अब्राहम समझौतों का दायरा बढ़ाने की ट्रंप की कोशिश मुश्किलों में घिरी

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 01-06-2026
Trump's bid to expand the scope of the Abraham Accords runs into trouble
Trump's bid to expand the scope of the Abraham Accords runs into trouble

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली 

 
ईरान युद्ध को समाप्त करने के लिए 25 मई को बातचीत जारी रहने के दौरान अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने पश्चिम एशिया के कई प्रमुख नेताओं से फोन पर बात की और उन पर अब्राहम समझौतों में शामिल होने का दबाव डाला।

वर्ष 2020 में घोषित इन समझौतों के तहत इजराइल और कई अरब देशों के बीच राजनयिक संबंध स्थापित हुए थे। इसकी शुरुआत संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और बहरीन से हुई।
 
उसी दिन बाद में ट्रंप ने सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में इस प्रस्ताव को दोहराते हुए लिखा, “इस बेहद जटिल पहेली को सुलझाने के लिए अमेरिका ने जो कुछ भी किया है, उसे देखते हुए कम से कम इतना तो अनिवार्य होना चाहिए कि ये सभी देश एक साथ अब्राहम समझौतों पर हस्ताक्षर करें।”
 
ट्रंप की पोस्ट से यह भी संकेत मिला कि ईरान को भी इन समझौतों में शामिल किया जा सकता है। यह अपने आप में चौंकाने वाला विचार है, क्योंकि इन समझौतों पर हस्ताक्षर करने के पीछे एक प्रमुख उद्देश्य क्षेत्र में ईरानी प्रभाव का मुकाबला करना भी था। लेकिन दुर्भाग्यवश ट्रंप के लिए यह विचार फिलहाल हकीकत से ज्यादा एक कल्पना जैसा प्रतीत होता है।
 
पश्चिम एशिया के बहुत कम नेता ट्रंप के इस प्रस्ताव से सहमत हो सकते हैं। 26 मई को प्रकाशित ‘पोलिटिको’ की एक खबर में अमेरिका के एक पूर्व राजनयिक ने ट्रंप के बयानों को “जहर’’” बताया।
 
उन्होंने कहा कि ट्रंप ने शांति के लिए ऐसी नयी शर्तें जोड़ दी हैं जिन्हें न तो ईरान स्वीकार करेगा और न ही वे देश जिनसे यह अपेक्षा की जा रही है।
 
इस प्रस्ताव के जरिए ट्रंप गाजा और लेबनान में इजराइल की सैन्य कार्रवाई को लेकर पश्चिम एशिया समेत दुनिया के कई हिस्सों में व्याप्त गहरे आक्रोश और नाराजगी का सही आकलन करने में नाकाम दिखते हैं।