गाजियाबाद में दो मंजिला मजारनुमा ढांचा ध्वस्त, सरकारी जमीन पर कब्जे का आरोप

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 29-06-2026
Two-storey shrine-like structure demolished in Ghaziabad; encroachment on government land alleged.
Two-storey shrine-like structure demolished in Ghaziabad; encroachment on government land alleged.

 

गाजियाबाद/नई दिल्ली।

उत्तर प्रदेश के गाजियाबाद जिले में प्रशासन ने रविवार को एक बड़े अतिक्रमण विरोधी अभियान के तहत लोनी स्थित ट्रॉनिका सिटी क्षेत्र में कथित रूप से अवैध रूप से निर्मित एक मजारनुमा ढांचे को ध्वस्त कर दिया। प्रशासन का कहना है कि यह निर्माण उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीएसआईडीए) की सरकारी भूमि पर अवैध कब्जा करके किया गया था।

प्रशासनिक अधिकारियों के अनुसार, यह कार्रवाई ट्रॉनिका सिटी के पॉकेट सी-8 क्षेत्र में की गई, जहां लगभग 225 वर्ग मीटर सरकारी भूमि पर बिना अनुमति के निर्माण किया गया था। प्रशासन ने भारी पुलिस बल की मौजूदगी में बुलडोजर चलाकर पूरे ढांचे को हटाने की कार्रवाई शुरू की।

गाजियाबाद के अतिरिक्त जिला मजिस्ट्रेट (एडीएम) विपिन कुमार कश्यप ने बताया कि संबंधित भूमि यूपीएसआईडीए योजना के अंतर्गत आती है और इस पर वर्षों से अवैध कब्जा किया गया था।

उन्होंने कहा, "वर्ष 2001 में यहां एक छोटा मजारनुमा ढांचा और चबूतरा बनाया गया था। लेकिन वर्ष 2021 में कोविड काल के दौरान इस ढांचे का विस्तार कर इसे चुपचाप एक बड़े दो मंजिला गुंबदनुमा निर्माण में बदल दिया गया।"

एडीएम ने बताया कि प्रशासन को इस निर्माण की वैधता को लेकर शिकायतें प्राप्त हुई थीं, जिसके बाद मामले की जांच की गई। जांच के दौरान पाया गया कि संबंधित निर्माण के लिए किसी प्रकार की वैध अनुमति या स्वामित्व संबंधी दस्तावेज उपलब्ध नहीं हैं।

उन्होंने कहा कि एंटी लैंड माफिया टास्क फोर्स और यूपीएसआईडीए की ओर से संबंधित पक्ष को कई नोटिस जारी किए गए थे। प्रशासन ने निर्माण की वैधता साबित करने के लिए दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा था, लेकिन निर्धारित समय सीमा के भीतर कोई जवाब नहीं दिया गया।

कश्यप ने कहा, "नोटिस जारी किए जाने के बावजूद किसी भी पक्ष ने इस निर्माण को वैध साबित करने के लिए कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया। इसके बाद नियमानुसार इसे अवैध घोषित किया गया और ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू की गई।"

प्रशासन के अनुसार, यूपीएसआईडीए ने कब्जा की गई भूमि और निर्माण की अनुमानित कीमत 65 लाख से 70 लाख रुपये के बीच आंकी है। अधिकारियों का कहना है कि करीब 225 वर्ग मीटर क्षेत्रफल की सरकारी भूमि पर अवैध रूप से कब्जा किया गया था।

कार्रवाई के दौरान क्षेत्र में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए थे। किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटने के लिए पर्याप्त संख्या में पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों को मौके पर तैनात किया गया था।

गौरतलब है कि उत्तर प्रदेश सरकार की एंटी लैंड माफिया नीति के तहत हाल के वर्षों में सरकारी भूमि पर अवैध कब्जों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। प्रशासन का कहना है कि सरकारी जमीन पर किसी भी प्रकार का अवैध निर्माण बर्दाश्त नहीं किया जाएगा और भविष्य में भी इस तरह की कार्रवाई जारी रहेगी।

फिलहाल इस मामले में विस्तृत जानकारी का इंतजार किया जा रहा है। प्रशासन ने संकेत दिए हैं कि मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की भी जांच की जा रही है।