मंसूरूद्दीन फरीदी / नई दिल्ली/पटना
बिहार में हिंदू और मुस्लिम समुदायों के बीच साम्प्रदायिक सौहार्द की कई ऐसी मिसालें सामने आई हैं, जो यह साबित करती हैं कि आस्था और संस्कृति की कोई सीमा नहीं होती। बिहार का सामाजिक माहौल सदैव विविधता, सहिष्णुता और आपसी सम्मान की मजबूत परंपरा के लिए जाना जाता रहा है। यहाँ धार्मिक स्थल केवल पूजा-अर्चना का केन्द्र नहीं, बल्कि समाज को जोड़ने और भाईचारे को बढ़ावा देने का माध्यम बनते हैं। इसी क्रम में पूर्वी चंपारण के कथुलिया इलाके में बन रहा विराट रामायण मंदिर पूरे देश में चर्चा का विषय बन गया है। यह मंदिर न केवल भव्यता और शिल्प कला का प्रतीक है, बल्कि सामाजिक एकता और आपसी विश्वास का भी जीवंत उदाहरण है।
इस मंदिर का सबसे खास पहलू यह है कि इसे बनाने के लिए स्थानीय मुस्लिम परिवारों ने भी जमीन दान की है। महावीर मंदिर ट्रस्ट के सेक्रेटरी एस. कुणाल के अनुसार, एक मुस्लिम परिवार ने करोड़ों रुपये की जमीन दान कर इसे हिंदू विरासत का जीवंत उदाहरण बना दिया। उन्होंने सोशल मीडिया पर इसे हिंदू-मुस्लिम भाईचारे और साझा विरासत का संदेश बताया। यह पहल न केवल धार्मिक सहिष्णुता का प्रतीक है, बल्कि समाज में आपसी भरोसे और सहयोग की भावना को भी मजबूती देती है।
विराट रामायण मंदिर का आकार और भव्यता देखते ही बनती है। यह मंदिर दुनिया का सबसे ऊँचा रामायण मंदिर होगा, जिसकी ऊँचाई 270 फ़ीट है। इसकी लंबाई 1080 फ़ीट और चौड़ाई 540 फ़ीट होगी। मंदिर परिसर में कुल 18 शिखर और 22 छोटे मंदिर शामिल होंगे। आयतन के हिसाब से यह अयोध्या के राम मंदिर से भी बड़ा है। इसके साथ ही परिसर में दुनिया का सबसे बड़ा शिवलिंग भी स्थापित किया जाएगा। मंदिर के भव्य निर्माण और शिल्प कला को देखते हुए यह धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण बन गया है।
महावीर मंदिर ट्रस्ट के सेक्रेटरी एस. कुणाल ने कहा कि यह मंदिर हमारी साझी हिंदू विरासत का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने बताया कि मुस्लिम परिवार द्वारा यह जमीन दान करने का कदम समाज में भाईचारे और सहयोग का मजबूत संदेश देता है। कुणाल ने कहा कि जब उद्देश्य नेक होता है, तो धर्म, जाति या पहचान कोई बाधा नहीं बनती। उन्होंने इसे स्थानीय समाज के लिए एक प्रेरक उदाहरण बताया।
इस पहल में सबसे महत्वपूर्ण योगदान चंपारण के कथुलिया गांव के रहने वाले और वर्तमान में गुवाहाटी में रहने वाले इश्तियाक अहमद खान और उनके परिवार का है। साल 2022 में उन्होंने मंदिर ट्रस्ट को 23 कट्ठा जमीन दान की थी। फेसबुक पर अजय कुमार से बातचीत में इश्तियाक खान ने बताया कि “मैं जहां खड़ा हूं, यह जमीन हमारी है।
अगर यह जमीन नहीं होती, तो मंदिर का प्रोजेक्ट मुमकिन नहीं होता। इसलिए हमने इसे बिना किसी कीमत के ट्रस्ट को दे दिया।” उन्होंने आगे कहा कि ट्रस्ट ने जमीन खरीदने की पेशकश की थी, लेकिन उन्होंने इसे सिर्फ दान के रूप में देने का निर्णय लिया। उस समय सरकारी मुआवज़े के अनुसार जमीन की कीमत लगभग 2.5 करोड़ रुपये थी। इस दान की औपचारिकता को केसरिया रजिस्ट्रेशन ऑफिस में रजिस्टर्ड भी किया गया।
इश्तियाक खान के इस कदम के बाद, अन्य ग्रामीणों ने भी मंदिर निर्माण में योगदान देने की पहल की। उन्होंने रियायती दरों पर अपनी जमीन देने का निर्णय लिया, जिससे परियोजना और भी सुदृढ़ हुई। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घटना ने इलाके में सकारात्मक माहौल पैदा किया है। हिंदू और मुस्लिम समुदाय के लोग मंदिर निर्माण में सहयोग कर रहे हैं। वे सामग्री, श्रम और धन दोनों रूपों में मदद कर रहे हैं। इस घटना से आपसी भरोसा बढ़ा है और धर्म से परे एक साझा मानवता का संदेश गया है।
