आवाज द वाॅयस/ नई दिल्ली
पश्चिम बंगाल की कसबा विधानसभा सीट पर मतगणना के बीच तृणमूल कांग्रेस के उम्मीदवार अहमद जावेद खान की स्थिति मजबूत होती जा रही है। छठे राउंड की गिनती तक वह अपने निकटतम प्रतिद्वंदी से लगभग पचास हजार वोटों से आगे चल रहे थे। इसी रुझान के बाद उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
अहमद जावेद खान पश्चिम बंगाल की राजनीति में लंबे समय से सक्रिय चेहरा हैं। वे तृणमूल कांग्रेस के वरिष्ठ नेता हैं और राज्य सरकार में आपदा प्रबंधन मंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। उनकी पहचान एक अनुभवी और जमीन से जुड़े नेता के रूप में रही है।
उनका राजनीतिक सफर काफी पुराना है। उन्होंने साल 2006 में पहली बार विधानसभा चुनाव जीतकर बालीगंज सीट से विधायक बने थे। इसके बाद 2011 में वे कसबा सीट से चुने गए और तब से लगातार इस क्षेत्र में उनकी पकड़ मजबूत बनी हुई है।
उनकी शुरुआती शिक्षा कोलकाता के सेंट जेवियर्स कॉलेज से हुई है। उन्होंने 1978 में कॉमर्स में स्नातक की डिग्री हासिल की थी। पढ़ाई के बाद वे धीरे-धीरे सार्वजनिक जीवन में सक्रिय होते गए।
राजनीति में आने से पहले भी वे स्थानीय स्तर पर काफी सक्रिय रहे हैं। वे कोलकाता नगर निगम में पार्षद भी रह चुके हैं। 1995 से 2010 तक उन्होंने वार्ड नंबर 66 का प्रतिनिधित्व किया। इस दौरान उन्होंने जनता से सीधे जुड़कर काम किया।
इसके अलावा वे कोलकाता नगर निगम में स्वास्थ्य विभाग के सदस्य भी रहे हैं। उस समय उन्होंने शहर की स्वास्थ्य व्यवस्था को सुधारने पर काम किया। बाद में वे नगर निगम में विपक्ष के नेता भी बने।
कसबा सीट पर उनकी पकड़ मजबूत मानी जाती है। यहां उनकी छवि एक ऐसे नेता की रही है जो स्थानीय मुद्दों को गंभीरता से लेते हैं। चाहे सड़क की समस्या हो या पानी की व्यवस्था, उन्होंने लगातार लोगों के बीच रहकर काम किया है।
इस बार के चुनाव में भी यही असर देखने को मिला। शुरुआती राउंड से ही वे बढ़त बनाए हुए हैं। छठे राउंड के बाद उनकी जीत लगभग तय मानी जा रही है।
राजनीतिक जानकारों का मानना है कि उनकी लगातार सक्रियता और क्षेत्र में मजबूत पकड़ उनकी बड़ी ताकत है। लोगों से सीधा जुड़ाव और लंबे समय से चल रहा काम उन्हें अन्य उम्मीदवारों से आगे रखता है।
अब मतगणना के आगे बढ़ने के साथ औपचारिक घोषणा का इंतजार है। लेकिन रुझानों से साफ है कि कसबा सीट पर एक बार फिर अहमद जावेद खान का दबदबा कायम रहने वाला है।