एआईटीए और प्रशासक के बीच आम बैठक में टकराव की संभावना

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 25-07-2026
AITA and administrators likely to clash at AGM
AITA and administrators likely to clash at AGM

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
अखिल भारतीय टेनिस संघ (एआईटीए) की रविवार को होने वाली असाधारण आम बैठक (ईजीएम) में इस खेल निकाय और अदालत द्वारा नियुक्त प्रशासक न्यायमूर्ति (सेवानिवृत्त) गीता मित्तल के बीच टकराव होने की संभावना है, क्योंकि दोनों पक्षों में संवैधानिक संशोधनों को लेकर गहरे मतभेद हैं।
 
पीटीआई के पास मौजूद एआईटीए कार्यकारी समिति द्वारा तैयार किए गए दस्तावेज़ से पता चलता है कि न्यायमूर्ति मित्तल के कई तकनीकी बदलाव से जुड़े सुझावों को स्वीकार कर लिया गया है, जबकि संघ के अपने मसौदे के पक्ष में शासन संबंधी कई प्रमुख प्रस्तावों को खारिज कर दिया गया है।
 
कार्यकारी समिति ने बार-बार यह तर्क दिया है कि प्रशासक की कई सिफारिशें या तो राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम के दायरे से बाहर हैं या उनका पालन करना जरूरी नहीं है।
 
हालांकि दोनों पक्ष एआईटीए के संविधान को राष्ट्रीय खेल प्रशासन अधिनियम, 2025 के अनुरूप बनाना चाहते हैं, लेकिन मतदान के अधिकार, आम सभा और कार्यकारी समिति की संरचना, खिलाड़ियों का प्रतिनिधित्व, कार्यकाल के मानदंड और विभिन्न समितियों के अधिकारों सहित कई प्रमुख शासन संबंधी मुद्दों पर उनके बीच मतभेद हैं।
 
रविवार की बैठक से पहले ही प्रभावी रूप से मतभेद की रेखा खींच दी गई है, जहां गीता मित्तल उपस्थित नहीं होंगी, लेकिन उनके द्वारा नियुक्त पर्यवेक्षक कार्यवाही पर नजर रखेंगे।
 
दोनों पक्ष शनिवार को हुई बैठक के बाद आम बैठक की प्रक्रियात्मक शर्तों पर सहमत हो गए हैं। यह भी पता चला है कि याचिकाकर्ताओं ने पहले एआईटीए राज्य निकायों के चुनाव कराने के लिए अदालत में याचिका दायर की थी, लेकिन अदालत ने मौजूदा निकायों को ही चुनाव में मतदान करने की अनुमति दे दी।
 
न्यायमूर्ति मित्तल के मसौदे में एक ऐसे शासन का प्रस्ताव है जिसका उद्देश्य प्रत्येक संबद्ध राज्य संघ को आम सभा में केवल एक वोट तक सीमित करके, खिलाड़ियों के प्रतिनिधित्व को बढ़ाकर और कई ढांचागत सुरक्षा उपायों को लागू करके राज्य संघों के प्रभुत्व को कम करना है।
 
एआईटीए ऐसे कई प्रस्तावों का समर्थन नहीं कर रहा है। उसका मानना है कि यह प्रस्ताव खेल प्रशासन अधिनियम के दायरे से बाहर हैं और इससे राज्य संघों की भूमिका कमजोर हो जाएगी।
 
सबसे विवादास्पद मुद्दा मतदान का अधिकार है। प्रशासक ने प्रत्येक राज्य संघ के मतों को दो से घटाकर एक करने का प्रस्ताव रखा है, जबकि उत्कृष्ट प्रतिभा वाले खिलाड़ियों (एसओएम) के प्रतिनिधित्व को बढ़ाने का भी प्रस्ताव है। सूत्रों के अनुसार एआईटीए इस कदम का विरोध करेगा और तर्क देगा कि राज्य संघ लाखों हितधारकों का प्रतिनिधित्व करते हैं और उन्हें पहले की तरह दो मत मिलने चाहिए।
 
कार्यकारी समिति की संरचना को लेकर भी दोनों मसौदों में महत्वपूर्ण अंतर हैं। न्यायमूर्ति मित्तल ने उत्कृष्ट योग्यता वाले खिलाड़ियों के लिए पांच सीटों का प्रस्ताव रखा है, जबकि एआईटीए उनके लिए केवल दो सीट रखना चाहता है।
 
प्रशासक ने कार्यकारी समिति में महिलाओं के लिए आरक्षण की मांग की है और पदाधिकारियों के लिए सख्त कार्यकाल और आयु संबंधी प्रतिबंधों का प्रस्ताव रखा है।