अनाहत सिंह को वर्ल्ड जूनियर खिताब से मिला आत्मविश्वास

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 18-08-2026
Anahat Singh gains confidence from World Junior title
Anahat Singh gains confidence from World Junior title

 

नई दिल्ली

 भारतीय स्क्वैश की युवा स्टार अनाहत सिंह का मानना है कि हाल ही में वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप जीतने से उनका आत्मविश्वास बढ़ा है। हालांकि, वह यह भी जानती हैं कि सितंबर में होने वाले एशियाई खेलों की चुनौती बिल्कुल अलग होगी। 18 वर्षीय अनाहत ने पिछले महीने कनाडा में इतिहास रचते हुए वर्ल्ड जूनियर स्क्वैश चैंपियनशिप की महिला एकल स्पर्धा का खिताब जीतने वाली पहली भारतीय खिलाड़ी बनने का गौरव हासिल किया।

अनाहत अब 2026 एशियाई खेलों में भारतीय स्क्वैश टीम का हिस्सा हैं। एशियाई खेल जापान के आइची-नागोया में 19 सितंबर से 4 अक्टूबर तक आयोजित होंगे।

स्क्वैश रैकेट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SRFI) द्वारा आयोजित सम्मान समारोह के दौरान ANI से बातचीत में अनाहत ने कहा कि वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप की सफलता से उन्हें थोड़ा आत्मविश्वास जरूर मिला है, लेकिन एशियाई खेल पूरी तरह अलग चुनौती होंगे।

उन्होंने कहा कि दोनों प्रतियोगिताओं में खिलाड़ियों और प्रारूप में काफी अंतर है। जूनियर खिताब ने उन्हें शीर्ष खिलाड़ियों के खिलाफ खेलने के लिए थोड़ा अधिक आत्मविश्वास दिया है, लेकिन वह इसे बहुत बड़ा दबाव नहीं मानतीं।

ओलंपिक को लेकर नहीं है ज्यादा दबाव

स्क्वैश के ओलंपिक में पदार्पण को लेकर अनाहत पर संभावित पदक दावेदार के रूप में नजरें हैं। लेकिन उनका कहना है कि वह अभी से दबाव लेने के बजाय एक-एक कदम आगे बढ़ने पर ध्यान दे रही हैं।

उन्होंने कहा कि 2028 लॉस एंजिल्स ओलंपिक के लिए उन्हें पहले क्वालीफाई करना होगा। एशियाई खेल उस लंबे सफर का सिर्फ एक महत्वपूर्ण पड़ाव हैं। उनके मुताबिक, विश्व चैंपियनशिप और PSA सर्किट की प्रतियोगिताएं भी ओलंपिक की तैयारी में बेहद अहम हैं।

अनाहत ने कहा कि उनका लक्ष्य हर टूर्नामेंट और हर ट्रेनिंग सेशन पर ध्यान देना है। उनके लिए ओलंपिक की यात्रा कई छोटे-छोटे कदमों से मिलकर बनेगी।

पहली भारतीय बनने की खुशी

वर्ल्ड जूनियर चैंपियनशिप जीतने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनने पर अनाहत ने कहा कि यह उपलब्धि उनके लिए बेहद खास है। उन्हें उम्मीद है कि उनकी सफलता भारत के दूसरे युवाओं को भी स्क्वैश को पेशेवर खेल के रूप में अपनाने के लिए प्रेरित करेगी।

उनका मानना है कि स्क्वैश के ओलंपिक में शामिल होने से इस खेल को नई पहचान मिलेगी। पहले खिलाड़ियों के लिए सबसे बड़ा मंच कॉमनवेल्थ गेम्स था, लेकिन अब ओलंपिक का रास्ता खुलने से अधिक युवा इस खेल की ओर आकर्षित हो सकते हैं।

मां ने बताया कैसे संभालती हैं पढ़ाई और खेल

अनाहत की मां तानी सिंह ने बताया कि 18 साल की उम्र में पढ़ाई, स्क्वैश, लगातार यात्राओं और प्रतियोगिताओं के बीच संतुलन बनाना आसान नहीं है। परिवार कोशिश करता है कि अनाहत को दोस्तों और परिवार के साथ समय बिताने तथा सामान्य जिंदगी जीने का भी मौका मिले।

तानी सिंह ने अन्य अभिभावकों को सलाह दी कि बच्चों को उसी क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, जिसमें उनकी वास्तविक रुचि और क्षमता हो।

उन्होंने बताया कि अनाहत को बचपन से ही खेलों में रुचि थी। उन्होंने बैडमिंटन समेत कई खेल खेले और बाद में स्क्वैश पर ध्यान केंद्रित किया। तानी के अनुसार, जब बच्चा किसी काम को पसंद करता है तो उसके लिए मेहनत और त्याग करना भी आसान हो जाता है।

अब अनाहत की नजर एशियाई खेलों पर है, लेकिन उनका बड़ा सपना लॉस एंजिल्स 2028 ओलंपिक में भारत का प्रतिनिधित्व करना और देश के लिए पदक जीतना है।