पर्यावरण संरक्षण की नई मिसाल बनेगा भोपाल का आलमी इज्तिमा

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 13-11-2025
Bhopal's Aalmi Ijtema will become a new example of environmental protection.
Bhopal's Aalmi Ijtema will become a new example of environmental protection.

 

गुलाम कादिर/भोपाल

देश-दुनिया के तब्लीगी इज्तिमाओं में भोपाल के आलमी इज्तिमा का एक विशेष स्थान और महत्व है और इस बार यह आयोजन न केवल धार्मिक नसीहतों के लिए, बल्कि पर्यावरण संरक्षण के लिए एक नई मिसाल कायम करने जा रहा है। 

14 से 17 नवंबर तक राजधानी के ईंटखेड़ी में आयोजित होने जा रहे 78वें आलमी तब्लीगी इज्तिमा की थीम इस बार ‘जीरो वेस्ट पॉल्यूशन’ रखी गई है, जो इस विशाल धार्मिक समागम को एक महत्वपूर्ण सामाजिक और पर्यावरणीय अभियान से जोड़ती है। 
BHOPAL 78TH AALMI TABLIGHI IJTEMA
आज देश के कई शहरों में प्रदूषण के कारण सांस लेना तक मुश्किल हो गया है, जिससे कैंसर जैसी बीमारियों का खतरा बढ़ रहा है। इसी गंभीर चुनौती को देखते हुए, आलम-ए-दीन (धार्मिक विद्वानों) द्वारा अल्लाह, रसूल, नमाज़, दोज़ख़-जन्नत और सांप्रदायिक सौहार्द पर उपदेश देने के साथ-साथ, इज्तिमा में शामिल होने वाले तकरीबन 10 लाख से 20 लाख देश-विदेश के मुसलमानों को पर्यावरण को प्रदूषित होने से रोकने में उनकी भूमिका के बारे में विशेष रूप से सचेत किया जाएगा।

‘जीरो वेस्ट पॉल्यूशन’ के इस महत्वाकांक्षी अभियान को सफल बनाने के लिए आयोजकों ने ठोस योजनाएँ बनाई हैं। इज्तिमा क्षेत्र में प्लास्टिक के कप, प्लेट, ग्लास और पानी के पाउच पूरी तरह से प्रतिबंधित (बैन) रहेंगे।

 आयोजकों ने सख्त कदम उठाए हैं, यहाँ तक कि विक्रेताओं से भी प्लास्टिक निषेध नियम का उल्लंघन करने पर अपना सामान पैक करने को कहा गया है। पर्यावरण को स्वच्छ रखने के लिए नई तकनीक का भी प्रयोग किया जा रहा है। 
Bhopal Ijtema organizing
पानी के लिए बोतलबंद पानी की सप्लाई की जाएगी, लेकिन इज्तिमे के बाद उन बोतलों को इकट्ठा करने और रिसाइकिल (पुनर्चक्रण) करने का भी व्यापक प्रबंध किया गया है। इसके अलावा, आयोजन में इस्तेमाल हुए पानी को खेती के काम लायक बनाकर खेतों में सप्लाई करने की व्यवस्था की गई है।

यहां तक कि चाय के कचरे जैसी बची हुई सामग्री को सुखाकर आस-पास के बागानों में खाद (कम्पोस्ट) के रूप में उपयोग करने के लिए एकत्र किया गया है। इस पहल का उद्देश्य न केवल उपस्थित लोगों के बीच जागरूकता बढ़ाना है, बल्कि अन्य बड़े आयोजनों के लिए एक उदाहरण स्थापित करना है, जिसका लक्ष्य अक्सर शून्य-अपशिष्ट प्रयास के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाना होता है। 

आयोजक समिति ने यह सुनिश्चित करने के लिए ठोस प्रयास किए हैं कि यह विशाल आयोजन स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल हो, जिससे भोपाल की स्वच्छता रैंकिंग में सुधार हो और शहर देश के बाकी हिस्सों के लिए एक आदर्श बने।

इज्तिमा के दौरान धार्मिक आयोजनों के साथ-साथ सामाजिक सद्भाव का भी प्रदर्शन किया जाएगा। इज्तिमा कमेटी के मीडिया कार्डिनेटर उमर हाफ़िज़ ने बताया कि इज्तिमा के पहले दिन, शुक्रवार को असर की नमाज़ के बाद 300 जोड़ों का दहेज-मुक्त (दहेज फ्री) निकाह कराया जाएगा।
Bhopal Ijtema events
 निकाह के लिए रजिस्ट्रेशन चल रहा है, और सुरक्षा के मद्देनजर वर-वधू के साथ उनके माता-पिता को भी अपना आई कार्ड लेकर आना अनिवार्य होगा। जायरीनों की सुविधा के लिए यहाँ बेहद ही सस्ते दामों में नाश्ते, पानी और भोजन की व्यवस्था की गई है।

 बाज़ार में 20 रुपये में मिलने वाली एक लीटर की पानी की बोतल इज्तिमा में मात्र 6 रुपये में उपलब्ध होगी। इसी तरह, यहाँ लगाई जाने वाली दुकानों में 20 रुपये में नाश्ता और 60 रुपये में भरपेट खाना मिलेगा। इसके अलावा, जायरीनों के सोने के लिए गद्दे और नहाने-वजू करने के लिए गर्म पानी का प्रबंध भी किया जाएगा। इज्तिमा का समापन 17 नवंबर को दुआ-ए-ख़ास के साथ होगा।

इस विशाल धार्मिक आयोजन में करीब 10 लाख जायरीनों के जुटने के अनुमान को देखते हुए, पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा और यातायात प्रबंधन के कड़े इंतजाम किए हैं। देहात एसपी रामशरण प्रजापति ने बताया कि इज्तिमे के दौरान आयोजन स्थल पर करीब 4 हज़ार पुलिस के जवानों को तैनात किया जाएगा। सुरक्षा के लिए 1 हज़ार सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं, और ड्रोन के जरिए भी भीड़ की निगरानी की जाएगी। 

आयोजन स्थल के आसपास 16 अस्थायी पुलिस चौकियाँ बनाई जा रही हैं, जबकि रेलवे स्टेशन और प्लेटफॉर्म पर भी अतिरिक्त चौकियाँ स्थापित की जाएंगी। डायल-112 की टीमें भी लगातार गश्त करेंगी।

नगर निगम की तरफ से आधा दर्जन से अधिक दमकलों और फायर ब्रिगेड टीमों को तैनात किया जाएगा, साथ ही सफाई व जलकार्य के लिए 1 हज़ार से अधिक कर्मचारियों की ड्यूटी लगाई जाएगी। मेट्रो निर्माण कार्य के चलते ट्रैफिक व्यवस्था पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। मेट्रो निर्माण से जुड़े मार्गों, तिराहों और चौराहों पर रखे गए बैरिकेड्स अस्थायी रूप से हटाए जाएंगे।

 वाहनों के लिए 64 पार्किंग स्थल बनाए गए हैं। दूसरे जिलों से आने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग एंट्री पॉइंट और कट पॉइंट तय किए जा रहे हैं, ताकि भीड़ का दबाव एक ही मार्ग पर न पड़े। इस तरह, भोपाल का आलमी इज्तिमा न केवल धार्मिक और सामाजिक दायित्वों को पूरा कर रहा है, बल्कि पर्यावरण स्थिरता को बढ़ावा देने और ‘शून्य अपशिष्ट’ शहर बनाने के लक्ष्य की ओर बढ़कर देश के सामने एक महत्वपूर्ण उदाहरण प्रस्तुत कर रहा है।