चुनाव नतीजे सोमवार, देश की राजनीति का बड़ा दिन

Story by  मलिक असगर हाशमी | Published by  [email protected] | Date 04-05-2026
The 2026 Mega-Battle: Results from Five States Will Determine the Country's Future Direction. AI Photo Hashmi
The 2026 Mega-Battle: Results from Five States Will Determine the Country's Future Direction. AI Photo Hashmi

 

आवाज द वॉयस ब्यूरो / नई दिल्ली 

भारत की राजनीति में सोमवार का दिन किसी बड़े फैसले से कम नहीं होने वाला है। केरल, असम, पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु और पुडुचेरी में विधानसभा चुनाव के लिए डाले गए वोटों की गिनती शुरू होने जा रही है। शाम तक यह तस्वीर साफ हो जाएगी कि इन पांच राज्यों की कमान किसके हाथों में होगी। यह चुनाव सिर्फ राज्यों की सरकारें चुनने के लिए नहीं थे। ये नतीजे 2029 के लोकसभा चुनाव की बिसात बिछाएंगे। संसद के ऊपरी सदन यानी राज्यसभा में भी शक्ति संतुलन इन्हीं परिणामों से तय होगा।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अगुवाई वाली बीजेपी के लिए यह एक बड़ी अग्निपरीक्षा है। 2024 के आम चुनाव में बहुमत से दूर रहने के बाद बीजेपी ने इन राज्यों में अपनी पूरी ताकत झोंक दी थी। खासकर पश्चिम बंगाल और असम जैसे राज्यों में भगवा लहर के विस्तार को लेकर काफी चर्चा रही है। दूसरी तरफ क्षेत्रीय पार्टियों के पास अपनी सत्ता बचाने और राष्ट्रीय राजनीति में अपना कद बढ़ाने का यह सुनहरा मौका है। जहां भी क्षेत्रीय दल जीतेंगे वहां उनके मुखिया का मुख्यमंत्री बनना तय माना जा रहा है।

एग्जिट पोल पर छिड़ा घमासान और विश्वसनीयता का संकट

नतीजों से ठीक पहले एग्जिट पोल को लेकर देश में एक नई बहस छिड़ गई है। 2026 के ये सर्वे विवादों के घेरे में हैं। एक प्रमुख पोलिंग कंपनी ने पश्चिम बंगाल के नतीजे जारी करने से यह कहकर मना कर दिया कि उनके सर्वे में लोग खुलकर नहीं बोले। वहीं एक दूसरी कंपनी लाखों लोगों के बीच सर्वे करने का दावा कर रही है। मुख्यधारा के मीडिया से लेकर डिजिटल प्लेटफॉर्म्स तक इस बात पर चर्चा हो रही है कि क्या इन दावों में कोई सच्चाई है। जनता और राजनीतिक दलों के बीच इन आंकड़ों को लेकर गहरा संदेह है। असलियत क्या है यह तो सोमवार की शाम को ही पता चलेगा।

पश्चिम बंगाल: ममता का किला या बीजेपी का नया द्वार?

बंगाल इस समय भारत का सबसे बड़ा राजनीतिक रणक्षेत्र बना हुआ है। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी अपनी सत्ता बचाने के लिए एड़ी-चोटी का जोर लगा चुकी हैं। वह लगातार चौथी बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड बनाना चाहती हैं। लेकिन उनके सामने बीजेपी के सुवेंदु अधिकारी पहाड़ बनकर खड़े हैं। सुवेंदु कभी ममता के करीबी थे लेकिन अब वह उनके सबसे बड़े प्रतिद्वंद्वी हैं। बीजेपी ने बंगाल को प्रतिष्ठा का प्रश्न बना लिया है।

टीएमसी सरकार भ्रष्टाचार और कानून व्यवस्था जैसे आरोपों से घिरी रही है। खासकर कोलकाता के अस्पताल में डॉक्टर के साथ हुई घटना ने ममता सरकार को बैकफुट पर धकेला है। बीजेपी ने पीड़ित परिवार को राजनीति के केंद्र में लाकर सहानुभूति बटोरने की कोशिश की है। एक बड़ा विवाद मतदाता सूची को लेकर भी है। बंगाल में करीब 90 लाख नाम वोटर लिस्ट से हटाए गए हैं। टीएमसी इसे मुस्लिम वोटरों को रोकने की साजिश बता रही है। वहीं बीजेपी का कहना है कि यह अवैध घुसपैठियों के खिलाफ एक जरूरी सफाई है।

