अब्दुल वसीम अंसारी, भोपाल-जबलपुर ( मध्यप्रदेश)
देश में जब भी सांप्रदायिक तनाव की खबरें सुर्खियां बनती हैं, उसी बीच कुछ ऐसी घटनाएं सामने आ जाती हैं जो इंसानियत की असली तस्वीर दिखा देती हैं। हाल ही में उत्तर प्रदेश के बरेली में एक मौलाना की कथित हत्या ने माहौल को दुख और गुस्से से भर दिया था। लेकिन इसी बीच मध्य प्रदेश के जबलपुर से आई एक खबर ने यह साबित कर दिया कि भारत की गंगा जमुनी तहजीब अभी भी जिंदा है।
यह कहानी है एक मजदूर की। नाम है रमजान। उम्र सिर्फ 22 साल। घर पश्चिम बंगाल में। पेशा मजदूरी। लेकिन हौसला ऐसा कि लोग उसे आज असली हीरो कह रहे हैं।घटना मध्य प्रदेश के जबलपुर की है। यहां बरगी डैम में गुरुवार की शाम एक बड़ा हादसा हो गया। नर्मदा नदी के शांत पानी पर घूमने निकले पर्यटकों का एक क्रूज अचानक मौत का जाल बन गया।
बताया जा रहा है कि क्रूज में करीब 29 लोग सवार थे। मौसम अचानक बदला। तेज हवा चली। पानी में लहरें उठीं। क्रूज का संतुलन बिगड़ा और कुछ ही पलों में वह डूबने लगा। जो सैर का पल था, वह चीख पुकार में बदल गया।
4 Dead, Many Missing As Cruise Boat With 31 On Board Sinks In Madhya Pradesh https://t.co/1Ta29g4W7d pic.twitter.com/OOMBbyRQlz
— NDTV (@ndtv) April 30, 2026
प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, लोग जान बचाने के लिए पानी में कूदने लगे। कुछ तैरकर किनारे आने की कोशिश कर रहे थे। कई लोग मदद के लिए चिल्ला रहे थे। हालात बेहद भयावह थे।इसी दौरान वहां पास में पुल निर्माण का काम चल रहा था। मजदूरों की एक टीम काम में लगी थी। उन्हीं मजदूरों में रमजान भी था। उसने जैसे ही क्रूज को डूबते देखा, वह बिना एक पल गंवाए दौड़ पड़ा।
रमजान ने बताया कि उसने देखा कि लोग पानी में डूब रहे हैं। उसे कुछ समझ नहीं आया। उसने बस यह सोचा कि अगर अभी नहीं कूदा तो लोग मर जाएंगे। उसने तुरंत एक रस्सी उठाई और करीब 25 फीट ऊंचाई से सीधे पानी में छलांग लगा दी।
यह फैसला आसान नहीं था। पानी गहरा था। लहरें तेज थीं। अंधेरा बढ़ रहा था। लेकिन रमजान ने अपनी जान की परवाह नहीं की।वह तैरते हुए क्रूज के पास पहुंचा। वहां अफरा तफरी मची थी। लोग डूब रहे थे। उसने एक एक करके लोगों को पकड़ना शुरू किया। उन्हें सहारा दिया। और रस्सी के सहारे किनारे तक पहुंचाया।

रमजान ने कुल छह लोगों को पानी से बाहर निकाला। इनमें से चार लोगों की जान बच गई। दो लोग नहीं बच सके। लेकिन अगर रमजान वहां नहीं होता, तो शायद मौत का आंकड़ा और बड़ा होता।इस बीच उसके साथी मजदूर भी पीछे नहीं रहे। बिहार के राजकुमार और गोरखपुर के शिवनाथ जैसे कई मजदूरों ने भी पानी में उतरकर मदद की। सभी ने मिलकर कई लोगों को बाहर निकाला।
घटना के बाद प्रशासन को सूचना दी गई। स्टेट डिजास्टर रिस्पांस फोर्स की टीम मौके पर पहुंची। रात भर रेस्क्यू ऑपरेशन चला। अंधेरे और गहरे पानी ने राहत कार्य को मुश्किल बना दिया।अब तक इस हादसे में 9 लोगों की मौत की पुष्टि हो चुकी है। कई लोग घायल हैं। कुछ को जबलपुर मेडिकल कॉलेज में भर्ती कराया गया है। कुछ लोगों के लापता होने की भी खबर है।
जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे। पूरे मामले की जांच शुरू कर दी गई है। शुरुआती जानकारी में सामने आया है कि तेज आंधी और मौसम में अचानक बदलाव इस हादसे की वजह बना। हालांकि लापरवाही के पहलू की भी जांच की जा रही है।
इस हादसे के बाद सोशल मीडिया पर रमजान की जमकर तारीफ हो रही है। लोग उसे इंसानियत की मिसाल बता रहे हैं। कई लोग कह रहे हैं कि यही असली भारत है, जहां धर्म नहीं बल्कि इंसानियत सबसे ऊपर है।
मोहन यादव ने भी रमजान की बहादुरी की सराहना की है। उन्होंने उसके लिए 51 हजार रुपये के इनाम का ऐलान किया है। लेकिन अब सोशल मीडिया पर एक नई मांग उठ रही है।कई लोग कह रहे हैं कि जब क्रिकेट खिलाड़ियों को करोड़ों रुपये मिलते हैं, तो चार लोगों की जान बचाने वाले रमजान को भी बड़ा सम्मान और बड़ा इनाम मिलना चाहिए। कुछ लोगों ने तो उसे सरकारी नौकरी देने की मांग भी की है।
इस घटना ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा किया है कि समाज में असली हीरो कौन है। क्या वह जो मैदान में खेलता है या वह जो अपनी जान जोखिम में डालकर दूसरों की जान बचाता है।रमजान का जवाब बहुत सीधा है। उसने कहा कि उसने जो किया, वह इंसानियत के नाते किया। अगर फिर ऐसा मौका आया, तो वह फिर कूदेगा।
उसके इस जवाब में ही उसकी असली पहचान छिपी है।यह घटना सिर्फ एक हादसा नहीं है। यह एक संदेश है। एक उम्मीद है। एक आईना है जिसमें समाज खुद को देख सकता है।एक तरफ नफरत की खबरें हैं। दूसरी तरफ रमजान जैसे लोग हैं जो बिना किसी भेदभाव के लोगों की जान बचाते हैं।
जबलपुर का यह हादसा दुखद है। कई परिवारों ने अपने अपनों को खोया है। लेकिन इसी दुख के बीच एक कहानी ऐसी भी है जो दिल को सुकून देती है।यह कहानी है हिम्मत की। यह कहानी है इंसानियत की। और यह कहानी है उस भारत की, जो आज भी जिंदा है।