60 साल की उम्र के बाद इन 7 खाद्य पदार्थों का सेवन करें सीमित

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 14-10-2026
Limit the consumption of these 7 foods after the age of 60.
Limit the consumption of these 7 foods after the age of 60.

 

नई दिल्ली।

उम्र बढ़ने के साथ शरीर की पोषण संबंधी जरूरतों में बदलाव आने लगता है। इस उम्र में खानपान पर विशेष ध्यान देना जरूरी है, क्योंकि गलत खानपान से उच्च रक्तचाप, मधुमेह, हृदय रोग और मोटापे जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि 60 वर्ष की उम्र के बाद कुछ खाद्य पदार्थों को पूरी तरह छोड़ देना चाहिए। बेहतर है कि उनके सेवन की मात्रा और आवृत्ति पर ध्यान दिया जाए तथा पौष्टिक विकल्पों को प्राथमिकता दी जाए।

आइए जानते हैं कि 60 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों को किन सात खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना चाहिए।

1. प्रसंस्कृत मांस

सॉसेज, बेकन और अन्य प्रसंस्कृत मांस उत्पादों में नमक और परिरक्षकों की मात्रा अधिक हो सकती है। इनका नियमित और अधिक सेवन उच्च रक्तचाप तथा हृदय रोगों के जोखिम से जुड़ा है।

बुजुर्गों को ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना चाहिए। प्रोटीन की जरूरत पूरी करने के लिए ताजी मछली, कम वसा वाला चिकन, दालें, बीन्स और अन्य पौधों से मिलने वाले प्रोटीन को आहार में शामिल किया जा सकता है। भोजन का स्वाद बढ़ाने के लिए नमक की जगह उचित मात्रा में अदरक, लहसुन, नींबू और अन्य मसालों का इस्तेमाल भी किया जा सकता है।

2. मीठे पेय पदार्थ

कोल्ड ड्रिंक, पैकेट में मिलने वाले मीठे जूस और अधिक चीनी वाली चाय-कॉफी का नियमित सेवन शरीर में अतिरिक्त कैलोरी पहुंचाता है। इससे वजन बढ़ने और रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित करने में परेशानी हो सकती है।

उम्र बढ़ने के साथ शारीरिक गतिविधियां कम होने पर वजन नियंत्रित रखना भी चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में सादा पानी सबसे अच्छा विकल्प है। स्वाद के लिए पानी में नींबू या पुदीने की पत्तियां मिलाई जा सकती हैं। बिना चीनी वाली चाय भी अच्छा विकल्प है।

3. सफेद ब्रेड और मैदे से बनी चीजें

सफेद ब्रेड, मैदे के बिस्कुट और अन्य परिष्कृत अनाज से बने खाद्य पदार्थों में साबुत अनाज की तुलना में फाइबर कम होता है। इनका अधिक सेवन रक्त शर्करा को तेजी से बढ़ा सकता है, खासकर मधुमेह से पीड़ित लोगों में।

इसके स्थान पर साबुत गेहूं की रोटी, दलिया, ओट्स और अन्य साबुत अनाज को प्राथमिकता देना बेहतर है। इनमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाने और कब्ज से बचाव में मदद कर सकता है।

हालांकि, सफेद ब्रेड का कभी-कभार सेवन अपने आप में नुकसानदेह नहीं है। महत्वपूर्ण यह है कि पूरे दिन का आहार कितना संतुलित और पौष्टिक है।

4. तले हुए खाद्य पदार्थ

समोसे, पकौड़े, फ्रेंच फ्राइज और अन्य तली हुई चीजों में कैलोरी तथा वसा की मात्रा अधिक हो सकती है। बार-बार इस्तेमाल किए गए तेल में तला भोजन स्वास्थ्य के लिए और भी नुकसानदेह हो सकता है।

इनका नियमित सेवन वजन बढ़ने और हृदय संबंधी समस्याओं के जोखिम को बढ़ा सकता है। बुजुर्गों के लिए उबला, भाप में पका, बेक किया हुआ या कम तेल में तैयार भोजन बेहतर विकल्प हो सकता है।

सब्जियों, दालों और अन्य खाद्य पदार्थों को मसालों के साथ पकाकर भी स्वादिष्ट बनाया जा सकता है। इससे भोजन में अनावश्यक तेल की मात्रा कम रखने में मदद मिलती है।

5. अधिक वसा वाले डेयरी उत्पाद

मक्खन, क्रीम और फुल फैट चीज जैसे खाद्य पदार्थों में संतृप्त वसा अधिक हो सकती है। इनका जरूरत से ज्यादा सेवन कुछ लोगों में एलडीएल यानी खराब कोलेस्ट्रॉल बढ़ा सकता है।

