नई दिल्ली।
न्यूजीलैंड के खिलाफ 11 जनवरी से वडोदरा में शुरू होने वाली तीन मैचों की वनडे सीरीज़ के लिए भारतीय टीम का चयन जल्द होना है। चयन से पहले सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या ऋषभ पंत को बिना पर्याप्त मौका दिए टीम से बाहर कर दिया जाएगा। अगर ऐसा होता है तो इसे चयन समिति, खासकर अजित अगरकर की अगुवाई वाली कमेटी का कठोर फैसला माना जाएगा।
विजय हजारे ट्रॉफी में पंत का प्रदर्शन भले ही बहुत दमदार न रहा हो और चार मैचों में वह सिर्फ एक अर्धशतक ही लगा पाए हों, लेकिन बीते 18 महीनों में उन्हें वनडे क्रिकेट में खुद को साबित करने का पूरा मौका ही नहीं मिला। 2025 में उन्होंने एक भी वनडे नहीं खेला, जबकि वह चैंपियंस ट्रॉफी टीम और हाल ही में दक्षिण अफ्रीका के खिलाफ वनडे स्क्वॉड का हिस्सा जरूर रहे।
टीम मैनेजमेंट के भीतर पंत के आक्रामक और जोखिम भरे बल्लेबाजी अंदाज़ को लेकर मतभेद रहे हैं। कुछ लोग चाहते हैं कि वह पारंपरिक तरीके से बल्लेबाजी करें। हालांकि, बिना लगातार मौके दिए किसी खिलाड़ी को बाहर करना कई सवाल खड़े करता है, खासकर तब जब उसने वापसी के बाद बहुत सीमित मैच खेले हों।
पंत ने 2018 में वनडे डेब्यू के बाद अब तक सिर्फ 31 मैच खेले हैं। 2019-20 के बीच उन्हें कुछ मौके मिले, फिर कोविड के बाद 2021 से 2022 तक उन्होंने 15 वनडे खेले, जिसमें एक शतक और कुछ प्रभावी पारियां शामिल थीं। इसके बाद कार दुर्घटना ने उनके करियर को लंबा ब्रेक दे दिया। 2024 में वापसी के बाद वह सिर्फ एक वनडे खेल पाए।
विजय हजारे ट्रॉफी में ईशान किशन ने झारखंड के लिए तूफानी पारी खेली, जबकि ध्रुव जुरेल ने उत्तर प्रदेश के लिए शतक जमाया। ऐसे में विकेटकीपर बल्लेबाजों की रेस और कड़ी हो गई है। केएल राहुल पहले से ही पहली पसंद विकेटकीपर हैं और 15 सदस्यीय टीम में तीन विकेटकीपरों को जगह मिलना मुश्किल है। ऐसे में पंत, किशन और जुरेल में से किसे चुना जाएगा, यह बड़ा सवाल है।
बल्लेबाजी में देवदत्त पडिक्कल का नाम भी चर्चा में है, लेकिन रोहित शर्मा, शुभमन गिल और यशस्वी जायसवाल की मौजूदगी में उनके लिए जगह बनाना आसान नहीं होगा। गेंदबाजी में टी20 विश्व कप को ध्यान में रखते हुए जसप्रीत बुमराह और हार्दिक पंड्या को आराम दिया जा सकता है, जबकि शमी की वापसी संभव है।
अब सबकी निगाहें चयनकर्ताओं के फैसले पर टिकी हैं—क्या पंत को एक और मौका मिलेगा या चयन समिति कोई कड़ा कदम उठाएगी।






.png)