खाने-पीने के साथ शरीर में पहुंच रहा माइक्रोप्लास्टिक, जानिए बचने के उपाय

Story by  एटीवी | Published by  [email protected] | Date 28-07-2026
Microplastics are entering the body through food and drink; learn how to avoid them.
Microplastics are entering the body through food and drink; learn how to avoid them.

 

नई दिल्ली।

प्लास्टिक प्रदूषण अब केवल पर्यावरण की समस्या नहीं रह गया है, बल्कि यह सीधे मानव स्वास्थ्य के लिए भी गंभीर खतरा बनता जा रहा है। वैज्ञानिकों और स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, माइक्रोप्लास्टिक (Microplastics) यानी प्लास्टिक के बेहद सूक्ष्म कण अब भोजन, पीने के पानी और यहां तक कि हवा के जरिए भी हमारे शरीर में प्रवेश कर रहे हैं। इनसे पूरी तरह बच पाना आज के समय में लगभग असंभव है, लेकिन कुछ आसान और व्यावहारिक आदतें अपनाकर इनके प्रभाव को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोप्लास्टिक शरीर में लगातार जमा होने पर कई गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। शोधों में संकेत मिले हैं कि ये कण शरीर के विभिन्न अंगों तक पहुंच सकते हैं, कोशिकाओं को नुकसान पहुंचा सकते हैं, डीएनए को प्रभावित कर सकते हैं और प्रजनन क्षमता पर भी प्रतिकूल असर डाल सकते हैं। हालांकि इन प्रभावों पर अभी भी वैज्ञानिक अध्ययन जारी हैं, लेकिन एहतियात बरतना जरूरी माना जा रहा है।

पर्यावरण विशेषज्ञों का कहना है कि माइक्रोप्लास्टिक केवल भोजन के माध्यम से ही नहीं, बल्कि सांस लेने और त्वचा के संपर्क से भी शरीर में प्रवेश कर सकता है। इसलिए इसे पूरी तरह रोकना संभव नहीं है, लेकिन कुछ सावधानियां अपनाकर इसके जोखिम को काफी कम किया जा सकता है।

पानी हमेशा फिल्टर करके पिएं

यदि आप ट्यूबवेल, बोरवेल या अन्य स्थानीय स्रोतों का पानी पीते हैं, तो उसे फिल्टर करके ही इस्तेमाल करें। आधुनिक वॉटर फिल्टर माइक्रोप्लास्टिक के कई सूक्ष्म कणों को हटाने में मदद कर सकते हैं। साफ और फ़िल्टर किया हुआ पानी पीना स्वास्थ्य के लिए अधिक सुरक्षित माना जाता है।

पैकेटबंद और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ कम खाएं

बाजार में मिलने वाले पैकेटबंद और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ अक्सर प्लास्टिक पैकेजिंग में रखे जाते हैं। खासकर गर्म भोजन यदि प्लास्टिक के डिब्बों में रखा जाए तो प्लास्टिक के सूक्ष्म कण भोजन में मिल सकते हैं। इसलिए जहां तक संभव हो, ताजा और घर का बना भोजन खाने की आदत डालें।

कांच और धातु के बर्तनों का इस्तेमाल करें

भोजन को स्टोर करने और गर्म करने के लिए प्लास्टिक की बजाय कांच या स्टील के बर्तनों का उपयोग करें। प्लास्टिक के डिब्बे गर्म होने या पुराने होने पर माइक्रोप्लास्टिक छोड़ सकते हैं, जबकि कांच और धातु अपेक्षाकृत सुरक्षित विकल्प हैं।

सिंगल-यूज प्लास्टिक से दूरी बनाएं

डिस्पोजेबल प्लास्टिक जैसे प्लास्टिक के गिलास, स्ट्रॉ, चम्मच, प्लेट और कटोरियों का उपयोग कम से कम करें। एक बार इस्तेमाल होने वाले ये उत्पाद जल्दी टूटते हैं और माइक्रोप्लास्टिक के स्रोत बन सकते हैं। इनके स्थान पर पुन: उपयोग किए जा सकने वाले विकल्प अपनाना बेहतर है।

पर्यावरण-अनुकूल बैग और प्राकृतिक कपड़े अपनाएं

खरीदारी के लिए प्लास्टिक बैग की जगह जूट या सूती बैग का इस्तेमाल करें। वहीं कपड़ों में पॉलिएस्टर जैसे सिंथेटिक फैब्रिक की बजाय सूती, ऊनी या लिनन के वस्त्र चुनें। इसी तरह तौलिया, चादर और अन्य घरेलू वस्तुओं में भी प्राकृतिक रेशों को प्राथमिकता दें।

समुद्री भोजन का चयन सोच-समझकर करें

वैज्ञानिक अध्ययनों में कई समुद्री मछलियों और अन्य समुद्री जीवों में माइक्रोप्लास्टिक पाए गए हैं। समुद्र में जमा प्लास्टिक कचरे के कारण ये कण मछलियों के शरीर में पहुंच जाते हैं और फिर खाद्य श्रृंखला के माध्यम से इंसानों तक आ सकते हैं। इसलिए समुद्री भोजन का सेवन करते समय गुणवत्ता और स्रोत पर ध्यान देना जरूरी है।

व्यक्तिगत देखभाल उत्पादों के लेबल पढ़ें

कुछ साबुन, फेस स्क्रब, टूथपेस्ट और सौंदर्य प्रसाधनों में पॉलीइथिलीन (Polyethylene) या पॉलीप्रोपाइलीन (Polypropylene) जैसे प्लास्टिक आधारित तत्व मौजूद हो सकते हैं। ऐसे उत्पाद खरीदने से पहले उनके लेबल अवश्य पढ़ें और माइक्रोप्लास्टिक युक्त उत्पादों से बचने का प्रयास करें।

हालांकि माइक्रोप्लास्टिक से पूरी तरह बचना आज संभव नहीं है, लेकिन रोजमर्रा की छोटी-छोटी सावधानियां अपनाकर इसके शरीर में प्रवेश को काफी हद तक कम किया जा सकता है। स्वस्थ जीवनशैली, ताजा भोजन, सुरक्षित पानी और प्लास्टिक के सीमित उपयोग की आदत न केवल आपके स्वास्थ्य की रक्षा करेगी, बल्कि पर्यावरण संरक्षण में भी महत्वपूर्ण योगदान देगी।