लंबे समय तक मोबाइल चलाने से आंखों में होती है जलन? जानिए बचाव के उपाय

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 15-10-2026
Do your eyes feel irritated from using your mobile for long periods? Learn how to protect them.
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नई दिल्ली

आज के डिजिटल दौर में स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का अहम हिस्सा बन गया है। सुबह उठने से लेकर रात को सोने तक लोग फोन पर काफी समय बिताते हैं। लेकिन लंबे समय तक मोबाइल स्क्रीन देखने के बाद आंखों में जलन, लालिमा, पानी आना, धुंधला दिखाई देना या किरकिरापन महसूस होना आम समस्या बनती जा रही है। विशेषज्ञों के अनुसार, इसके पीछे डिजिटल आई स्ट्रेन यानी डिजिटल उपकरणों के अधिक इस्तेमाल से होने वाला आंखों का तनाव और आंखों में सूखापन प्रमुख कारण हो सकते हैं।

हालांकि, मोबाइल इस्तेमाल करने के बाद आंखों में जलन होने का मतलब यह नहीं है कि आंखों को स्थायी नुकसान पहुंच गया है। कई मामलों में स्क्रीन के इस्तेमाल की आदतों में बदलाव करके इस परेशानी को कम किया जा सकता है। फिर भी, लगातार होने वाली जलन को केवल मोबाइल का असर मानकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए।

मोबाइल देखने से आंखों में जलन क्यों होती है?

मोबाइल स्क्रीन पर लगातार ध्यान केंद्रित करने के दौरान हमारी पलकें सामान्य से कम झपकती हैं। इससे आंखों की सतह पर मौजूद आंसुओं की पतली परत प्रभावित होती है। यही परत आंखों को नम और आरामदायक बनाए रखने में मदद करती है।

सामान्य स्थिति में पलक झपकाने से आंसू आंखों की सतह पर समान रूप से फैलते हैं। लेकिन स्क्रीन देखते समय पलकें कम झपकाने से आंखों में नमी कम हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप जलन, सूखापन, लालिमा और किरकिरापन महसूस होने लगता है।

डिजिटल आई स्ट्रेन के कारण आंखों को पास की वस्तुओं पर लगातार फोकस करना पड़ता है। इससे आंखों में थकान, अस्थायी रूप से धुंधला दिखाई देना और सिरदर्द जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।

इसके अलावा, कॉन्टैक्ट लेंस का इस्तेमाल, शुष्क वातावरण, एयर कंडीशनर की हवा और पहले से मौजूद आंखों की समस्याएं भी जलन बढ़ा सकती हैं।

क्या मोबाइल की नीली रोशनी आंखों को नुकसान पहुंचाती है?

मोबाइल स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी को अक्सर आंखों में जलन और थकान का कारण बताया जाता है। हालांकि, उपलब्ध वैज्ञानिक प्रमाण इस बात की पुष्टि नहीं करते कि सामान्य स्क्रीन इस्तेमाल से निकलने वाली नीली रोशनी सीधे आंखों को नुकसान पहुंचाती है।

कोक्रेन की एक समीक्षा में 619 वयस्कों पर किए गए 17 अध्ययनों का विश्लेषण किया गया। इसमें पाया गया कि नीली रोशनी को फिल्टर करने वाले चश्मों से सामान्य चश्मों की तुलना में डिजिटल आई स्ट्रेन कम होने का स्पष्ट लाभ नहीं मिलता।

इसलिए आंखों में जलन होने पर केवल ब्लू-लाइट फिल्टर वाले चश्मे पर निर्भर रहने के बजाय स्क्रीन इस्तेमाल करने की आदतों, पलक झपकाने और आंखों की नमी पर ध्यान देना अधिक उपयोगी हो सकता है।

रात में देर तक मोबाइल चलाने से नींद भी प्रभावित हो सकती है। इसलिए सोने से पहले स्क्रीन का इस्तेमाल सीमित करना बेहतर है।

