जयपुर में सर सैयद दिवस: शिक्षा और राष्ट्र निर्माण का संदेश

Story by  फरहान इसराइली | Published by  [email protected] | Date 18-10-2026
Sir Syed Day in Jaipur: A Message of Education and Nation-Building
Sir Syed Day in Jaipur: A Message of Education and Nation-Building

 

फरहान इसराइली/जयपुर 

अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के संस्थापक सर सैयद अहमद खान की जयंती पर जयपुर में आयोजित ‘यौम ए सर सैयद’ समारोह में शिक्षा, सामाजिक एकता और राष्ट्र निर्माण का संदेश गूंजा। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी ओल्ड बॉयज एसोसिएशन, राजस्थान चैप्टर की ओर से टोंक रोड स्थित होटल इंडियाना प्राइड में आयोजित इस कार्यक्रम में शिक्षाविदों, प्रशासनिक अधिकारियों, चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और विद्यार्थियों ने हिस्सा लिया।

समारोह का मुख्य उद्देश्य सर सैयद अहमद खान की शैक्षिक विरासत को याद करने के साथ नई पीढ़ी को उनके विचारों से जोड़ना था। इस वर्ष कार्यक्रम की थीम ‘From the Aligarh Movement to Nation Building: Our Duties and Responsibilities’ रखी गई। इसके जरिए यह सवाल सामने रखा गया कि आज के दौर में शिक्षा और राष्ट्र निर्माण के लिए समाज की क्या जिम्मेदारियां हैं।

जयपुर में सर सैयद दिवस मनाने की परंपरा तीन दशक से अधिक पुरानी है। इस आयोजन को लगातार आगे बढ़ाने में राजस्थान के शिक्षाविद डॉ. आजम बैग की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। वह 1992 से 1994 तक अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी छात्रसंघ के अध्यक्ष रहे थे।

वर्ष 1995 में राजस्थान आने के बाद उन्होंने सर सैयद दिवस के आयोजन को व्यापक स्वरूप देने और अलीगढ़ से जुड़े लोगों को एक मंच पर लाने का प्रयास किया। वर्तमान में वह एएमयू ओल्ड बॉयज एसोसिएशन, राजस्थान के अध्यक्ष और जेएलएन ग्रुप ऑफ एजुकेशनल इंस्टीट्यूशंस के संस्थापक निदेशक हैं।

डॉ. बैग के मुताबिक, पहले जयपुर में यह कार्यक्रम दो अलग-अलग स्थानों पर आयोजित होता था। बाद में उन्होंने सभी लोगों को एक मंच पर जोड़ने की पहल की। आज यह आयोजन सर सैयद अहमद खान की जयंती मनाने के साथ शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी पर विचार साझा करने का अवसर बन चुका है।

कार्यक्रम की शुरुआत कारी मजहर बैग की किरात से हुई। इसके बाद कौमी तराना पेश किया गया। एसोसिएशन के सचिव और यूनानी डायरेक्टरेट के पूर्व निदेशक डॉ. शौकत अली ने अतिथियों का स्वागत किया।

उन्होंने उपस्थित लोगों का आभार जताते हुए देश की तरक्की में सक्रिय योगदान देने की अपील की। कार्यक्रम में भरतपुर के जिला कलेक्टर कमरुज्जमा चौधरी, आईएएस और फरहा खान, आईआरएस विशिष्ट अतिथि के रूप में शामिल हुए।

वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ. सैफुल हक भी समारोह में मौजूद रहे। इसके अलावा डॉ. एम. नासिर खान, एफ.के. शेरवानी और डॉ. मुनव्वर चौधरी सहित कई शिक्षाविदों और गणमान्य लोगों ने कार्यक्रम में हिस्सा लिया। डॉ. शौकत अली एसोसिएशन के सचिव हैं, जबकि डॉ. नासिर खान और डॉ. मुनव्वर चौधरी वरिष्ठ उपाध्यक्ष की जिम्मेदारी निभा रहे हैं।

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सर सैयद ने कठिन दौर में शिक्षा को बनाया बदलाव का रास्ता

समारोह को संबोधित करते हुए डॉ. आजम बैग ने कहा कि आज सरकारों की आलोचना करना आसान है, लेकिन 1857 के बाद भारतीय समाज के सामने मौजूद चुनौतियां कहीं अधिक गंभीर थीं। उस दौर में शिक्षा, सामाजिक सुधार और आधुनिक ज्ञान तक पहुंच बड़ी चुनौती थी।

