राजस्थान का मुस्लिम बहुल धनूरी गांव, फौजियों की खान

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] • 3 Months ago
राजस्थान का मुस्लिम बहुल धनूरी गांव, फौजियों की खान
राजस्थान का मुस्लिम बहुल धनूरी गांव, फौजियों की खान

 

फरहान इसराइली/ जयपुर

राजस्थान के गांव धनूरी के घर-घर में देशपर मर मिटने वालों की टोलीरहती है. देशभक्ति के मामले में मुस्लिम बाहुल्य यह गांव धनूरी धन्य है.राजस्थान के झुंझुनूं जिला मुख्यालय से करीब 15किलोमीटर दूर गांव धनूरी मलसीसर उपखण्ड में आता है.यहां सर्वाधिक परिवार कायमखानी मुस्लिमों के हैं.पूरे गांव की आबादी लगभग साढ़े तीन हजार है.

इस गांव को आदर्श सैनिक गांव और फौजियों की खान के नाम से भी जाना जाता है.राजस्थान के शेखावाटी के झुंझुनूं जिले के बेटों पर यहां की मिट्टी को नाज है.यहां के बेटे देश के लिए मर मिटना गर्व की बात समझते हैं.देश को सबसे अधिक सैनिक और शहीद देने वाली झुंझुनूं की मिट्टी के कण कण में वीरता टपकती है.यहां की माताएं लोरी में अपने बच्चों को वीरों की कहानी सुनाती है.

 शेखावाटी का झुंझुनूं जिला राजस्थान में ही नहीं पूरे देश में शूरवीरों, बहादुरों के लिए अपनी एक विशेष पहचान रखता है.इस जिले में एक गांव है धनूरी.जिला मुख्यालय से महज 15किमी की दूरी पर स्थित धनूरी गांव बहादुरी की मिसाल है.धनूरी गांव का रिकॉर्ड आपको चौंका सकता है.यहां के हर दूसरे घर में फौजी है.धनूरी गांव के 18बेटों ने देश के लिए कुर्बानी दी है.

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वर्तमान में 600 से ज़्यादा फौजी धनूरी में

प्रथम विश्व युद्ध से लेकर पड़ोसी देशों से भारत के अब तक हुए हर युद्ध में दुश्मन के खिलाफ इस गांव के बेटों ने अपने साहस का परिचयदिया है.  यहां की पांच पांच पीढ़ियों ने देश सेवा की परंपरा को निभाया है.करीब 1500 घरों की आबादी वाले धनूरी गांव की करीब 90 फीसदी आबादी कायमखानियों की है.

वर्तमान में सबसे ज्यादा फौजी इसी गांव में हैं.गांव के करीब 600 से ज़्यादा बेटे अभी सेना में रहकर देश सेवा कर रहे हैं.धनूरी गांव के पूर्व फौजी मोहम्मद हुसैन खां बताते हैं, “गांव में लगभग 600 फौजी हैं.गांव के 18बेटे विभिन्न युद्धों में व सरहद की रक्षा करते हुए शहादत दी है. “

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पांच पांच पीढ़ियां सेना में

धनूरी के शहीद मो इलियास खान आठ भाई हैं.आठ में से सात भाइयों ने फौज में भर्ती होकर देश सेवा की.मो इलियास खान 1962की लड़ाई में शहीद हो गए थे.इनके भाई सूबेदार निसार अहमद खान, सरवर खां, कैप्टन नियाज माहम्मद खां, मो इकबाल खां, शब्बीर अली खां व अब्दुल अजीज खां हैं.

इसके अलावा शहीद कुतुबुद्दीन खां के बेटे कैप्टन मोइनुदीन खां, इनके बेटे कर्नल जमील खां और जमील खां का बेटा वर्तमान में लेफ्टिेनेंट के पद पर फौज में है.इनकी पांच पीढ़ियां देश सेवा कर रही है.गांव के बिग्रेडियर अहमद अली खां के बेटे सत्तार खां और इनके भाई निसार खां देश सेवा में हैं.सत्तार खां का बेटा गफ्फार खान व जब्बार खान तथा निसार खां का बेटा इरसाद खां सेना में अपनी सेवाएं दे रहे हैं.

