नोएडा (उत्तर प्रदेश)
भारतीय कुश्ती के लिए एक उत्साहजनक खबर सामने आई है। सात वर्षों के लंबे अंतराल के बाद प्रो रेसलिंग लीग (PWL) ने अपने पाँचवें सीज़न के साथ ज़ोरदार वापसी की है। जनवरी 2026 में शुरू हुए इस सीज़न ने भारतीय कुश्ती में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है। रेसलिंग फेडरेशन ऑफ इंडिया (WFI) ने इस सीज़न को हर लिहाज़ से सफल करार दिया है।
लीग के चेयरमैन और प्रमोटर दयान फ़ारूक़ी ने PWL की वापसी पर खुशी ज़ाहिर करते हुए कहा कि 2015 से 2019 के बीच यह लीग बेहद सफल रही थी, लेकिन कोविड-19 महामारी के कारण इसे रोकना पड़ा। उन्होंने कहा, “हम खुद को सौभाग्यशाली मानते हैं कि हमें प्रो रेसलिंग लीग को फिर से शुरू करने का अवसर मिला। तैयारी से लेकर ऑक्शन और फिर मैदान में उतरने तक, यह सफर बेहद सकारात्मक रहा है।”
दयान फ़ारूक़ी ने यह भी रेखांकित किया कि PWL भारतीय पहलवानों को अंतरराष्ट्रीय स्तर के खिलाड़ियों के साथ मुकाबला करने और खुद को साबित करने का बेहतरीन मंच देता है। उनके अनुसार, लीग की वापसी से भारतीय पहलवानों में नया जोश देखने को मिल रहा है और वे इसे अपने करियर के लिए एक बड़ा अवसर मान रहे हैं।
वहीं, PWL के प्रमोटर और सीईओ अखिल गुप्ता ने कहा कि कुश्ती भारत के लिए सिर्फ़ एक खेल नहीं, बल्कि एक भावना है। उन्होंने कहा, “हमारा टैगलाइन ‘देश का असली दंगल’ है। यह वही खेल है जो भारत को ओलंपिक में लगातार पदक दिला रहा है। लीग को दोबारा शुरू करना चुनौतीपूर्ण ज़रूर था, लेकिन यही चुनौती इसे और खास बनाती है।”
WFI के अध्यक्ष संजय सिंह ने भी पाँचवें सीज़न की सराहना करते हुए कहा कि कोविड के बाद लीग को दोबारा पटरी पर लाना आसान नहीं था, लेकिन सभी हितधारकों—टीम मालिकों और खिलाड़ियों—का भरोसा जीतकर WFI ने यह लक्ष्य हासिल कर लिया। उन्होंने कहा कि लीग सुचारु रूप से चल रही है और इसे सभी का भरपूर समर्थन मिल रहा है।
नोएडा सिटीजन फोरम की अध्यक्ष शालिनी सिंह ने बताया कि इस सीज़न में युवाओं की भागीदारी बढ़ाने और प्रतियोगिता को और रोमांचक बनाने पर विशेष ध्यान दिया गया है। उन्होंने कहा कि करीब 250 खिलाड़ियों ने ऑक्शन में हिस्सा लिया, जिससे लीग की लोकप्रियता और वैश्विक आकर्षण साफ़ झलकता है।
WFI से मान्यता प्राप्त PWL अब ONO मीडिया के संचालन में एक नए स्वरूप और पारदर्शी, एथलीट-केंद्रित ढांचे के साथ आगे बढ़ रही है। लीग का लक्ष्य देश की अखाड़ा संस्कृति और वैश्विक मंच के बीच की दूरी को पाटते हुए भारतीय कुश्ती को नई ऊँचाइयों तक पहुँचाना है।