सर सैयद अहमद खान ने परिस्थितियों को समझा और शिक्षा को समाज की तरक्की का सबसे प्रभावी माध्यम बनाया। उन्होंने लोगों को यह समझाने का प्रयास किया कि बदलते समय के साथ आगे बढ़ने के लिए आधुनिक विज्ञान, दर्शन और धार्मिक समझ के बीच संतुलन जरूरी है।

डॉ. बैग ने सर सैयद के उस विचार का उल्लेख किया, जिसमें एक हाथ में दर्शन, दूसरे हाथ में विज्ञान और सिर पर कलमे का ताज होने की कल्पना की गई है। उन्होंने कहा कि इस विचार का मूल संदेश ज्ञान के विभिन्न क्षेत्रों को अपनाना और अपनी सांस्कृतिक पहचान के साथ आधुनिक शिक्षा हासिल करना है। आज जब रोजगार, तकनीक और सामाजिक विकास की चुनौतियां लगातार बदल रही हैं, तब यह सोच और भी प्रासंगिक हो जाती है।

उन्होंने राजस्थान में शिक्षा के क्षेत्र में हो रहे प्रयासों का भी जिक्र किया। डॉ. बैग के अनुसार, झालावाड़, जयपुर और कोटा सहित प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में 18 स्कूल और कॉलेज स्थापित किए जा चुके हैं। अब एक विश्वविद्यालय की स्थापना की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि शिक्षा के संस्थान केवल डिग्रियां देने का माध्यम नहीं होते। वे समाज में नई सोच पैदा करते हैं, युवाओं को अवसर देते हैं और आने वाली पीढ़ियों के लिए विकास का रास्ता खोलते हैं।

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अलीगढ़ आंदोलन की विरासत को आगे बढ़ाने की अपील

डॉ. आजम बैग ने अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के इतिहास का उदाहरण देते हुए बताया कि सर सैयद अहमद खान ने शैक्षिक संस्थान स्थापित करने के लिए किस तरह कठिन परिस्थितियों का सामना किया। उनके अनुसार, जब मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज को विश्वविद्यालय का दर्जा दिलाने की कोशिश हो रही थी, तब ब्रिटिश सरकार की ओर से 30 लाख रुपये का रिजर्व फंड

जमा करने की शर्त रखी गई थी। इस लक्ष्य को पूरा करने के लिए सर सैयद ने देश के विभिन्न हिस्सों की यात्राएं कीं और लोगों से आर्थिक सहयोग मांगा।डॉ. बैग ने कहा कि सर सैयद को अपने अभियान के दौरान विरोध और अपमान का भी सामना करना पड़ा, लेकिन उन्होंने शिक्षा के उद्देश्य से पीछे हटना स्वीकार नहीं किया।

उन्होंने उस प्रचलित प्रसंग का उल्लेख किया, जिसमें विरोध के दौरान उन पर जूते फेंके जाने के बावजूद सर सैयद ने कहा था कि वह इन जूतियों को बेचकर भी विश्वविद्यालय के लिए धन जुटाएंगे। इस प्रसंग के जरिए डॉ. बैग ने बताया कि किसी बड़े शैक्षिक उद्देश्य को पूरा करने के लिए दृढ़ संकल्प, धैर्य और सामूहिक सहयोग कितना जरूरी है।

उन्होंने उस समय के 30 लाख रुपये की मौजूदा कीमत 700 से 800 करोड़ रुपये के आसपास बताई और राजस्थान के लोगों से सवाल किया कि क्या सामूहिक प्रयास से एक विश्वविद्यालय स्थापित नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि शिक्षा के क्षेत्र में स्थायी संस्थान खड़े करना समाज को पिछड़ेपन से बाहर निकालने का प्रभावी रास्ता है। राजस्थान में ही नहीं, बल्कि राज्य के बाहर भी नए शिक्षण संस्थानों की स्थापना के लिए प्रयास किए जाने चाहिए।

राजस्थान में सर सैयद डे पर आयोजित एक अन्य कार्यक्रम में विचार रखते लोग......