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धनूरी के बेटों ने हर युद्ध में दी शहादत

राजस्थान के गांव धनूरी के बेटे देश की रक्षा के लिए मर मिटने में सबसे आगे हैं.प्रथम व दूसरे विश्व युद्ध से लेकर भारत-चीन युद्ध 1962, भारत-पाक युद्ध 1965, 1971व 1999के करगिल युद्ध तक में यहां के 17बेटों ने देश के लिए शहादत दी है.शहीद मेजर महमूद हसन खां के नाम पर स्कूल का नामांकरण भी किया हुआ है.

भारत-पाक युद्ध 1971में धनूरी के मेजर महमूद हसन खां, जाफर अली खां और कुतबुद्दीन खां शहीद हुए थे.1999के करगिल युद्ध में गांव धनूरी के मोहम्मद रमजान खां वीरगति को प्राप्त हुए थे.शहीद मेजर महमूद हसन खां के नाम पर स्कूल का नामांकरण भी किया हुआ है.

कहते हैं कि राजस्थान में स्कूलों का नाम शहीदों के नाम पर रखे जाने के परंपरा धनूरी गांव से ही शुरू हुई थी.इसी गांव के आठ भाइयों में से सात भाइयों ने फौज में अपनी सेवा दी थी.यहां के मो. इलियास खान साल 1962की लड़ाई में शहीद हो गए थे.इनके भाई सुबेदार निसार अहमद खान, सरवर खां, कैप्टन नियाज मौहम्मद खां, मो. इकबाल खां, शब्बीर अली खां और अब्दुल अजीज खां हैं। सभी ने देश सेवा को ही चुना था.

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वॉर मेमोरियल का निर्माण कार्य जारी

धनूरी गांव के वरिष्ठ उर्दू अध्यापक हामिद खान बताते हैं,यहां कायमखानी वॉर मेमोरियल शहीद स्मारक बनाया जा रहा है.दरअसल,मुस्लिम समाज में शहीदो की प्रतिमा नहीं लगाई जाती,इसलिए आने वाली पीढ़ियों को शहीदों से प्रेरणा मिल सके इसके लिए कायमखानी समाज की ओर से शहीद स्मारक बनाया जा रहा है.

देशभक्ति से जुड़े इस गौरवशाली काम को सरकार एवं प्रशासन से मंजूरी मिलने के बाद इसका कार्य अब तक 80 प्रतिशत पूरा हो चुका है.यह धनूरी गांव में मलसीसर - राजगढ़ रोड पर तीन सौ वर्ग मीटर में बनाया जाएगा.

इसके लिए भामाशाह मास्टर अरशद अली ने जमीन दान दी थी.शहीद स्मारक में अशौक स्तंभ, मौटिवेशन हाल, 30 फीट ऊंचा तिरंगा, प्रदेशभर के कायमखानी समाज के शहीदों के नाम व उनकी वीर गाथाओं का जिक्र किया जाएगा.

रंग बिरंगी लाइटें तथा फव्वारे लगाए जाएंगे.गांव में विकास की स्थिति को बताते हुए हामिद खान कहते हैं कि यहां पर एक महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल, एक सीनियर सेकेंडरी स्कूल(1974से ) तीन प्राइवेट स्कूल है तथा दो सरकारी अस्पताल हैं.गांव की हर सड़क सीसी रोड से बनी हुई है और धनुरी में आने जाने के लिए जयपुर से झुंझुनू तक हर एक रोडवेज गाड़ी उपलब्ध है। सैनिकों के साथ यहां 50 से 60 सरकारी अध्यापक भी हैं.