आंखों में जलन से बचने के 8 आसान उपाय

1. अपनाएं 20-20-20 नियम

हर 20 मिनट तक स्क्रीन देखने के बाद कम से कम 20 सेकंड के लिए लगभग 20 फीट दूर रखी किसी वस्तु को देखें। इससे लगातार पास में फोकस करने से होने वाले तनाव को कम करने में मदद मिल सकती है।

2. बार-बार और पूरी तरह पलकें झपकाएं

मोबाइल पढ़ते या स्क्रॉल करते समय पलकें झपकाना न भूलें। धीरे-धीरे और पूरी तरह पलकें झपकाने से आंखों की सतह पर नमी बनाए रखने में मदद मिलती है।

3. फोन को उचित दूरी पर रखें

फोन को आंखों से लगभग 40 सेंटीमीटर दूर रखना उपयोगी हो सकता है। हालांकि, आरामदायक दूरी व्यक्ति की दृष्टि और स्क्रीन पर लिखे अक्षरों के आकार के अनुसार अलग-अलग हो सकती है।

4. स्क्रीन की चमक और अक्षरों का आकार सही रखें

स्क्रीन की ब्राइटनेस आसपास की रोशनी के अनुरूप रखें। टेक्स्ट का आकार इतना बड़ा रखें कि उसे पढ़ने के लिए आंखें सिकोड़नी न पड़ें।

5. स्क्रीन पर पड़ने वाली चमक से बचें

खिड़कियों या कमरे की लाइट से मोबाइल स्क्रीन पर पड़ने वाले प्रतिबिंब आंखों पर दबाव बढ़ा सकते हैं। फोन की स्थिति बदलकर चकाचौंध कम करें।

6. बीच-बीच में ब्रेक लें

लगातार कई घंटे मोबाइल देखने के बजाय नियमित अंतराल पर फोन रख दें। कुछ देर दूर की वस्तुओं को देखने और दूसरी गतिविधियों में समय बिताने से आंखों को आराम मिल सकता है।

7. शुष्क हवा से बचें

पंखे या एयर कंडीशनर की सीधी हवा आंखों को अधिक सूखा सकती है। बैठने की जगह बदलें और जरूरत पड़ने पर कमरे में नमी बनाए रखने के उपाय करें।

8. पर्याप्त नींद लें

पर्याप्त नींद आंखों की थकान कम करने और सामान्य स्वास्थ्य बनाए रखने में मदद करती है। रात में सोने से पहले मोबाइल का इस्तेमाल कम करना बेहतर है।

आंखों की जलन दूर करने के लिए आई ड्रॉप कब लें?

अगर आंखों में सूखापन लगातार बना रहता है, तो डॉक्टर या फार्मासिस्ट की सलाह से लुब्रिकेटिंग आई ड्रॉप्स यानी कृत्रिम आंसुओं का इस्तेमाल किया जा सकता है। आंखों की लालिमा दूर करने के लिए मिलने वाली ड्रॉप्स का बार-बार इस्तेमाल अपनी मर्जी से नहीं करना चाहिए, क्योंकि कुछ उत्पाद लंबे समय तक इस्तेमाल करने पर परेशानी बढ़ा सकते हैं।

यदि आंखों में तेज दर्द, रोशनी से परेशानी, अचानक दृष्टि धुंधली होने या दृष्टि कम होने जैसे लक्षण दिखाई दें, तो तुरंत नेत्र चिकित्सक से संपर्क करें। लगातार जलन, लालिमा या पानी आने की समस्या में भी आंखों की जांच कराना जरूरी है।

निष्कर्ष: मोबाइल का इस्तेमाल पूरी तरह बंद करना जरूरी नहीं है, लेकिन स्क्रीन देखने की आदतों में सुधार करना महत्वपूर्ण है। नियमित ब्रेक, पर्याप्त पलकें झपकाना, सही दूरी और उचित रोशनी आंखों की थकान कम करने में मदद कर सकते हैं। अगर इन उपायों के बावजूद परेशानी बनी रहती है, तो इसे केवल मोबाइल का असर मानने के बजाय चिकित्सकीय सलाह लें।