इस्लामाबाद
पाकिस्तान क्रिकेट टीम में इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज के दौरान उठाए गए फैसलों ने एक बार फिर टीम प्रबंधन और पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। टीम के बल्लेबाज लगातार नाकाम रहे हैं। इसके बावजूद गेंदबाजी विभाग का प्रदर्शन कई मौकों पर प्रभावी रहा। इसके बाद भी तेज गेंदबाजी कोच उमर गुल को पद से हटा दिया गया।
यही वजह है कि पाकिस्तान के पूर्व क्रिकेटरों ने टीम प्रबंधन के फैसलों पर सवाल उठाना शुरू कर दिया है। पूर्व मुख्य कोच मुदस्सर नजर ने साफ पूछा है कि जब गेंदबाज अपना काम कर रहे थे, तो फिर गेंदबाजी कोच उमर गुल को हटाने का फैसला क्यों किया गया।
इंग्लैंड के खिलाफ तीन टेस्ट मैचों की सीरीज में पाकिस्तान पहले दो मुकाबले गंवा चुका है। दोनों मैचों में पाकिस्तान की बल्लेबाजी बड़ी चिंता बनकर सामने आई। मध्यक्रम के बल्लेबाज महत्वपूर्ण मौकों पर टीम को संभालने में नाकाम रहे। दूसरी ओर तेज गेंदबाजों ने कई मौकों पर इंग्लैंड के बल्लेबाजों पर दबाव बनाया।
लॉर्ड्स में खेले गए दूसरे टेस्ट की पहली पारी में पाकिस्तान के तीन तेज गेंदबाजों ने मिलकर आठ विकेट हासिल किए। इंग्लैंड की टीम 290 रन पर ऑलआउट हो गई। दूसरी पारी में भी पाकिस्तान के तेज गेंदबाजों ने शानदार प्रदर्शन किया और इंग्लैंड को 208 रन पर समेट दिया। इसके बावजूद पाकिस्तान मुकाबला नहीं बचा सका।
मैच के बाद पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड ने मुख्य कोच सरफराज अहमद और तेज गेंदबाजी कोच उमर गुल को बर्खास्त कर दिया। इस फैसले ने क्रिकेट जगत में कई सवाल खड़े कर दिए हैं।
गेंदबाजों ने किया काम, फिर उमर गुल क्यों हटे?
पाकिस्तान के पूर्व मुख्य कोच मुदस्सर नजर ने उमर गुल को हटाए जाने के फैसले पर नाराजगी जताई। उनका कहना है कि अगर गेंदबाज अच्छा प्रदर्शन कर रहे थे तो गेंदबाजी कोच को हटाने की वजह समझ से परे है।
मुदस्सर नजर ने पाकिस्तान की हार के लिए बल्लेबाजी को बड़ी समस्या बताया। उन्होंने कहा कि टीम का मध्यक्रम लंबे समय से अपेक्षाओं के मुताबिक प्रदर्शन नहीं कर रहा है। वरिष्ठ बल्लेबाज भी जिम्मेदारी लेने में नाकाम रहे हैं।
उनके मुताबिक पाकिस्तान के बल्लेबाजों की कमजोरी अब किसी एक सीरीज तक सीमित नहीं रही। पिछले कई वर्षों से मध्यक्रम की समस्या टीम के सामने बनी हुई है। ऐसे में कोचिंग स्टाफ में बदलाव का आधार प्रदर्शन के हर पहलू को ध्यान में रखकर तय किया जाना चाहिए।
उन्होंने इंग्लैंड की मौजूदा टीम को लेकर भी टिप्पणी की। उनका कहना था कि इंग्लैंड की मौजूदा गेंदबाजी लाइनअप को पाकिस्तान के पुराने दौर के दिग्गज गेंदबाजों से नहीं जोड़ा जा सकता। अगर ऑस्ट्रेलिया के मौजूदा गेंदबाज भी उसी पिच पर खेलते तो वे भी परिस्थितियों का फायदा उठा सकते थे।
मुदस्सर नजर ने पाकिस्तान की बल्लेबाजी को लेकर चिंता जताते हुए कहा कि जब टीम के छह बल्लेबाज आउट हो जाते हैं तो उसके बाद वापसी की संभावना बेहद कम हो जाती है। यही समस्या पाकिस्तान को लगातार परेशान कर रही है।
बल्लेबाजी बनी पाकिस्तान की सबसे बड़ी चिंता
इंग्लैंड के खिलाफ टेस्ट सीरीज में पाकिस्तान की सबसे बड़ी कमजोरी उसकी बल्लेबाजी रही है। टीम के शीर्ष और मध्यक्रम के बल्लेबाज लगातार बड़ी साझेदारी बनाने में असफल रहे हैं।
