लंदन |
इंग्लैंड और काउंटी क्रिकेट के अनुभवी तेज़ गेंदबाज़ टोनी पिगॉट का 67 वर्ष की उम्र में निधन हो गया। उनके निधन की खबर से इंग्लिश क्रिकेट जगत में शोक की लहर दौड़ गई है। पिगॉट न सिर्फ एक समर्पित खिलाड़ी रहे, बल्कि क्रिकेट से संन्यास के बाद भी उन्होंने प्रशासनिक और तकनीकी भूमिकाओं में खेल की उल्लेखनीय सेवा की।
टोनी पिगॉट ने इंग्लैंड के लिए अपना एकमात्र टेस्ट मैच 1984 में न्यूज़ीलैंड के खिलाफ क्राइस्टचर्च में खेला था। इस मुकाबले में उन्होंने पहली पारी में 17 ओवर में 75 रन देकर दो विकेट झटके। उन्होंने न्यूज़ीलैंड के सलामी बल्लेबाज़ ब्रूस एडगर और फिर जेरमी कोनी को पवेलियन भेजा। हालांकि, मेज़बान टीम ने फॉलोऑन लागू करते हुए इंग्लैंड को पारी और 132 रनों से हराया। इस मैच में महान ऑलराउंडर रिचर्ड हेडली ने 99 रन बनाने के बाद घातक गेंदबाज़ी करते हुए इंग्लैंड को दोनों पारियों में 100 से कम स्कोर पर समेट दिया। बल्लेबाज़ी में पिगॉट ने इंग्लैंड के लिए 12 रन बनाए।
पिगॉट का प्रथम श्रेणी करियर 17 वर्षों तक चला, जिसमें उन्होंने ससेक्स और सरे के लिए कुल 260 मैच खेले। इस दौरान उन्होंने 30.99 की औसत से 672 विकेट हासिल किए, जो उनकी निरंतरता और फिटनेस का प्रमाण है। बल्लेबाज़ी में भी उनका योगदान उल्लेखनीय रहा—उन्होंने 4,841 रन बनाए, जिनमें एक शतक और 20 अर्धशतक शामिल हैं। उनका सर्वोच्च स्कोर नाबाद 104 रन रहा।
लिस्ट-ए क्रिकेट में भी पिगॉट का रिकॉर्ड प्रभावशाली रहा। उन्होंने 270 मुकाबलों में 24.39 की औसत से 377 विकेट लिए और 1,727 रन बनाए, जिसमें सर्वोच्च स्कोर 53 रहा। तेज़ गेंदबाज़ के रूप में उनकी लाइन-लेंथ और अनुशासन को काउंटी क्रिकेट में लंबे समय तक सराहा गया।
क्रिकेट से संन्यास के बाद पिगॉट ने खेल से नाता नहीं तोड़ा। 1997 से 1999 तक उन्होंने ससेक्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में काम किया। इसके बाद 2005 में वह इंग्लैंड और वेल्स क्रिकेट बोर्ड से जुड़े और पिच लायज़न ऑफिसर के रूप में अहम भूमिका निभाई। 2015 में जब क्रिकेट लायज़न ऑफिसर की भूमिका शुरू हुई—जो आगे चलकर आधुनिक मैच रेफरी प्रणाली की आधारशिला बनी—तो पिगॉट शुरुआती नियुक्तियों में शामिल थे।
इस भूमिका में उन्होंने घरेलू मैचों में ग्राउंड स्टाफ और अंपायरों का सहयोग किया, पिच का आकलन किया और खिलाड़ियों के आचरण की निगरानी की। 2018 सीज़न के अंत तक वह इस जिम्मेदारी में सक्रिय रहे।
टोनी पिगॉट का जाना इंग्लिश क्रिकेट के लिए एक बड़ी क्षति है—एक ऐसा खिलाड़ी और प्रशासक, जिसने मैदान के भीतर और बाहर दोनों जगह ईमानदारी और समर्पण के साथ खेल की सेवा की।




