हरजिंदर
ब्रिटेन के कैंब्रिजशायर की बढ़ती आबादी को देखते हुए कई साल पहले एक नया कस्बा बसाया गया नार्दस्टोव। कुछ साल पहले यहां दस हजार घरों की एक नई बस्ती बसाई गई।इस बस्ती में स्कूल और बाजार जैसे सारे इंतजाम तो थे ही साथ ही जमीन का एक टुकड़ा आस्था के लिए भी सुरक्षित रख दिया गया। सोच यह थी कि यहां एक धर्मस्थल बनेगा जो किसी संगठन को 999 साल की लीज़ पर दे दिया जाएगा।
जल्द ही एक छोटी से झील के किनारे की इस जमीन के लिए तीन दावे पेश हो गए। एक दावा था नार्दस्टोव चर्च नेटवर्क का। दूसरा था हिंदू समाज नार्दस्टोव का। तीसरा दावा था नार्दस्टोव मुस्लिम्स नाम के संगठन का। तीनों ने अपनी तरह से जमीन के इस टुकड़े के लिए बोली लगाई। नार्दस्टोव मुस्लिम्स की बोली कम थी इसलिए उसकी उम्मीदें भी काफी कम थीं।
जमीन का एक टुकड़ा और तीन दावे। एक चर्च बनाने के लिए, एक मंदिर बनाने के लिए और एक मस्जिद बनाने के लिए।हम चाहें तो इसमें एक तरह का सामाजिक तनाव भी देख सकते हैं लेकिन सरकारों के लिए, खासकर पश्चिमी देशों की सरकारों के लिए यह उतनी बड़ी समस्या नहीं थी। धार्मिक संगठनों की सोच अपनी तरह से काम करती है जबकि नौकरशाही की सोच अपने ढंग से।

सरकार ने तीनों के दावों पर विचार किया और अंत में नार्दस्टोव चर्च का पलड़ा भारी रहा। इसे लेकर थोड़ा-बहुत विवाद भी हुआ जो कुछ दिन तक मीडिया में छाया भी रहा। लेकिन यह महत्वपूर्ण नहीं है। महत्वपूर्ण वह है जो उसके बाद हुआ।
नार्दस्टोव चर्च नेटवर्क ने उस जगह निमार्ण का नक्शा बनाया है उसमें एक क्रिश्चियन चैपल होगा। एक सामुदायिक हाल होगा। इसके अलावा उसी इमारत में मुसलमानों के लिए एक नमाज़ के लिए हाॅल भी बनाया जाएगा जो इस्लामिक परंपरा के हिसाब से बनेगा।
उसने यह हिस्सा एक तरह से नार्दस्टोव मुस्लिम्स के हवाले कर दिया है। नार्दस्टोव चर्च की तरफ से कहा गया है कि नार्दस्टोव मुस्लिम्स उसका किराएदार होगा।नार्दस्टोव मुस्लिम्स के अध्यक्ष जावेद नवाश ने अपने एक बयान में कहा, ‘‘हमारे समुदाय तो इस शहर में एक दूसरे से साथ सौहार्द से रह रहे हैं और परस्पर विश्वास बढ़ा रहे हैं। अब यह सौहार्द और ज्यादा बढ़ने वाला है।‘‘
दुनिया भर में जब धर्मस्थल के लिए आपस में झगड़े हो रहे हैं तब दूसरे धर्म के लोगों को अपने धर्मस्थल में जगह देना एक ऐसी शुरुआत है जिससे पूरी दुनिया को प्रेरणा लेनी चाहिए।फिलहाल नार्दस्टोव के हिंदुओं के लिए थोड़ी दिक्कत हैं इस कस्बे में उनके पास अपना कोई मंदिर नहीं है।

सबसे नजदीकी मंदिर यहां से 35 किलोमीटर दूर पीटरबर्ग में है। जिसे भारत हिंदू समाज नाम का संगठन चलाता है। यह माना जा रहा है कि जल्द ही नार्दस्टोव में भी मंदिर के लिए कोई जगह मिल ही जाएगी।
( लेखक वरिष्ठ पत्रकार हैं)
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