नीरज चोपड़ा से प्रेरित झारखंड की शिल्पा का ओलंपिक सपना

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 15-08-2026
Inspired by Neeraj Chopra, Jharkhand's Shilpa chases her Olympic dream.
Inspired by Neeraj Chopra, Jharkhand's Shilpa chases her Olympic dream.

 

कोलकाता।

भारतीय एथलेटिक्स में नीरज चोपड़ा के ओलंपिक स्वर्ण पदक ने देशभर में भाला फेंक के प्रति नई उम्मीद जगाई। इसी प्रेरणा से झारखंड के आदिवासी बहुल गुमला जिले के एक छोटे से गांव की किशोरी शिल्पा कुमारी भी अब ओलंपिक पदक जीतने का सपना देख रही हैं। महिला अंडर-17 वर्ग की मौजूदा राष्ट्रीय रिकॉर्ड धारक शिल्पा को भारतीय महिला जैवलिन थ्रो का उभरता हुआ सितारा माना जा रहा है।

शिल्पा के लिए नीरज चोपड़ा की टोक्यो ओलंपिक में जीत सिर्फ एक खेल उपलब्धि नहीं थी, बल्कि उनके जीवन की दिशा बदल देने वाला पल था। उन्होंने अपने गांव की चौपाल में पड़ोसियों के साथ टेलीविजन पर नीरज को स्वर्ण पदक जीतते देखा था। गांव में जीत का जश्न देखकर उनके मन में भी जैवलिन थ्रो में देश के लिए पदक जीतने का सपना पैदा हुआ।

शिल्पा कहती हैं कि उन्होंने नीरज चोपड़ा को ओलंपिक में स्वर्ण जीतते देखा और उसी से उन्हें भाला फेंक अपनाने की प्रेरणा मिली। उनका लक्ष्य अब नीरज की उपलब्धि को दोहराना और ओलंपिक पदक जीतना है।

SAI सेंटर ने बदली जिंदगी

शिल्पा का यह सपना रांची स्थित स्पोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (SAI) सेंटर में आयोजित एक एथलेटिक्स ट्रायल के बाद आकार लेने लगा। उनके कोच बिनोद सिंह ने करीब तीन साल पहले ट्रायल के दौरान शिल्पा की प्रतिभा पहचानी थी।

कोच के मुताबिक, उस समय शिल्पा खेल की दुनिया में बिल्कुल नई थीं, लेकिन उनके अंदर स्वाभाविक रूप से बेहद मजबूत थ्रो करने की क्षमता दिखाई दी। इसी प्रतिभा को देखते हुए उन्हें प्रशिक्षण के लिए चुना गया।

SAI सेंटर में प्रशिक्षण शुरू करने के बाद शिल्पा ने तेजी से सुधार किया। कोच का कहना है कि आज वह भारत की महिला जैवलिन में सबसे प्रतिभाशाली उभरती खिलाड़ियों में शामिल हैं।

शिल्पा के माता-पिता किसान हैं और उनके पास बेटी के खेल करियर पर खर्च करने के पर्याप्त साधन नहीं थे। ऐसे में SAI की ओर से उपलब्ध कराई गई प्रशिक्षण सुविधा, उपकरण, डाइट और अन्य संसाधनों ने उनकी प्रतिभा को निखारने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

55.62 मीटर का शानदार थ्रो

शिल्पा ने 2025 में राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा का जोरदार प्रदर्शन किया। 69वें नेशनल स्कूल गेम्स में उन्होंने 55.62 मीटर का थ्रो कर महिला अंडर-17 वर्ग का नया रिकॉर्ड बनाया।

उनका यह प्रदर्शन भारत के अंडर-18 राष्ट्रीय रिकॉर्ड 55.19 मीटर से भी बेहतर था। हालांकि, यह रिकॉर्ड आधिकारिक रूप से मान्य नहीं हुआ, क्योंकि जिस प्रतियोगिता में उन्होंने यह थ्रो किया था, वह वर्ल्ड एथलेटिक्स से आधिकारिक रूप से स्वीकृत प्रतियोगिता नहीं थी।

2025 जूनियर नेशनल्स में उनका आधिकारिक व्यक्तिगत सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन 45.90 मीटर रहा, जहां उन्होंने पांचवां स्थान हासिल किया।

शिल्पा का कहना है कि यदि उनका पिछला प्रदर्शन आधिकारिक रिकॉर्ड के रूप में दर्ज नहीं हुआ है तो वह अगली आधिकारिक प्रतियोगिता में इससे भी बेहतर थ्रो करने की कोशिश करेंगी।

अब यूथ ओलंपिक पर नजर

शिल्पा फिलहाल समर यूथ ओलंपिक 2026 की तैयारी पर ध्यान दे रही हैं। यह प्रतियोगिता 31 अक्टूबर से 13 नवंबर 2026 तक सेनेगल के डकार में आयोजित होनी है।

उनका तत्काल लक्ष्य यूथ ओलंपिक में पोडियम पर पहुंचना है, लेकिन सपना इससे कहीं बड़ा है—ओलंपिक पदक जीतना।

शिल्पा कहती हैं कि वह अपना ओलंपिक पदक नीरज चोपड़ा को समर्पित करना चाहती हैं। गुमला के छोटे से गांव से निकली इस किशोरी की कहानी बताती है कि सही प्रशिक्षण, प्रतिभा और मजबूत इच्छाशक्ति मिले तो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखे और उन्हें हासिल करने की दिशा में कदम बढ़ाए जा सकते हैं।