असम और केरल: पहचान और विचारधारा की लड़ाई

असम में मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा अपनी दूसरी पारी की उम्मीद कर रहे हैं। सरमा की राजनीति बंगाली प्रवासियों और पहचान के मुद्दे पर टिकी है। उन्होंने ध्रुवीकरण को हथियार बनाकर अपने वोट बैंक को मजबूत किया है। उनके सामने कांग्रेस के गौरव गोगोई और देवव्रत सैकिया चुनौती पेश कर रहे हैं। कांग्रेस यहां अपनी पुरानी जमीन वापस पाने के लिए संघर्ष कर रही है।

दक्षिण की बात करें तो केरल का मिजाज हमेशा अलग रहा है। यहां लेफ्ट डेमोक्रेटिक फ्रंट (एलडीएफ) के पिनाराई विजयन तीसरी बार सत्ता में आने की कोशिश कर रहे हैं। केरल में मुस्लिम और ईसाई आबादी लगभग आधी है। इसी वजह से बीजेपी की हिंदूवादी राजनीति को यहां ज्यादा सफलता नहीं मिल पाई है। हालांकि इस बार बीजेपी ने केरल में कुछ सीटों पर सेंध लगाने की पूरी कोशिश की है। कांग्रेस के नेतृत्व वाला यूडीएफ गठबंधन भी वापसी की पुरजोर कोशिश में है।

तमिलनाडु में सुपरस्टार की एंट्री से बदला समीकरण

तमिलनाडु में इस बार मुकाबला दिलचस्प हो गया है। द्रविड़ राजनीति के पुराने खिलाड़ियों द्रमुक और अन्नाद्रमुक के बीच अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके ने एंट्री मारी है। मुख्यमंत्री एमके स्टालिन अपनी लोकप्रियता के भरोसे हैं। लेकिन विजय की नई पार्टी ने युवाओं के बीच हलचल पैदा कर दी है। तमिलनाडु में बीजेपी कभी बड़ी ताकत नहीं रही लेकिन वह छोटे दलों के सहारे पैर जमाने की कोशिश में है। पुडुचेरी में भी एन रंगास्वामी और बीजेपी का गठबंधन अपनी सत्ता बचाने की लड़ाई लड़ रहा है।

इन सीटों पर टिकी हैं सबकी निगाहें

पूरे देश की नजरें कुछ हॉट सीटों पर रहेंगी। बंगाल की भवानीपुर सीट पर ममता बनर्जी का मुकाबला होगा। नंदीग्राम में सुवेंदु अधिकारी अपनी ताकत दिखाएंगे। असम की जालुकबारी सीट से हिमंत बिस्वा सरमा मैदान में हैं। तमिलनाडु में चेन्नई की पेराम्बुर सीट अहम है क्योंकि यहां से अभिनेता विजय खुद चुनाव लड़ रहे हैं। केरल की धर्मदम सीट से मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन और परवूर से विपक्ष के नेता वीडी सतीसन की किस्मत का फैसला होगा।
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राष्ट्रीय राजनीति पर क्या होगा असर?

इन चुनावों के परिणाम सीधे तौर पर राज्यसभा की सीटों को प्रभावित करेंगे। राज्यसभा की 245 सीटों में से 141 पर अभी बीजेपी और उसके सहयोगी काबिज हैं। संविधान में कोई भी बड़ा बदलाव करने के लिए दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। अगर बीजेपी इन राज्यों में अच्छा प्रदर्शन करती है तो वह उस जादुई आंकड़े के करीब पहुंच सकती है। इसके अलावा विपक्षी एकता के लिए भी ये नतीजे अहम हैं। अगर क्षेत्रीय दल जीतते हैं तो 2029 में प्रधानमंत्री मोदी के खिलाफ एक मजबूत मोर्चा खड़ा होने की संभावना बढ़ जाएगी।

सोमवार की शाम तक भारत के राजनीतिक नक्शे पर कई नई लकीरें खिंच जाएंगी। क्या ममता बनर्जी का जादू बरकरार रहेगा? क्या बीजेपी दक्षिण और पूर्व में अपनी जड़ें गहरी कर पाएगी? या फिर क्षेत्रीय दल फिर से अपनी ताकत का लोहा मनवाएंगे? इन सभी सवालों के जवाब मतगणना केंद्र की खिड़कियों से बाहर आने को तैयार हैं। भारत की जनता की नजरें अब सिर्फ 4 मई के आधिकारिक घोषणापत्र पर टिकी हैं। यह जनादेश आने वाले दशक की राजनीति का रुख तय करेगा।