टेस्ट क्रिकेट में किसी भी टीम के लिए मजबूत बल्लेबाजी बेहद जरूरी होती है। गेंदबाज विपक्षी टीम को कम स्कोर पर रोक भी दें, लेकिन अगर बल्लेबाज उस बढ़त का फायदा नहीं उठा पाते तो पूरा प्रयास बेकार हो जाता है।
पाकिस्तान के साथ भी कुछ ऐसा ही देखने को मिला। गेंदबाजों ने इंग्लैंड को कई मौकों पर दबाव में डाला। लेकिन बल्लेबाज इसका फायदा उठाने में नाकाम रहे।सबसे ज्यादा चिंता मध्यक्रम को लेकर है। अनुभवी बल्लेबाजों से उम्मीद की जाती है कि वे मुश्किल परिस्थितियों में पारी को संभालेंगे। लेकिन पाकिस्तान के बल्लेबाज दबाव के समय विकेट गंवाते रहे।
यही कारण है कि अब सवाल उठ रहा है कि टीम की हार की असली वजह क्या है। क्या समस्या गेंदबाजी में है या फिर बल्लेबाजी और टीम चयन में?
सीरीज के बीच बड़े बदलाव से नाराजगी
पाकिस्तान क्रिकेट टीम में सीरीज के बीच किए गए बदलावों ने पूर्व खिलाड़ियों को भी निराश किया है। पाकिस्तान के दिग्गज बल्लेबाज मोहम्मद यूसुफ ने भी टीम प्रबंधन के फैसलों पर सवाल उठाए हैं।
यूसुफ के मुताबिक दौरे के बीच खिलाड़ियों और कोचों को वापस भेजने का फैसला केवल प्रदर्शन के आधार पर लिया गया फैसला नहीं लगता। उनका कहना है कि इस तरह के बदलाव पाकिस्तान क्रिकेट में पहले से मौजूद अस्थिरता को और बढ़ाते हैं।
उन्होंने पाकिस्तान क्रिकेट में लंबे समय से चली आ रही अंदरूनी खींचतान और विवादों का भी जिक्र किया। उनके अनुसार ऐसी घटनाओं का सीधा असर खिलाड़ियों के प्रदर्शन और टीम के माहौल पर पड़ता है।
मोहम्मद यूसुफ ने कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट को मैदान पर प्रदर्शन पर ध्यान देना चाहिए। बार बार होने वाले प्रशासनिक बदलाव और विवाद टीम को आगे बढ़ाने के बजाय नुकसान पहुंचाते हैं।
उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान क्रिकेट में अस्थिरता कोई नई समस्या नहीं है। 1992 विश्व कप की ऐतिहासिक जीत के बाद भी अलग अलग दौर में ऐसी स्थिति देखने को मिलती रही है।
सात खिलाड़ियों की वापसी ने बढ़ाया विवाद
कोचिंग स्टाफ में बदलाव के साथ इंग्लैंड दौरे से सात खिलाड़ियों को वापस भेजने के फैसले ने भी चर्चा तेज कर दी है। इन बदलावों की जिम्मेदारी पाकिस्तान के चयन समिति से जुड़े अकीब जावेद ने स्वीकार की है।
सीरीज के बीच इस तरह के बदलावों से टीम की रणनीति और खिलाड़ियों के आत्मविश्वास पर भी असर पड़ सकता है। टेस्ट सीरीज जैसी महत्वपूर्ण प्रतियोगिता में खिलाड़ियों को लगातार एक स्पष्ट योजना और स्थिर माहौल की जरूरत होती है।
अगर टीम में बार बार बदलाव होते रहें तो खिलाड़ियों के लिए अपनी भूमिका को समझना मुश्किल हो सकता है। खासकर तब, जब टीम पहले ही खराब प्रदर्शन के दबाव में हो।
पीसीबी के फैसलों पर उठ रहे सवाल
पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड के हालिया फैसलों ने चयन प्रक्रिया को लेकर भी सवाल खड़े कर दिए हैं। क्रिकेट प्रशंसक यह जानना चाहते हैं कि कोचों और खिलाड़ियों को हटाने का आधार क्या है।
अगर बल्लेबाज लगातार नाकाम हो रहे हैं और गेंदबाज अपना प्रदर्शन कर रहे हैं, तो कोचिंग स्टाफ में बदलाव का तर्क क्या है। क्या केवल टीम की हार को आधार बनाया गया या खिलाड़ियों के व्यक्तिगत प्रदर्शन का भी मूल्यांकन किया गया?