डॉ. बैग ने कहा कि अलीगढ़ आंदोलन को केवल इतिहास का एक अध्याय मानना उचित नहीं है। सर सैयद अहमद खान का शैक्षिक अभियान 1898 में उनके निधन के साथ समाप्त नहीं हुआ। उसकी मूल भावना आज भी समाज को शिक्षा, सुधार और प्रगति के लिए प्रेरित करती है। उन्होंने एएमयू से जुड़े लोगों और युवाओं से तीन प्रमुख अपील कीं। पहली, धार्मिक शिक्षा के साथ व्यावसायिक और आधुनिक शिक्षा भी हासिल करें।

दूसरी, समाज में नफरत की दीवारें खड़ी करने के बजाय एकता और आपसी विश्वास के पुल बनाएं। तीसरी, नशे, असहिष्णुता और भ्रष्टाचार जैसी बुराइयों के खिलाफ अपने आचरण से उदाहरण पेश करें।

उन्होंने यह भी कहा कि सर सैयद दिवस केवल दावतों और भाषणों तक सीमित नहीं रहना चाहिए। इस दिन का वास्तविक महत्व तभी है, जब लोग सर सैयद के विचारों को अपने जीवन में उतारें और शिक्षा के प्रसार के लिए ठोस काम करें।

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युवाओं के लिए मेहनत और अनुशासन का संदेश

समारोह में भरतपुर के जिला कलेक्टर कमरुज्जमा चौधरी ने युवाओं को संबोधित करते हुए कहा कि जीवन में सफलता हासिल करने के लिए मेहनत और अनुशासन बेहद जरूरी हैं। केवल लक्ष्य तय कर लेना पर्याप्त नहीं है। उसे हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करना और अपने समय का सही इस्तेमाल करना भी जरूरी है। उनका संदेश विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे युवाओं के लिए खास महत्व रखता है।

कार्यक्रम में डॉ. आजम बैग ने कमरुज्जमा चौधरी के पिता का भी उल्लेख किया, जिन्होंने 1984 से 1985 या उससे पहले अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी से शिक्षा हासिल की थी। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों से प्राप्त ज्ञान और संस्कार आने वाली पीढ़ियों के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इस संदर्भ में उन्होंने कमरुज्जमा चौधरी की उपलब्धियों का जिक्र किया। उनके वक्तव्य पर सभागार में मौजूद लोगों ने तालियों के साथ प्रतिक्रिया दी।

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मेधावी विद्यार्थियों और समाजसेवियों को मिला सम्मान

सर सैयद दिवस समारोह में शिक्षा और विभिन्न पेशों में उल्लेखनीय प्रदर्शन करने वाले लोगों को सम्मानित भी किया गया। हर वर्ष की परंपरा के अनुसार, दसवीं और बारहवीं कक्षा में बेहतर परिणाम हासिल करने वाले विद्यार्थियों के साथ प्रतियोगी परीक्षाओं में सफल युवाओं को मंच पर बुलाया गया। राजस्थान प्रशासनिक सेवा यानी आरएएस, भारतीय प्रशासनिक सेवा यानी आईएएस और भारतीय पुलिस सेवा यानी आईपीएस में चयनित युवाओं को उनकी उपलब्धियों के लिए सम्मानित किया गया।

इसके अलावा पत्रकारिता, चिकित्सा और समाजसेवा के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले लोगों को ‘सर सैयद एक्सीलेंस अवार्ड’ प्रदान किए गए। सम्मानित लोगों को प्रशस्ति पत्र, स्मृति चिह्न और शॉल देकर प्रोत्साहित किया गया। एएमयू से जुड़े अन्य साथियों और शिक्षाविदों का भी सम्मान हुआ।

इस पहल का उद्देश्य केवल प्रतिभाओं की उपलब्धियों को पहचानना नहीं था, बल्कि विद्यार्थियों को यह संदेश देना भी था कि मेहनत, शिक्षा और सामाजिक जिम्मेदारी के जरिए समाज में सकारात्मक बदलाव लाया जा सकता है। ऐसे सम्मान युवाओं को अपने लक्ष्य के प्रति गंभीर रहने और अपने ज्ञान का उपयोग व्यापक सामाजिक हित में करने की प्रेरणा देते हैं।

कार्यक्रम का समापन अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के तराने के साथ हुआ। पूरे आयोजन में सर सैयद अहमद खान की शैक्षिक विरासत, आधुनिक ज्ञान की जरूरत और राष्ट्र निर्माण में नागरिकों की भूमिका पर जोर दिया गया।

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जयपुर में आयोजित यह समारोह इस बात को रेखांकित करता है कि सर सैयद दिवस का महत्व केवल एक महान शिक्षाविद की जयंती मनाने तक सीमित नहीं है। इसका वास्तविक संदेश शिक्षा के अवसर बढ़ाने, प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने, सामाजिक एकता मजबूत करने और देश की प्रगति में भागीदारी निभाने से जुड़ा है। सर सैयद अहमद खान की विरासत आज भी यही प्रेरणा देती है कि किसी समाज का भविष्य केवल शिकायतों से नहीं, बल्कि शिक्षा, मेहनत और संस्थान निर्माण के निरंतर प्रयासों से बदलता है।