Give priority to women boxers, they are better medal contenders in 2028 Olympics: Akhil
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
मुक्केबाज से पुलिस अधिकारी बने अखिल कुमार ने राष्ट्रमंडल खेलों में रिकॉर्ड प्रदर्शन के लिए मुक्केबाजों की सराहना करते हुए कहा कि भारत की महिला मुक्केबाज पुरुषों की तुलना में ओलंपिक पदक की बेहतर दावेदार हैं और 2028 लॉस एंजिलिस खेलों की समग्र योजना में उन्हें प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
राष्ट्रमंडल खेल 2006 में स्वर्ण पदक जीतने वाले एकमात्र भारतीय मुक्केबाज अखिल ने पीटीआई को टेलीफोन पर दिए साक्षात्कर में कहा कि वह ग्लास्गो में देश के प्रदर्शन से काफी प्रभावित हैं जहां भारत ने अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन हुए सात स्वर्ण पदक जीते जिसमें से छह महिला मुक्केबाजों के नाम रहे।
महिला मुक्केबाजी को राष्ट्रमंडल खेलों में 2014 में शामिल किया गया और शुरुआत में इसमें सिर्फ तीन वर्ग थे- 51 किग्रा, 60 किग्रा और 75 किग्रा। यह उन्हीं तीन वर्ग में ओलंपिक कार्यक्रम में शामिल होने के दो साल बाद हुआ था। एमसी मैरीकॉम (2012 लंदन) और लवलीना बोरगोहेन (2021 तोक्यो) ने महिला मुक्केबाजी में भारत के लिए ओलंपिक पदक जीते हैं।
हरियाणा पुलिस के एसीपी अखिल ने कहा, ‘‘वे (महिला मुक्केबाज) साफ तौर पर बेहतर नतीजे दे रही हैं। वजन वर्ग भी बढ़ रहे हैं, उन्हें प्राथमिकता मिलनी चाहिए। मौजूदा पुरुष मुक्केबाजों में मुझे नहीं लगता कि कोई ऐसा है जो इस चरण पर ओलंपिक पदक विजेता बन सकता है। अगर आगे चलकर बहुत अधिक सुधार होता है जिसकी मुझे उम्मीद है तो मैं अपनी राय बदल लूंगा।’’
उन्होंने कहा, ‘‘इस समय महिला मुक्केबाजों को बढ़त हासिल है। हमने इस खेल के विस्तार को काफी अच्छे से अपनाया है और जिस तरह से इसका विकास हुआ है मुझे लगता है कि भारत 2028 में महिला मुक्केबाजी में एक से अधिक ओलंपिक पदक जीतने के लिए बेहतर स्थिति में है।’’
ग्लास्गो में हुए राष्ट्रमंडल खेलों के कार्यक्रम में महिलाओं के लिए सात वजन वर्ग शामिल थे जो पिछली बार की तुलना में एक अधिक था। पुरुषों की स्पर्धा में भी सात वर्ग थी जिससे पहली बार लैंगिक समानता हासिल हुई।