यही सवाल इस समय पाकिस्तान क्रिकेट की सबसे बड़ी बहस बन गया है।
कोच को हटाना किसी भी क्रिकेट बोर्ड का अधिकार है। लेकिन ऐसे फैसलों में पारदर्शिता बेहद जरूरी होती है। खिलाड़ियों और कोचिंग स्टाफ को यह पता होना चाहिए कि उनके प्रदर्शन का मूल्यांकन किन मानकों पर किया जा रहा है।
पाकिस्तान क्रिकेट को स्थिरता की जरूरत
पाकिस्तान क्रिकेट लंबे समय से प्रतिभाशाली खिलाड़ियों के बावजूद अस्थिरता से जूझता रहा है। टीम में अच्छे तेज गेंदबाजों की कमी नहीं है। बल्लेबाजी में भी प्रतिभाशाली खिलाड़ी मौजूद हैं। समस्या इन खिलाड़ियों से लगातार प्रदर्शन हासिल करने और उन्हें स्थिर माहौल देने की है।
इंग्लैंड के खिलाफ मौजूदा टेस्ट सीरीज ने इस समस्या को फिर सामने ला दिया है। गेंदबाजों ने कई मौकों पर उम्मीद जगाई। लेकिन बल्लेबाज उस प्रदर्शन को जीत में बदलने में नाकाम रहे।
ऐसे में पाकिस्तान क्रिकेट बोर्ड को जल्दबाजी में फैसले लेने के बजाय पूरी स्थिति की समीक्षा करनी होगी। बल्लेबाजी की समस्या, टीम चयन, खिलाड़ियों की भूमिका और कोचिंग व्यवस्था सभी पहलुओं पर गंभीरता से विचार करना जरूरी है।
मोहम्मद यूसुफ की बात भी इसी ओर इशारा करती है कि पाकिस्तान क्रिकेट को विवादों से ज्यादा प्रदर्शन पर ध्यान देने की जरूरत है।
आखिरकार क्रिकेट में अंतिम जवाब मैदान ही देता है। अगर पाकिस्तान टीम लगातार मैच जीतती है तो विवाद अपने आप पीछे छूट जाएंगे। लेकिन अगर हार का सिलसिला जारी रहता है तो कोच बदलने और खिलाड़ियों को वापस भेजने जैसे फैसलों पर सवाल और तेज होते जाएंगे।
फिलहाल सबसे बड़ा सवाल यही है कि पाकिस्तान क्रिकेट टीम अपनी बल्लेबाजी की कमजोरी कैसे दूर करेगी और क्या पीसीबी टीम को स्थिरता देने में सफल होगा। क्योंकि गेंदबाजों के प्रदर्शन के बावजूद अगर बल्लेबाज जिम्मेदारी नहीं निभाते तो केवल कोच बदलने से समस्या का समाधान मुश्किल है।