क्या आप भी मुंह खोलकर सोते हैं? सेहत पर पड़ सकते हैं ये असर

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 16-10-2026
Do you also sleep with your mouth open? Here’s how it could affect your health.
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नई दिल्ली।

रात में सोते समय मुंह खुला रहना एक आम समस्या है। खासकर सर्दी-जुकाम, नाक बंद होने या एलर्जी की स्थिति में लोग अक्सर मुंह से सांस लेने लगते हैं। कभी-कभार ऐसा होना आमतौर पर चिंता की बात नहीं है, लेकिन यदि आप हर रात मुंह खोलकर सोते हैं, तो इसे नजरअंदाज करना ठीक नहीं है।

मुंह खोलकर सोने से सुबह उठने पर मुंह सूखने, गले में खराश, सांसों से दुर्गंध आने और दांतों से जुड़ी समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है। इसके अलावा, यह नाक से सांस लेने में परेशानी या नींद के दौरान सांस संबंधी किसी समस्या का संकेत भी हो सकता है।

विशेषज्ञों के अनुसार, यदि मुंह खोलकर सोना नियमित आदत बन गया है, तो इसके पीछे की वजह का पता लगाना जरूरी है।

नाक से सांस लेना क्यों है बेहतर?

नाक केवल सांस लेने का माध्यम नहीं है, बल्कि यह शरीर के श्वसन तंत्र की सुरक्षा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। फेफड़ों तक पहुंचने से पहले नाक हवा को छानने, गर्म करने और उसमें नमी बनाए रखने में मदद करती है। इससे धूल और हवा में मौजूद कुछ हानिकारक कणों को रोकने में भी सहायता मिलती है।

नाक से सांस लेने के दौरान शरीर में नाइट्रिक ऑक्साइड नामक गैस भी बनती है, जो रक्त वाहिकाओं के फैलाव और फेफड़ों में रक्त प्रवाह के नियमन में भूमिका निभाती है।

इसके विपरीत, मुंह से सांस लेने पर हवा सीधे मुंह और गले से होकर गुजरती है। इससे इन हिस्सों में सूखापन बढ़ सकता है।

सर्दी-जुकाम या नाक बंद होने पर कुछ समय के लिए मुंह से सांस लेना सामान्य है। लेकिन यदि यह समस्या लगातार बनी रहती है, तो इसके पीछे एलर्जी, नाक में रुकावट या श्वसन तंत्र से जुड़ी कोई अन्य परेशानी हो सकती है।

मुंह खोलकर सोने से क्या-क्या समस्याएं हो सकती हैं?

रात में लगातार मुंह से सांस लेने का असर मुंह, गले, दांतों और नींद की गुणवत्ता पर पड़ सकता है। इसके कुछ प्रमुख लक्षण इस प्रकार हैं।

1. मुंह सूखना और गले में खराश

रात भर मुंह से हवा गुजरने के कारण मुंह और गले की नमी कम हो सकती है। इससे सुबह उठने पर मुंह सूखने, गले में जलन या खराश महसूस होने की शिकायत हो सकती है।

2. सांसों से दुर्गंध आना

लार मुंह को साफ रखने और भोजन के अवशेषों तथा बैक्टीरिया को हटाने में मदद करती है। जब मुंह सूखता है, तो लार का सुरक्षात्मक प्रभाव कम हो सकता है। इससे सांसों में दुर्गंध की समस्या बढ़ सकती है।

3. दांतों में सड़न और मसूड़ों की परेशानी

लार दांतों के इनेमल की रक्षा करने और मुंह में एसिड के प्रभाव को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। लगातार मुंह सूखने से दांतों में सड़न, मसूड़ों में सूजन और अन्य मौखिक समस्याओं का खतरा बढ़ सकता है।

4. होंठ फटना और जीभ पर परत जमना

मुंह में नमी की कमी के कारण होंठ सूखकर फट सकते हैं। कुछ लोगों को सुबह जीभ पर सफेद या पीली परत भी दिखाई दे सकती है। हालांकि, जीभ पर परत जमने के अन्य कारण भी हो सकते हैं।

