मुहर्रम विशेषः दिल्ली के जगदीश प्रसाद को है ताजियों से प्रेम

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 03-07-2024
Imambara
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इमरान खान / नई दिल्ली

भारत में मुहर्रम काफी बड़े पैमाने पर मनाया जाता है. 17 जुलाई को पूरे भारत में मुहर्रम मनाया जायेगा. ऐसे में जगदीश प्रसाद की खबर हिन्दू-मुस्लिम सौहार्द के परिदृश्य में एक ठंडी हवा के झोंके की तरह है. त्रिलोक पूरी के रहने वाले जगदीश प्रसाद हिन्दू-मुस्लिम एकता की एक मिसाल है. त्रिलोक पूरी 27 ब्लॉक में मनाये जाने वाले मुहर्रम में जगदीश प्रसाद बढ़-चढ़कर शामिल होते हैं. वह मुहर्रम के जुलुस में भी हिस्सा लेते हैं और साथ ही वह ताजिया बनाने में भी सहायता करते हैं.

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टावाज-द वॉयस ने जगदीश प्रसाद से बातचीत की, तो उत्तर प्रदेश गोण्डा के रहने वाले जगदीश प्रसाद ने बताया कि वह शुरू से ही मुहर्रम व ताजिया से जुड़े हुए हैं, वह अपने गांव में भी मुहर्रम के समय लोगों की मदद करते रहे हैं और जुलुस में भी शामिल होते रहे हैं.. उन्होंने आगे बताया कि मैंने कभी भी हिन्दू-मुस्लिम में कोई भेद नहीं किया. हम शुरू से ही मुस्लिम लोगों के बीच पले-बड़े हैं. होली, दिवाली, ईद, मुहर्रम हर त्यौहार खुशी और मनोरंजन का माध्यम रहा है. हमारे पापा किशन लाल ने भी हमें कभी नहीं रोका, बल्कि वह खुद पड़ोस में रहने वाले मुस्लिम लोगो के घर हर त्यौहार पर आते-जाते रहते थे.

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जगदीश प्रसाद के पिता किशन लाल जी 1990 में गांव से निकल कर त्रिलोक पूरी 27 ब्लॉक में आकर बस गए. किशन लाल जी ने दिल्ली में आकर किताबों की दुकान खुली, पिता जी दुकान पर रहते थे और हमने ठेकेदारी का काम शुरू कर दिया था, जो आज तक हम करते हैं.

आगे बात करते हुए जगदीश प्रसाद बताता हैं कि जब हम दिल्ली आये, तो हमने देखा कि हमारे घर के सामने एक इमामबाड़ा है, वह उस वक्त काफी छोटा था, जो कि पहले की तुलना में काफी बड़ा हो गया है. पहले जब मुहर्रम होता था, तो उस वक्त काफी कम लोग मुहर्रम में हिस्सा लेते थे, फिर मैंने मुहर्रम में हिस्सा लेना शुरू किया और ताजिया बनवाने में भी मदद करने लगा.

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ताजिया बनाने के लिए छोटी पतली लकड़ी या बांस की लकड़ी का काम में गांव में भी करता था. वही काम मैं यहाँ भी करता हूँ. ताजिये की सजावट के लिए विभिन्न रंग के कपडे या पॉलीथिन का काम मुझे नहीं आता है, लेकिन मैं मदद कर देता हूँ. जिससे ताजिया अच्छा लगे.

मेरे दोस्त रवि और कासिम अली ने फैसला लिया कि अब हर मुहर्रम पर हम लोगों से चंदा लेंगे, ताकि हम भी बड़ा ताजिया बना सकें. रवि और मैंने हिन्दुओं से ताजिये का चंदा लेना शुरू किया. शुरुआत में कम लोग चंदा देते थे, लेकिन अब लगभग 50 परिवार मुहर्रम पर चंदा देते हैं.

शिया मुस्लिमों के कुछ ही घर त्रिलोक पूरी 27 ब्लॉक में हैं, जिसकी वजह से मुहर्रम पर भीड़ नहीं होती. इसलिए 27 ब्लॉक का ताजिया शिया, सुन्नी और हिन्दू समाज के लोग उठाते हैं.

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आवाज-द वॉयस के संवादाता ने त्रिलोक पूरी 27 ब्लॉक के  मुहर्रम कॉमिटी के मुखिया इंतजार हुसैन से बात की तो पता चला कि त्रिलोक पूरी 27 ब्लॉक में सन 1980 से मुहर्रम मनाने की शुरुवात हुई थी, जिसे दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच के बतौर इंस्पेक्टर काम करने वाले इंतजार हुसैन ने शुरू किया था.

इंतजार हुसैन का कहना है कि शुरुआत में कुछ ही शिया लोग रहते थे, तो मुहर्रम तो मनाया जाता था, लेकिन कोई जुलुस नहीं निकाला जाता था. फिर धीरे-धीरे हमने छोटे जुलुस से शुरुआत की, जिसे देखकर काफी लोग जुड़े और जुलुस बड़ा होता चला गया. इंतजार हुसैन बताया कि हम जुलुस में कोई खेल नहीं खेलते हैं, हम शान्तिपूर्वक तरीके से जुलुस निकालते हैं. हमारे इमामबाड़ा को बड़ा करने में भी हर वर्ग के लोगों ने सहायता की है.

जुलुस का रास्ता त्रिलोक पूरी 27 ब्लॉक से शुरू होता है जो मयूर विहार फेज 1 से होते हुए कोटला कर्बला पर जाकर खतम होता है. हमारे जुलुस में ना के बराबर पुलिस होती है. इसका कारण है कि कोई भी हथियारबंद खेल नहीं होता. इसलिए हिन्दू लोग भी हमारे ताजिया में शामिल होते हैं.

 

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