नई दिल्ली
भारत के खेल उद्योग को नई दिशा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक बड़ा और ऐतिहासिक फैसला लिया है। केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने घोषणा की है कि खेल क्षेत्र से जुड़े बौद्धिक संपदा (IP) पंजीकरण पर सरकार तीन साल तक पूरी तरह से शुल्क माफ करेगी। इस फैसले का उद्देश्य देश में खेल अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और स्थानीय लीग, खिलाड़ियों तथा उपकरण निर्माताओं को वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी बनाना है।
यह घोषणा विश्व बौद्धिक संपदा दिवस के अवसर पर की गई, जहां मंत्री ने कहा कि यह “विशेष अभियान” खेल क्षेत्र में नवाचार और व्यावसायिक विकास को बढ़ावा देगा। इस नीति के तहत ट्रेडमार्क, कॉपीराइट, पेटेंट, डिजाइन, भौगोलिक संकेत (GI) और पारंपरिक ज्ञान से जुड़े सभी प्रकार के पंजीकरण पर फीस शून्य कर दी गई है।
पीयूष गोयल ने कहा कि यह पहल विशेष रूप से उन छोटे और उभरते खेल संगठनों के लिए फायदेमंद होगी, जो अब तक अपने ब्रांड का औपचारिक पंजीकरण नहीं करा पाए थे। उन्होंने जोर देकर कहा कि ट्रेडमार्क केवल कानूनी प्रक्रिया नहीं, बल्कि एक महत्वपूर्ण व्यावसायिक रणनीति है, जो किसी भी खेल लीग या ब्रांड की वास्तविक कीमत को स्थापित करने में मदद करती है।
उन्होंने आगे बताया कि जब किसी लीग या संगठन का ट्रेडमार्क पंजीकृत होता है, तो उसे मीडिया राइट्स के लिए बेहतर सौदे करने में मदद मिलती है। इसके साथ ही, फ्रेंचाइजिंग के जरिए ब्रांड को नए बाजारों और क्षेत्रों में विस्तार देने का रास्ता भी खुलता है। इससे न केवल खेल संगठनों की आय बढ़ती है, बल्कि रोजगार के नए अवसर भी पैदा होते हैं।
सरकार का यह कदम भारत की उस व्यापक योजना का हिस्सा है, जिसमें देश को वैश्विक खेल केंद्र के रूप में विकसित करने का लक्ष्य रखा गया है। खासतौर पर 2036 ओलंपिक की मेजबानी की महत्वाकांक्षा को ध्यान में रखते हुए यह नीति बेहद अहम मानी जा रही है। इससे “स्पोर्ट्स इंडिया” ब्रांड को मजबूत करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने में मदद मिलेगी।
विशेषज्ञों का मानना है कि IP फीस में छूट मिलने से देशभर में खेल से जुड़े संगठनों और स्टार्टअप्स में पंजीकरण की संख्या तेजी से बढ़ेगी। इससे स्थानीय टूर्नामेंट और लीग को भी वैश्विक स्तर पर विस्तार करने का मौका मिलेगा। साथ ही, यह नीति खेल प्रबंधन को अधिक पेशेवर और संगठित बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है।
आने वाले तीन वर्षों में सरकार इस योजना के प्रभाव का मूल्यांकन करेगी। यदि इस दौरान खेल पारिस्थितिकी तंत्र में सकारात्मक बदलाव देखने को मिलता है, तो इसे आगे भी जारी रखा जा सकता है। फिलहाल, यह निर्णय देश के खेल उद्योग के लिए एक गेम चेंजर के रूप में देखा जा रहा है, जो भारत को खेल और व्यवसाय दोनों क्षेत्रों में नई ऊंचाइयों तक ले जा सकता है।