आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय तथा ‘डबल-इंजन’ सहयोग बिहार को विकास की नई ऊंचाइयों तक ले जाएगा। उन्होंने कहा कि कृषि और ग्रामीण विकास राज्य की अर्थव्यवस्था की रीढ़ हैं और इन क्षेत्रों में तेजी से काम किया जा रहा है।
मुख्यमंत्री ने बुधवार को केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण और ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान के साथ लोक सेवक आवास स्थित संकल्प सभागार में कृषि एवं ग्रामीण विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर आयोजित उच्चस्तरीय बैठक के बाद यह बात कही।
बैठक में किसानों की समृद्धि, ग्रामीण आधारभूत संरचना के सुदृढ़ीकरण तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा बिहार के विकास के लिए लंबित राशि जारी की गई है, जिसके लिए राज्य सरकार आभार व्यक्त करती है। उन्होंने बताया कि मनरेगा (महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम) के तहत लंबित सभी भुगतानों को केंद्र सरकार के सहयोग से 30 जून से पहले पूरा करने पर सहमति बनी है।
उन्होंने कहा कि ग्रामीण विकास को नई दिशा देने वाली महत्वाकांक्षी ‘वीजीआरएएमजी’ योजना आगामी एक जुलाई से पूरे राज्य में लागू कर दी जाएगी।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) 2.0 का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि बिहार में एक करोड़ चार लाख लोगों की पहचान की गई है, जिनमें से 60 लाख पात्र पाए गए हैं। उन्होंने इन पात्र परिवारों को शीघ्र पक्का आवास उपलब्ध कराने की आवश्यकता पर बल दिया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि राज्य सरकार ‘जीविका दीदी’ को ‘लखपति दीदी’ बनाने की योजना पर तेजी से काम कर रही है। उन्होंने दावा किया कि इस अभियान के क्रियान्वयन में बिहार देश में पहले स्थान पर है और इस दिशा में प्रयासों को और गति दी जाएगी।
कृषि क्षेत्र में नवाचार और उत्पादकता बढ़ाने के लिए मुख्यमंत्री ने प्याज, टमाटर और आम जैसे कृषि उत्पादों के लिए ‘आदर्श केंद्र’ स्थापित करने का प्रस्ताव रखा। उन्होंने कहा कि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य दिलाने के लिए राज्य के फलों और अन्य उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय बाजारों से जोड़ा जाएगा।