नई दिल्ली।
राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) की विशेष अदालत ने पाकिस्तान समर्थित प्रतिबंधित आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा (LeT) से जुड़े दो ओवरग्राउंड वर्करों (OGWs) को 15-15 वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। दोनों दोषियों को जम्मू-कश्मीर में घुसे एक पाकिस्तानी आतंकवादी को पनाह, भोजन और लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराने का दोषी पाया गया।
एनआईए के अनुसार, कुपवाड़ा जिले के हंदवाड़ा निवासी जाहूर अहमद पीर और नजीर अहमद पीर ने वर्ष 2016 में भारी हथियारों से लैस पाकिस्तानी आतंकी बहादुर अली उर्फ सैफुल्लाह की सक्रिय मदद की थी। यह आतंकी जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कर घाटी और देश के अन्य हिस्सों, विशेषकर दिल्ली में बड़े हमलों की साजिश रच रहा था। अदालत ने दोनों को गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम [UA(P) Act] की धारा 18 और 19 के तहत 15 वर्ष तथा धारा 39 के तहत 9 वर्ष की सजा सुनाई। हालांकि, सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी और अधिकतम अवधि 15 वर्ष होगी। प्रत्येक आरोपी पर 1.50 लाख रुपये का जुर्माना भी लगाया गया है।
जांच एजेंसी के मुताबिक, बहादुर अली अन्य आतंकियों के साथ कुपवाड़ा क्षेत्र के रास्ते भारतीय सीमा में दाखिल हुआ था। उनके पास अत्याधुनिक हथियार, विस्फोटक, नेविगेशन उपकरण, नाइट विजन डिवाइस और संचार साधन मौजूद थे। भारत में रहते हुए वे पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर और पाकिस्तान स्थित अपने आकाओं के संपर्क में थे और लगातार निर्देश प्राप्त कर रहे थे। सुरक्षा बलों ने 25 जुलाई 2016 को बहादुर अली को गिरफ्तार कर लिया था, जबकि उसके दो साथी आतंकी मुठभेड़ में मारे गए थे।
एनआईए ने जनवरी 2017 में बहादुर अली के खिलाफ आरोपपत्र दाखिल किया था। मार्च 2021 में उसे विभिन्न धाराओं—आईपीसी, यूए(पी) एक्ट, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, आर्म्स एक्ट और विदेशी अधिनियम—के तहत दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई गई थी। आगे की जांच में जाहूर और नजीर की भूमिका सामने आई, जिन्होंने आतंकी को सुरक्षित ठिकाना देने के साथ-साथ उसकी अन्य आतंकियों से मुलाकात भी करवाई थी।
दोनों आरोपियों को सितंबर 2017 में गिरफ्तार किया गया और मार्च 2018 में आरोपपत्र दायर किया गया। 18 दिसंबर 2025 को अदालत ने उन्हें दोषी करार दिया और अब सजा सुनाकर घाटी में सक्रिय ओजीडब्ल्यू नेटवर्क को बड़ा झटका दिया है।