5. खर्राटे आना और नींद प्रभावित होना

मुंह से सांस लेने और खर्राटों के बीच संबंध हो सकता है। यदि नाक या ऊपरी श्वसन मार्ग में रुकावट हो, तो सांस लेने में परेशानी बढ़ सकती है। इससे नींद बार-बार टूटने और सुबह थकान महसूस होने की शिकायत हो सकती है।

2022 में पॉलिमर्स (बेसल) पत्रिका में प्रकाशित एक समीक्षा में भी मुंह के सूखेपन और दांतों की सड़न तथा मौखिक संक्रमणों के बीच संबंध पर चर्चा की गई थी। हालांकि, मुंह सूखने के कई कारण होते हैं और हर मामले में इसकी वजह केवल मुंह से सांस लेना नहीं होती।

क्या मुंह से सांस लेने पर नींद की गुणवत्ता खराब हो सकती है?

यदि आप रात में मुंह खोलकर सोते हैं और साथ ही तेज खर्राटे लेते हैं, बार-बार हांफते हैं या सुबह उठने पर भी थकान महसूस करते हैं, तो इस पर विशेष ध्यान देना चाहिए।

इन लक्षणों का एक संभावित कारण ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया (Obstructive Sleep Apnea) हो सकता है। यह नींद से जुड़ी एक ऐसी समस्या है, जिसमें सोते समय ऊपरी श्वसन मार्ग बार-बार संकुचित या अवरुद्ध हो जाता है। इससे सांस लेने में रुकावट आती है और नींद की गुणवत्ता प्रभावित होती है।

स्लीप एपनिया के कुछ प्रमुख चेतावनी संकेत हैं:

  • तेज और नियमित खर्राटे आना।

  • सोते समय सांस रुकने की शिकायत, खासकर किसी दूसरे व्यक्ति द्वारा देखे जाने पर।

  • नींद में अचानक हांफते हुए या दम घुटने जैसा महसूस करके जागना।

  • सुबह उठने पर सिरदर्द होना।

  • दिन में अत्यधिक नींद आना या लगातार थकान महसूस करना।

अमेरिकन थोरैसिक सोसाइटी सहित विभिन्न चिकित्सा संस्थानों ने स्लीप एपनिया और उसके स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों पर जानकारी दी है। हालांकि, केवल मुंह खोलकर सोने से यह निष्कर्ष नहीं निकाला जा सकता कि किसी व्यक्ति को स्लीप एपनिया है। इसके लिए अन्य लक्षणों, चिकित्सकीय इतिहास और जरूरत पड़ने पर नींद से संबंधित जांच का मूल्यांकन किया जाता है।

यदि खर्राटों के साथ सांस रुकने, हांफने या दिन में अत्यधिक नींद आने की समस्या भी है, तो डॉक्टर से सलाह लेना जरूरी है। नींद की लगातार खराब गुणवत्ता ध्यान केंद्रित करने की क्षमता, मनोदशा और दिनभर की ऊर्जा को प्रभावित कर सकती है।

मुंह खोलकर सोने की आदत को नजरअंदाज न करें

कभी-कभार नाक बंद होने के कारण मुंह से सांस लेना सामान्य हो सकता है। लेकिन यदि यह समस्या हर रात होती है, तो इसके कारणों की जांच कराना उचित है।

नाक बंद रहने, एलर्जी या अन्य श्वसन संबंधी समस्याओं का सही उपचार करने से राहत मिल सकती है। यदि मुंह सूखने, दांतों में सड़न या मसूड़ों की परेशानी के लक्षण दिखाई दें, तो दंत चिकित्सक से भी सलाह लेनी चाहिए।

सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि मुंह खोलकर सोना अपने आप में किसी गंभीर बीमारी का प्रमाण नहीं है, लेकिन इसके साथ लगातार खर्राटे, सांस लेने में रुकावट या दिन में अत्यधिक नींद आने जैसे लक्षण हों, तो चिकित्सकीय जांच जरूरी है।