आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत को 2022 से 2024 के बीच अंतराष्ट्रीय मुद्रा कोष (आईएमएफ) से सबसे अधिक ‘‘प्रतिगामी कर’’ संबंधी सिफारिशें प्राप्त हुईं। अंतरराष्ट्रीय संगठन ऑक्सफैम के एक विश्लेषण में यह जानकारी दी गई।
यह विश्लेषण वॉशिंगटन (अमेरिका) में आईएमएफ और विश्व बैंक की वसंत बैठकों से पहले जारी किया गया। इसमें कहा गया कि वैश्विक संस्था ‘‘दोहरा मानदंड’’ अपना रही है जहां वह समृद्ध देशों को मुख्यतः प्रगतिशील (प्रोग्रेसिव) सलाह देती है, जबकि अन्य देशों को प्रतिगामी (रिग्रेसिव) उपाय सुझाती है जो ‘‘असमानता को बढ़ा सकते हैं।’’
रिपोर्ट के मुताबिक, निम्न एवं निम्न-मध्यम आय वाले देशों को दी गई आईएमएफ की 59 प्रतिशत कर सलाह प्रतिगामी रही जबकि उच्च आय वाले देशों को दी गई 52 प्रतिशत सिफारिशें प्रगतिशील थीं।
प्रतिगामी कर उस समान कर प्रणाली को कहा जाता है जिसमें कम आय वर्ग पर उच्च आय वालों की तुलना में अधिक बोझ पड़ता है। इसके विपरीत, आय के अनुपात में लगाया जाने वाला कर प्रगतिशील कहलाता है।
ऑक्सफैम ने 2022 से 2024 के बीच 125 देशों को दी गई आईएमएफ की 1,049 कर सिफारिशों का अध्ययन किया और पाया कि इनमें से केवल 30 सिफारिशें, यानी करीब तीन प्रतिशत, शुद्ध संपत्ति कर एवं संपत्ति से होने वाली आय (जैसे पूंजीगत लाभ) पर कराधान से संबंधित थीं।
रिपोर्ट में कहा गया कि अत्यधिक संपत्ति में तेज वृद्धि के बावजूद 2020 के बाद अरबपतियों की संपत्ति में 81 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।
विश्लेषण में पाया गया कि अमेरिका और ब्राजील को आईएमएफ से सबसे अधिक प्रगतिशील कर सलाह मिली। कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, फ्रांस, ब्रिटेन, नीदरलैंड, स्विट्जरलैंड, स्वीडन और नॉर्वे को भी अधिक प्रगतिशील सिफारिशें मिलीं। इसके साथ ही चीन, कजाखस्तान, अंगोला और बोत्सवाना को ऐसी ही सलाह मिली।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ उच्च आय वाले देशों को सामान्यतः प्रगतिशील उपायों की ओर झुकी हुई आईएमएफ की सिफारिशें मिलती हैं जो इन देशों को दी गई कुल वर्गीकृत सलाह का 52 प्रतिशत हैं। लेकिन गरीब देशों को ऐसा व्यवहार नहीं मिलता।’’
दूसरी ओर भारत को सबसे अधिक प्रतिगामी सिफारिशें मिलीं। इसके बाद वैश्विक दक्षिण के कई अन्य देशों का स्थान रहा।
रिपोर्ट में कहा गया, ‘‘ ‘ग्लोबल साउथ’ देशों के लिए कर सलाह का यह प्रतिगामी पहलू दर्शाता है कि आईएमएफ द्वारा सुझाए गए अधिकतर उपाय इन देशों में असमानता को बढ़ा सकते हैं, क्योंकि इससे कर का अधिक बोझ मध्यम एवं निम्न आय वर्ग पर पड़ता है जबकि सबसे अमीर तबका लगभग अछूता रहता है।’’