IIT वैज्ञानिक डॉ. परवेज: जिन्होंने बायोइंजीनियरिंग से बदली इलाज की दिशा

Story by  ओनिका माहेश्वरी | Published by  onikamaheshwari | Date 30-01-2026
IIT scientist Dr. Parvez: Who transformed the direction of treatment through bioengineering
IIT scientist Dr. Parvez: Who transformed the direction of treatment through bioengineering

 

ओनिका माहेश्वरी नई दिल्ली  

भारत इस समय एक अहम मोड़ पर खड़ा है, जहां नवाचार, रिसर्च फंडिंग, और नेशनल रिसर्च फाउंडेशन (NRF) जैसी पहलों के जरिए आने वाले दशकों में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। इस समय भारत को अपनी समस्याओं के अनुसार समाधान विकसित करने चाहिए, न कि केवल विदेशी मॉडल्स की नकल करनी चाहिए। यह विचार देश के प्रमुख बायोइंजीनियर और रिजनरेटिव मेडिसिन वैज्ञानिक परवेज ए शेख ने शिरकत के दौरान व्यक्त किए। डॉ. परवेज और उनकी टीम इस समय हार्ट अटैक के मरीजों के लिए एक विशेष कार्डियक पैच पर काम कर रहे हैं, जो हृदय के क्षतिग्रस्त ऊतकों की मरम्मत करने में मदद करेगा। इसके साथ ही, वे डायबिटिक अल्सर (मधुमेह के घाव) के इलाज के लिए एक नया उत्पाद भी विकसित कर रहे हैं।
 

परवेज ए शेख ने आवाज़ दी वॉयस के विशेष पॉडकास्ट में गौहर वानी से इन विषयों पर विस्तार से बात की। उनका कहना था कि डायबिटीज़ के मरीजों में घाव जल्दी ठीक नहीं होते और संक्रमण के कारण कभी-कभी अंगों को काटने तक की स्थिति आ जाती है। उनकी टीम द्वारा विकसित किया गया नया उत्पाद इन घावों को तेजी से भरने में सहायक साबित हो सकता है, और इसकी कीमत भी बहुत कम, लगभग 2 रुपये होगी।
 
परवेज ए शेख का जन्म जम्मू-कश्मीर के कुपवाड़ा जिले के शेखपोरा गांव में हुआ। उन्होंने अपनी प्रारंभिक शिक्षा वहीं से प्राप्त की और फिर उच्च शिक्षा के लिए श्रीनगर का रुख किया। बचपन में संसाधनों की कमी थी, लेकिन उनके मन में हमेशा कुछ बड़ा करने का जुनून था। यही जुनून उन्हें IIT जैसे प्रतिष्ठित संस्थान तक ले गया। डॉ. परवेज ने IIT कानपुर से अपनी पीएचडी पूरी की, और इसे वे अपने जीवन का सबसे परिवर्तनकारी दौर मानते हैं। यहां उन्होंने देशभर के विभिन्न हिस्सों से आए छात्रों और शोधकर्ताओं के साथ काम किया, जिससे उनका दृष्टिकोण व्यापक हुआ और उन्होंने विज्ञान के क्षेत्र में नई ऊंचाइयां छूने की दिशा में कदम बढ़ाए।
 
जब डॉ. परवेज भारत में विज्ञान और तकनीकी शोध के भविष्य पर बात करते हैं, तो उनका मानना है कि देश इस समय नवाचार और रिसर्च फंडिंग के मामले में एक महत्वपूर्ण मोड़ पर खड़ा है। उन्होंने कहा कि आने वाले 10 से 20 वर्षों में विज्ञान और तकनीक के क्षेत्र में भारत दुनिया के अग्रणी देशों में होगा, लेकिन इसके लिए जरूरी है कि हम अपनी समस्याओं का समाधान खुद विकसित करें, न कि केवल पश्चिमी देशों के मॉडल को अपनाएं।
 
