नई दिल्ली:
निम्न रक्तचाप, जिसे चिकित्सा भाषा में Hypotension कहा जाता है, ऐसी स्थिति है जिसमें व्यक्ति का ब्लड प्रेशर सामान्य स्तर से काफी कम हो जाता है। कई बार यह अपने आप में समस्या नहीं होता, लेकिन कुछ मामलों में यह किसी गंभीर बीमारी का संकेत भी बन सकता है। इसलिए इसके लक्षणों और कारणों को समझना बेहद जरूरी है।
आमतौर पर जब रक्तचाप 90/60 mmHg से नीचे चला जाता है, तो उसे निम्न रक्तचाप माना जाता है। हालांकि, हर व्यक्ति के लिए यह स्तर अलग-अलग हो सकता है। कुछ लोगों का ब्लड प्रेशर स्वाभाविक रूप से कम रहता है और उन्हें कोई परेशानी नहीं होती, जबकि अन्य लोगों को इसके कारण कई स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है।
निम्न रक्तचाप के दो प्रमुख प्रकार होते हैं—पहला, पूर्ण निम्न रक्तचाप, जिसमें व्यक्ति का आराम की स्थिति में बीपी लगातार कम रहता है। दूसरा, ऑर्थोस्टैटिक हाइपोटेंशन, जिसमें बैठने या लेटने के बाद अचानक खड़े होने पर रक्तचाप गिर जाता है और यह स्थिति कुछ मिनट तक बनी रहती है।
लक्षणों की बात करें तो सबसे आम संकेत चक्कर आना या सिर हल्का महसूस होना है, खासकर अचानक खड़े होने पर। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि उस समय मस्तिष्क तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच पाता। गंभीर मामलों में व्यक्ति बेहोश भी हो सकता है, जिससे गिरने और चोट लगने का खतरा बढ़ जाता है।
इसके अलावा लगातार थकान, कमजोरी, धुंधली दृष्टि, मतली और ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई भी निम्न रक्तचाप के प्रमुख लक्षण हैं। कुछ लोगों में त्वचा ठंडी और पीली पड़ सकती है, और उन्हें चलते समय अस्थिरता महसूस होती है। ये सभी लक्षण व्यक्ति की दैनिक गतिविधियों और कार्यक्षमता को प्रभावित कर सकते हैं।
निम्न रक्तचाप के पीछे कई कारण हो सकते हैं। शरीर की स्थिति में अचानक बदलाव, जैसे बैठने से खड़े होना, इसका एक सामान्य कारण है। इसके अलावा भोजन के बाद पाचन तंत्र में रक्त प्रवाह बढ़ने से भी बीपी कम हो सकता है।
कुछ दवाओं के दुष्प्रभाव, जैसे हाई बीपी, हृदय रोग या अवसाद की दवाएं भी निम्न रक्तचाप का कारण बन सकती हैं। इसके अलावा निर्जलीकरण, अधिक रक्तस्राव, गंभीर चोट या संक्रमण भी रक्तचाप को खतरनाक स्तर तक गिरा सकते हैं।
कई गंभीर बीमारियां जैसे हृदय की समस्याएं, मधुमेह, थायरॉइड विकार और पार्किंसंस रोग भी इस स्थिति को जन्म दे सकते हैं। गर्भावस्था के दौरान भी रक्तचाप कम होना आम बात है, जो अक्सर चिंता का कारण नहीं बनता।
सबसे महत्वपूर्ण सवाल यह है कि निम्न रक्तचाप कब चिंता का विषय बन जाता है। यदि इसके लक्षण बार-बार या अचानक गंभीर रूप से दिखाई दें, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। लगातार चक्कर आना, बेहोशी, भ्रम, ठंडी और चिपचिपी त्वचा या तेज सांस जैसी स्थितियां संकेत देती हैं कि शरीर के महत्वपूर्ण अंगों तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंच रहा है।
ऐसी स्थिति में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना जरूरी है, क्योंकि गंभीर मामलों में यह हृदय, मस्तिष्क और गुर्दों को प्रभावित कर सकता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, हल्का निम्न रक्तचाप आमतौर पर खतरनाक नहीं होता, लेकिन जब यह शरीर के सामान्य कामकाज को प्रभावित करने लगे या इसके लक्षण बढ़ने लगें, तो समय रहते इलाज कराना बेहद जरूरी हो जाता है।