आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
व्यवसाय में व्यापक बदलाव के लिए कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित सेवाएं देने वाली 'सर्विसनाउ' के वाइस चेयरमैन निक जिट्जॉन ने कहा है कि भारत में 'एआई-सक्षम सरकार' यानी कृत्रिम मेधा आधारित शासन संरचना के विकास का अवसर मौजूद है जिससे लोगों के जीवन स्तर में सुधार, लागत में कमी और डेटा गोपनीयता को मजबूती मिल सकती है।
एआई-सक्षम सरकार एक ऐसा शासन मॉडल है, जिसमें कृत्रिम मेधा को सभी सार्वजनिक सेवाओं और प्रशासनिक प्रक्रियाओं में स्वाभाविक और भरोसेमंद तरीके से शामिल किया जाता है।
जिट्जॉन ने यहां आयोजित ‘नॉलेज 2026 एआई’ सम्मेलन के दौरान पीटीआई-भाषा के साथ बातचीत में कहा, “एआई-सक्षम सरकार नागरिकों की पहचान की सुरक्षा करेगी और सरकारी सेवाएं देने वालों को कम लागत में बेहतर परिणाम हासिल करने में मदद करेगी।”
उन्होंने भारत के सार्वजनिक क्षेत्र में एआई के इस्तेमाल पर पूछे गए सवाल के जवाब में कहा कि लक्ष्य सेवाओं की गुणवत्ता बढ़ाने का होना चाहिए, ताकि बार-बार कर राजस्व बढ़ाने की जरूरत ही न पड़े।
जिट्जॉन ने कहा, "आने वाले वर्षों में स्वास्थ्य क्षेत्र में एआई का बड़ा असर देखने को मिल सकता है। हम मानते हैं कि एआई-सक्षम सरकार के जरिए नागरिकों की पहचान सुरक्षित रखते हुए कम लागत में बेहतर सेवाएं दी जा सकती हैं।”
उन्होंने अपने भारत दौरे का जिक्र करते हुए डिजिटल नवाचार की दिशा में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की अगुवाई वाली सरकार के प्रयासों की सराहना की।