एक दिन का उपवास रखते हैं। यह उपवास अक्सर सूर्योदय से पहले या सूर्योदय के समय शुरू होता है और अगले दिन सूर्योदय तक चलता है। राम कथा और श्रीमद् भागवतम्  एवं रामायण  जैसे पवित्र हिंदू ग्रंथों का पाठ  किया जाता है। मंदिरों और श्रद्धालुओं के घरों में भजन और कीर्तन  गाए जाते हैं, जिसके बाद धार्मिक अनुष्ठान किए जाते हैं। कुछ श्रद्धालु शिशु भगवान राम की छोटी प्रतिमा को स्नान कराकर, वस्त्र पहनाकर और पालने में रखकर इस पर्व को मनाते हैं। इसके बाद आरती  और प्रसाद चढ़ाया जाता है, और भगवान राम और देवी सीता का विवाह संस्कार किया जाता है। कुछ विशेष स्थानों पर सामुदायिक भोज का आयोजन भी किया जाता है, लेकिन यह समुदाय पर निर्भर करता है।
 
रामनवमी का महत्व

रामनवमी का महत्व जीवन में सकारात्मक ऊर्जा लाना और पृथ्वी से नकारात्मक ऊर्जा को कम करना है।  इस शुभ अवसर के अर्थ को समझने और याद रखने के लिए राम कथा  और श्रीमद् भागवतम् का पाठ किया जाता है।
 
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