साहित्य हमें एक अलग दुनिया से रूबरू कराता हैं, जेएनयू में बोले शाह फैसल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 22-10-2023
Shah Faesal, IAS in JNU
Shah Faesal, IAS in JNU

 

मोहम्मद अकरम / नई दिल्ली

साहित्य हमारे अंदर एक नई ऊर्जा पैदा करता है. इससे हमें दुनिया को नये नजरिये से देखने का मौका मिलता है. इसे पढ़ना हमारे लिए बहुत जरूरी है, लेकिन सवाल है कि किस तरह की साहित्यिक किताबों को हम पढ़ें? ये सवाल अहम है. साहित्य तीन तरह की समस्याओं को हल करता है. पहला ये कि हम अपने नफ्स को जानते हैं, अपनी रूह को पहचानते हैं कि इस दुनिया में हम क्यों आए हैं? हमारा मकसद क्या है? दूसरा ये कि साहित्य से हम अपने आसपास के लोगों को पहचानते हैं, उनके दर्द और खुशी को नजदीक से देखते हैं और तीसरा ये कि पूरी कायनात को देखने का मौका मिलता है. इससे हमें ये हासिल होता हैं कि हम इस दुनिया में क्यों आए हैं, हम कहां जा रहे हैं? इस तरह के सवालों को सोचने का मौका हमें साहित्यिक किताबों को पढ़ने से मिलता हैं. ये बातें जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी में सेंटर ऑफ इंडियन लेंगुएज द्वारा आयोजित ‘साहित्य में नैतिकता और मानवीय मूल्य’ विषय पर केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के उप सचिव शाह फैसल ने छात्रों के बीच कहीं.

सभी धार्मिक ग्रंथ हमें साहित्य सिखाते हैं

शाह फैसल ने कहा कि भगवत गीता और कुरान पाक समेत सभी धार्मिक ग्रंथ हमें साहित्य ज्ञान सिखाते हैं. हमें अपने से बाहर की दुनिया से रूबरू कराते हैं कि हमारे बाहर भी एक बड़ी दुनिया हैं. जहां हम पढ़कर पहुंच सकते हैं.

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दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं

शाह फैसल ने कहा कि साहिर लुधियानवी के मुताबिक दुनिया में दो तरह के लोग होते हैं. एक रोता है और दूसरा रोता नहीं बल्कि अपने आंसू को कंट्रोल करता है.  उन्होंने साहिर लुधियानवी की इन पंक्तियों के जरिये लोगों को साहित्यिक मूल्यों को समझाया.

कभी-कभी मिरे दिल में ख्याल आता है

कि जिंदगी तेरी जुल्फों की नर्म छाँव में

गुजरने पाती तो शादाब हो भी सकती थी

ये तीरगी जो मेरी जीस्त का मुकद्दर है.

इस मौके पर उन्होंने अल्लामा इकबाल, शेख सादी, फैज अहमद फैज समेत कई मकबूल शायरों की पंक्तियों पेश करके छात्रों को साहित्यिक किताब पढ़ने के लिए प्रेरित किया.

नौजवान एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरणा लें

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कार्यक्रम में अल्पसंख्यक शिक्षा संस्थान राष्ट्रीय आयोग के सदस्य प्रो. शाहिद अख्तर ने समाज और देश की सेवा पर बोलते हुए कहा है नौजवानों को चाहिए कि वह एपीजे अब्दुल कलाम से प्रेरणा लें, जिन्होंने मुसलमान होने के साथ देश के लिए ऐसा काम किया कि आज दुनिया उन्हें ‘मिसाइल मैन’ के नाम से जानती है.  उन्होंने नई शिक्षा नीति पर कहा कि मौजूदा सरकार देश में हर बुनियादी शिक्षा पर जोर दे रही, ताकि देश का भविष्य अपनी मातृभाषा में शिक्षा हासिल करें.

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प्रोग्राम के बाद शाह फैसल ने यूपीएससी की तैयारी करने वाले छात्रों को कई टिप्स भी दिए. मंच संचालन वरिष्ट पत्रकार डॉ. शफी अयूब ने अदा की और डा. नसीब के धन्यवाद पेश किया.