The survey calls for promoting flexible working hours to increase the female workforce.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
महिला कामगारों को अब भी सीमित आवागमन और कठोर कार्य व्यवस्था जैसी संरचनात्मक बाधाओं का सामना करना पड़ रहा है जिसके कारण महिला कार्यबल बल की भागीदारी बढ़ाने के लिए लचीले काम के विकल्प, समान वेतन तथा कार्यस्थल पर उत्पीड़न से सुरक्षा देने वाली नीतियों को बढ़ावा देने की आवश्यकता है। बृहस्पतिवार को संसद में पेश आर्थिक समीक्षा में यह बात कही गई।
समीक्षा के अनुसार, इन चुनौतियों से निपटने के लिए बहुआयामी नीति अपनाने की जरूरत है, जिसमें लचीले और मिश्रित कार्य मॉडल, मातृत्व लाभ, समान वेतन और कार्यस्थल पर उत्पीड़न से सुरक्षा जैसे उपाय शामिल हों।
आर्थिक समीक्षा के आंकड़े यह भी दर्शाते हैं कि महिलाएं वैतनिक और अवैतनिक दोनों तरह के कामों में पुरुषों की तुलना में अधिक समय देती हैं। घरेलू स्तर पर महिलाएं अवैतनिक कार्यों में काफी अधिक समय लगाती हैं, जबकि वैतनिक कार्य में भागीदारी के बावजूद उनकी कुल भागीदारी पुरुषों से कम बनी रहती है।
समीक्षा के अनुसार, देखभाल और अवैतनिक कार्यों का दोहरा बोझ महिलाओं के लिए लचीले काम के विकल्पों की आवश्यकता को और अधिक स्पष्ट करता है।