 
अमेरिका में अपने शोध अनुभव को साझा करते हुए उन्होंने वहां की मल्टी-कल्चरल रिसर्च संस्कृति, सटीक कार्यप्रणाली और मजबूत इंफ्रास्ट्रक्चर की सराहना की, लेकिन इसके साथ ही उन्होंने यह भी कहा कि भारतीय वैज्ञानिकों में कोई कमी नहीं है, बस संसाधनों और इकोसिस्टम को और मजबूत करने की जरूरत है। उनका मानना है कि भारत के वैज्ञानिक किसी भी अन्य वैज्ञानिक से कम नहीं हैं, बस हमें अपनी दिशा और संसाधनों पर ध्यान देने की जरूरत है।
 
डॉ परवेज ए शेख  ने एक सवाल का जवाब देते हुए बताया कि वैज्ञानिक विचारों को बाजार तक पहुंचने में क्यों सालों लगते हैं, खासकर जैव-चिकित्सा उत्पादों के मामले में। उनका कहना था कि किसी भी मेडिकल प्रोडक्ट को विकसित करने के लिए उसे कई चरणों से गुजरना पड़ता है, जैसे लैब टेस्ट, सेल स्टडी, एनिमल ट्रायल, रेगुलेटरी अप्रूवल और कई क्लिनिकल ट्रायल्स। यह सुनिश्चित करने के लिए कि उत्पाद सुरक्षित और प्रभावी है, पूरा समय लगता है। किसी मेडिकल प्रोडक्ट को बाजार में आने में 5 से 10 साल का समय लग सकता है, और कभी-कभी इससे भी अधिक।
 
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) पर डॉ. परवेज का कहना था कि AI वैज्ञानिक शोध में एक सहायक उपकरण के रूप में अहम भूमिका निभा सकता है, लेकिन यह मानव बुद्धि और प्रयोगात्मक विज्ञान का विकल्प नहीं है। AI मेडिकल डायग्नोसिस, डेटा एनालिसिस और रिसर्च में असफलताओं को कम करने में मदद कर सकता है, लेकिन यह कभी भी मानव प्रयोगात्मक बुद्धि और वैज्ञानिक अनुभव का विकल्प नहीं बन सकता।
 
 
पॉडकास्ट के अंत में डॉ. परवेज ने छात्रों और युवा शोधकर्ताओं, खासकर उन युवाओं को जो ग्रामीण और सीमांत क्षेत्रों से आते हैं, संदेश देते हुए कहा कि वे अपने बैकग्राउंड को अपनी कमजोरी न समझें। मेहनत, निरंतर प्रयास और सही मार्गदर्शन से कोई भी लक्ष्य हासिल किया जा सकता है। उनका कहना था कि युवाओं को कंफर्ट ज़ोन से बाहर निकलकर सवाल पूछने चाहिए, लोगों से जुड़ना चाहिए और अवसरों की तलाश करनी चाहिए।
 
परवेज ए शेख की कहानी इस बात का प्रमाण है कि कश्मीर जैसे दूरदराज़ इलाकों से भी विज्ञान में वैश्विक योगदान दिया जा सकता है, बशर्ते आपकी मेहनत, लगन और सही दिशा हो। उनका जीवन इस बात को सिद्ध करता है कि अगर आत्मविश्वास और सही मार्गदर्शन हो तो किसी भी लक्ष्य को हासिल किया जा सकता है। उनके काम से यह भी साबित होता है कि भारतीय वैज्ञानिकों को अपनी क्षमताओं पर विश्वास करना चाहिए, क्योंकि उनका शोध न केवल भारत बल्कि दुनिया भर में बदलाव ला सकता है।
 
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परवेज ए शेख का जीवन हमें यह सिखाता है कि अगर हमें अपने देश की समस्याओं के समाधान के लिए शोध और नवाचार के क्षेत्र में कार्य करना है, तो हमें अपने संसाधनों और विशेषज्ञता का पूरा इस्तेमाल करना चाहिए। कश्मीर जैसे सीमांत क्षेत्रों से निकलकर भी उन्होंने यह साबित किया है कि विज्ञान और चिकित्सा के क्षेत्र में वैश्विक योगदान संभव है। उनका सफर उन सभी युवाओं के लिए एक प्रेरणा है, जो सीमित संसाधनों के बावजूद बड़े सपने देखते हैं और उन्हें हासिल करने के लिए मेहनत करते हैं।