महावीर मंदिर ट्रस्ट के सेक्रेटरी एस. कुणाल ने इसे “पॉज़िटिव मैसेज” करार दिया। उनका कहना है कि यह पहल बताती है कि जब उद्देश्य नेक हो और समाज के लिए कुछ किया जाए, तो धर्म, जाति और पहचान के बंधन पीछे रह जाते हैं। सोशल मीडिया पर भी इस घटना को खूब सराहा जा रहा है। इसे नफरत और कट्टरता के बीच भाईचारे की मिसाल बताया जा रहा है। सोशल एक्टिविस्टों का कहना है कि ऐसे कदम देश की असली पहचान और संस्कृति को मजबूत बनाते हैं।
विराट रामायण मंदिर की कुल लागत करीब 1000 करोड़ रुपये है और इसे पांच वर्षों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। उत्तर प्रदेश के गुलाबी चूना पत्थर का इस्तेमाल मंदिर निर्माण में किया जाएगा। राजस्थानी नक्काशी और स्पेनिश शैली की मूर्तियां इसकी भव्यता में चार चाँद लगाएंगी। मंदिर ऐतिहासिक केसरिया बुद्ध स्तूप के पास राम-जानकी मार्ग पर स्थित होगा। इसे भूकंप-रोधी तकनीक का उपयोग करके बनाया जा रहा है, ताकि यह सदीयों तक सुरक्षित रहे। मंदिर परिसर में हेलीपैड, एक बड़ा एग्ज़िबिशन एरिया और रामायण के सीन का लाइव-एक्शन भी शामिल होगा।
मंदिर निर्माण से न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से लाभ होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था में भी वृद्धि की उम्मीद है। स्थानीय मुस्लिम व्यापारी भी इस परियोजना को लेकर उत्साहित हैं, क्योंकि इससे इलाके में व्यापार और पर्यटन दोनों में तेजी आने की संभावना है। यही वजह है कि मंदिर निर्माण के दौरान सभी समुदाय के लोग सहयोग कर रहे हैं और इसे समाज में भाईचारे और सौहार्द का प्रतीक बना रहे हैं।
इस घटना का सबसे बड़ा महत्व यह है कि यह धर्म से परे इंसानियत और भाईचारे का संदेश देती है। मुस्लिम परिवार का योगदान दर्शाता है कि आस्था और संस्कृति किसी समुदाय विशेष तक सीमित नहीं हैं। जब उद्देश्य नेक हो, तो समाज में आपसी सहयोग और सौहार्द की भावना को बढ़ाया जा सकता है। स्थानीय लोगों और ट्रस्ट के सदस्यों का कहना है कि यह घटना आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनेगी। यह बताती है कि हिंदू-मुस्लिम दोनों समुदाय, चाहे किसी भी धर्म का पालन करें, मिलकर समाज की भलाई और सांस्कृतिक विरासत को मजबूत कर सकते हैं।
सोशल मीडिया पर इस घटना की खूब चर्चा हो रही है। यूजर्स इसे “भाईचारे की मिसाल” और “नफरत की राजनीति के खिलाफ इंसानियत की जीत” बता रहे हैं। अनेकों ने इसे देश में सामाजिक सौहार्द और सांस्कृतिक एकता की याद दिलाने वाला कदम करार दिया। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे प्रयास समाज में आपसी विश्वास, सहयोग और भाईचारे को बढ़ावा देते हैं। यह दर्शाता है कि बिहार जैसे विविधतापूर्ण राज्य में धार्मिक सहिष्णुता और एकता की परंपरा कितनी मजबूत है।
पूर्वी चंपारण का विराट रामायण मंदिर न केवल धार्मिक और सांस्कृतिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह भाईचारे और सामाजिक एकता का प्रतीक भी है। मुस्लिम परिवार द्वारा जमीन दान करना इस बात का जीवंत प्रमाण है कि धर्म की सीमाओं के परे इंसानियत और सह-अस्तित्व की भावना को सर्वोपरि माना जा सकता है। यह मंदिर आने वाले वर्षों में धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और सामाजिक सौहार्द का प्रतीक बनेगा। यह दिखाता है कि जब समाज के लोग मिलकर नेक उद्देश्य के लिए काम करते हैं, तो न केवल भव्य निर्माण संभव होता है, बल्कि इंसानियत और भाईचारे की मिसाल भी कायम होती है।
पूर्वी चंपारण का यह कदम पूरी दुनिया के लिए संदेश है कि धर्म, जाति या पहचान से परे इंसानियत और आपसी सहयोग ही समाज की सबसे बड़ी ताकत है। यह उदाहरण न केवल बिहार बल्कि पूरे देश के लिए प्रेरक है, जो यह सिखाता है कि मिलकर काम करने से सामाजिक सौहार्द, भाईचारा और सांस्कृतिक विरासत को नई ऊँचाइयों तक पहुंचाया जा सकता है।