नई दिल्ली
आगामी टी20 विश्व कप को लेकर भारत और बांग्लादेश के बीच तनाव बढ़ता नजर आ रहा है। अंतरराष्ट्रीय क्रिकेट परिषद (आईसीसी) ने बांग्लादेश को स्पष्ट रूप से संकेत दिया है कि उसे टूर्नामेंट के अपने निर्धारित मैच भारत में ही खेलने होंगे, अन्यथा उसे अंक गंवाने या गंभीर परिणामों का सामना करना पड़ सकता है। बांग्लादेश ने सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए भारत में टीम भेजने से इनकार कर दिया है और टूर्नामेंट के अपने मैच श्रीलंका में कराए जाने की मांग की है।
यह विवाद उस समय गहराया जब बीसीसीआई के निर्देश पर भारतीय प्रीमियर लीग (आईपीएल) फ्रेंचाइज़ी कोलकाता नाइट राइडर्स ने बांग्लादेश के तेज गेंदबाज मुस्तफिजुर रहमान को टीम से रिलीज कर दिया। मुस्तफिजुर को दिसंबर में हुई नीलामी में 9.2 करोड़ रुपये में खरीदा गया था। इस फैसले के बाद बांग्लादेश क्रिकेट बोर्ड (बीसीबी) ने भारत में अपने खिलाड़ियों की सुरक्षा को लेकर गंभीर चिंता जताई।
बीसीबी ने रविवार को आईसीसी को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि बांग्लादेश के मैचों को भारत से बाहर स्थानांतरित करने पर विचार किया जाए। इसके बाद मंगलवार को आईसीसी और बीसीबी के बीच एक वर्चुअल बैठक हुई। हालांकि इस बैठक के बाद दोनों पक्षों की ओर से कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया।
ईएसपीएनक्रिकइंफो की रिपोर्ट के अनुसार, आईसीसी ने बीसीबी को सूचित किया है कि सुरक्षा चिंताओं के आधार पर भारत से बाहर खेलने का अनुरोध स्वीकार नहीं किया जा सकता। आईसीसी ने यह भी स्पष्ट किया कि बांग्लादेश को टी20 विश्व कप में भाग लेने के लिए भारत आना होगा। हालांकि बीसीबी का कहना है कि उन्हें किसी तरह का औपचारिक अल्टीमेटम नहीं दिया गया है।
गौरतलब है कि 20 टीमों वाला टी20 विश्व कप भारत और श्रीलंका में 7 फरवरी से 8 मार्च तक खेला जाना है। बांग्लादेश ग्रुप ‘सी’ में शामिल है और उसके पहले तीन मुकाबले कोलकाता में निर्धारित हैं। टीम को 7 फरवरी को वेस्ट इंडीज, 9 फरवरी को इटली और 14 फरवरी को इंग्लैंड से ईडन गार्डन्स में भिड़ना है, जबकि 17 फरवरी को मुंबई में नेपाल के खिलाफ मैच खेलना है।
इस पूरे विवाद में बीसीसीआई सचिव देबजीत सैकिया की भूमिका को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। उन्होंने मुस्तफिजुर को टीम से हटाने के फैसले की पुष्टि तो की, लेकिन इसके पीछे के कारणों पर चुप्पी साधे रखी। बताया जा रहा है कि इस मुद्दे पर आईपीएल गवर्निंग काउंसिल की कोई औपचारिक बैठक नहीं हुई, जिससे विवाद और गहरा गया है।
अब सबकी निगाहें आईसीसी और बीसीबी के अगले कदम पर टिकी हैं, क्योंकि टूर्नामेंट शुरू होने में एक महीने से भी कम समय बचा है।






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