यदि कोलेस्ट्रॉल बढ़ा हुआ है या हृदय रोग का जोखिम अधिक है, तो कम वसा वाला दूध और दही बेहतर विकल्प हो सकते हैं। सोया दूध भी विकल्प है, बशर्ते वह बिना अतिरिक्त चीनी वाला और पोषक तत्वों से समृद्ध हो।

हालांकि, सभी बुजुर्गों के लिए फुल फैट डेयरी उत्पादों को पूरी तरह छोड़ना जरूरी नहीं है। चुनाव व्यक्ति की पोषण संबंधी जरूरतों, वजन और स्वास्थ्य स्थिति के अनुसार होना चाहिए।

6. अधिक नमक वाले खाद्य पदार्थ

अचार, पापड़, नमकीन, चिप्स, इंस्टेंट नूडल्स और कई पैकेटबंद खाद्य पदार्थों में सोडियम की मात्रा अधिक हो सकती है। ज्यादा सोडियम का सेवन रक्तचाप बढ़ा सकता है, जिससे हृदय और गुर्दों पर अतिरिक्त दबाव पड़ सकता है।

बुजुर्गों को भोजन में नमक की मात्रा पर ध्यान देना चाहिए। पैकेटबंद चीजें खरीदते समय उनके लेबल पर सोडियम की मात्रा देखना उपयोगी है। ताजे फल, सब्जियां और घर पर तैयार भोजन बेहतर विकल्प हो सकते हैं।

स्वाद के लिए धनिया, जीरा, नींबू, अदरक और अन्य मसालों का इस्तेमाल किया जा सकता है। जिन लोगों को उच्च रक्तचाप, गुर्दे या हृदय संबंधी बीमारी है, उन्हें डॉक्टर की सलाह के अनुसार नमक का सेवन निर्धारित करना चाहिए।

7. केक, पेस्ट्री और मिठाइयां

केक, पेस्ट्री, क्रीम वाले बिस्कुट और अन्य मिठाइयों में अतिरिक्त चीनी तथा संतृप्त वसा अधिक हो सकती है। इनका नियमित और अधिक सेवन वजन बढ़ने, रक्त शर्करा बिगड़ने और कोलेस्ट्रॉल संबंधी समस्याओं में योगदान दे सकता है।

मीठा खाने की इच्छा होने पर ताजे फल या बिना अतिरिक्त चीनी वाला दही बेहतर विकल्प हो सकते हैं। घर पर मिठाई बनाते समय चीनी और मक्खन की मात्रा कम रखी जा सकती है।

मधुमेह से पीड़ित बुजुर्गों को विशेष रूप से मिठाइयों की मात्रा और कुल कार्बोहाइड्रेट सेवन पर ध्यान देना चाहिए। फल भी संतुलित मात्रा में खाना बेहतर है।

बुजुर्गों के लिए खानपान में किन बातों का रखें ध्यान?

साठ वर्ष की उम्र के बाद केवल कुछ खाद्य पदार्थों से परहेज करना पर्याप्त नहीं है। शरीर को पर्याप्त प्रोटीन, फाइबर, विटामिन, खनिज और ऊर्जा मिलना भी जरूरी है।

  • प्रोटीन लें: दाल, दूध, दही, अंडे, मछली या अन्य उपयुक्त प्रोटीन स्रोतों को भोजन में शामिल करें।

  • फल और सब्जियां खाएं: अलग-अलग रंगों के फल और सब्जियां पोषक तत्वों की जरूरत पूरी करने में मदद करते हैं।

  • पर्याप्त पानी पिएं: डॉक्टर द्वारा बताई गई मात्रा के अनुसार पानी लें। हृदय या गुर्दे की बीमारी में तरल पदार्थों की मात्रा सीमित करने की जरूरत हो सकती है।

  • नमक और चीनी सीमित रखें: खासकर उच्च रक्तचाप, मधुमेह या हृदय रोग होने पर।

  • नियमित शारीरिक गतिविधि करें: अपनी क्षमता और स्वास्थ्य के अनुसार टहलना तथा हल्के व्यायाम करना फायदेमंद हो सकता है।

निष्कर्ष: बढ़ती उम्र में स्वस्थ रहने के लिए भोजन की गुणवत्ता और मात्रा दोनों महत्वपूर्ण हैं। ताजा, विविध और संतुलित आहार अपनाना तथा अत्यधिक नमक, चीनी और तले हुए खाद्य पदार्थों का सेवन सीमित करना बेहतर विकल्प है। किसी खाद्य पदार्थ पर पूरी तरह रोक लगाने से पहले अपनी स्वास्थ्य स्थिति और डॉक्टर की सलाह को ध्यान में रखना चाहिए।