नई दिल्ली
गर्मियों में तापमान बढ़ते ही लोग ठंडे पेय पदार्थों की ओर रुख करते हैं। इनमें गन्ने का रस एक लोकप्रिय विकल्प है, जिसे अक्सर शरीर को ठंडा रखने और हाइड्रेट करने वाला पेय माना जाता है। लेकिन क्या यह सच में हीट स्ट्रोक यानी लू से बचाता है? विशेषज्ञों के अनुसार इसका जवाब ‘नहीं’ है।
पोषण विशेषज्ञ बताते हैं कि लू लगना तब होता है जब शरीर का तापमान नियंत्रण बिगड़ जाता है, जो आमतौर पर पानी की कमी और इलेक्ट्रोलाइट असंतुलन के कारण होता है। गन्ने का रस पीने से ताजगी जरूर मिलती है, लेकिन यह शरीर को उन जरूरी इलेक्ट्रोलाइट्स की पर्याप्त मात्रा नहीं देता, जो लू से बचाव के लिए जरूरी होते हैं।
एक आम धारणा यह भी है कि गन्ने का रस एक अच्छा इलेक्ट्रोलाइट ड्रिंक है। लेकिन हकीकत कुछ और है। पसीने के जरिए शरीर से बड़ी मात्रा में सोडियम बाहर निकलता है, जबकि एक गिलास गन्ने के रस में सोडियम बहुत कम मात्रा में होता है। ऐसे में यह शरीर में पानी को बनाए रखने में पूरी तरह सक्षम नहीं होता।
इसके अलावा, गन्ने के रस में चीनी की मात्रा भी काफी अधिक होती है। एक गिलास में 25 से 40 ग्राम तक शुगर हो सकती है, जो ब्लड शुगर लेवल को तेजी से बढ़ा सकती है। खासकर खाली पेट इसका सेवन करने से यह प्रभाव और अधिक बढ़ सकता है। इसलिए इसे नियमित रूप से अधिक मात्रा में पीना स्वास्थ्य के लिए सही नहीं माना जाता।
स्वच्छता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा है। सड़क किनारे मिलने वाला गन्ने का रस कई बार साफ-सफाई के मानकों पर खरा नहीं उतरता, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है।
विशेषज्ञों की सलाह है कि गर्मियों में शरीर को हाइड्रेट रखने के लिए सादा पानी सबसे अच्छा विकल्प है। इसके अलावा, नींबू पानी में एक चुटकी नमक मिलाकर पीना शरीर में इलेक्ट्रोलाइट संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।
कुल मिलाकर, गन्ने का रस ताजगी देने वाला पेय जरूर है, लेकिन इसे लू से बचाव का उपाय नहीं माना जा सकता। बेहतर है कि इसे कभी-कभार ही पिया जाए और गर्मी से बचने के लिए सही हाइड्रेशन पर ध्यान दिया जाए।