बेंगलुरु
इस सप्ताहांत बेंगलुरु में भारत और नीदरलैंड के बीच होने वाले डेविस कप मुकाबले केवल खिलाड़ियों के बीच नहीं बल्कि टेनिस की चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के साथ भी होंगे। समुद्र तल से 900 मीटर की ऊंचाई पर स्थित यह स्थल भारत के टेनिस आयोजनों में सबसे ऊंचाई वाला माना जाता है, जो खिलाड़ियों के प्रदर्शन पर खासा असर डाल सकता है।
ऊंचाई का सबसे बड़ा प्रभाव गेंद की गति और उछाल पर पड़ता है। तेज हवा और कम घनत्व वाली वायुमंडलीय परिस्थितियों के कारण गेंद सामान्य से तेज और अधिक उछलती है। जो रैली समुद्र तल पर नियंत्रित लगती है, वह यहां लंबी और तेज़ हो सकती है। ऐसे में खिलाड़ियों को रैकेट के तारों को कड़ा करने जैसी तकनीकी तैयारी करनी पड़ती है, ताकि वे गेंद पर नियंत्रण बनाए रख सकें। ढीली तारों से ‘ट्रैम्पोलिन’ प्रभाव बढ़ता है, जिससे शॉट्स में सटीकता कम होती है।
ऊंचाई के चलते कुछ शॉट्स खेलना कठिन हो जाता है, जबकि कुछ आसान हो सकते हैं। बेसलाइन पर मजबूती से रिटर्न करने वाले या दमदार सर्विस वाले खिलाड़ी इस स्थिति में लाभान्वित हो सकते हैं। इसके साथ ही शरीर पर भी असर होता है। हवा में ऑक्सीजन की कमी खिलाड़ियों को जल्दी थका सकती है, खासकर लंबी रैलियों और लंबे मुकाबलों में। ऐसे में फिजिकल रिकवरी और सांस लेने की तकनीक पर ध्यान देना बेहद जरूरी होता है।
जितनी जल्दी टीम इस माहौल के अनुकूल खुद को ढालती है, उतना ही उसका फायदा होता है। मैदान पर अभ्यास केवल शॉट बनाने तक सीमित नहीं होता, बल्कि यह सांसे लेने की रणनीति, गति समायोजन और मानसिक तैयारी में भी मदद करता है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि ऊंचाई बेहतर खिलाड़ी का स्तर नहीं बदलती, लेकिन सामंजस्य बैठाने की क्षमता ही निर्णायक बनती है। बेंगलुरु में जीत के लिए प्रैक्टिस, धैर्य और रणनीति उतनी ही जरूरी होगी जितनी प्रतिभा। भारत और नीदरलैंड की टीमों के लिए यह मुकाबला शारीरिक क्षमता के साथ-साथ मानसिक मजबूती की भी परीक्षा होगा।