The government will introduce a bill for the constitution of a new Delimitation Commission.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
सरकार संसद के वर्तमान बजट सत्र के तहत इस सप्ताह होने वाली विशेष बैठक के दौरान परिसीमन विधेयक, 2026 पेश करेगी। इसके तहत केंद्र सरकार ‘‘नवीनतम जनगणना आंकड़ों’’ के आधार पर और संविधान के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए लोकसभा तथा विधानसभाओं में सीटों के निर्धारण के लिए एक परिसीमन आयोग का गठन कर सकेगी।
महिला आरक्षण से जुड़े नारी शक्ति वंदन अधिनियम को क्रियान्वित करने के उद्देश्य से इस विधेयक की प्रति को संविधान (एक सौ इकतीसवां संशोधन) विधेयक, 2026 और केंद्र शासित प्रदेश कानून (संशोधन विधेयक), 2026 के साथ संसद सदस्यों के बीच वितरित किया गया है।
नए विधेयक के कई प्रावधान 2002 के कानून के समान हैं। इस विधेयक के माध्यम से 2002 के परिसीमन कानून को निरस्त कर दिया जाएगा।
परिसीमन विधेयक, 2026 के मसौदे के अनुसार, ‘‘केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा एक आयोग का गठन कर सकती है, जिसे परिसीमन आयोग कहा जाएगा। आयोग में निम्नलिखित सदस्य शामिल होंगे, 'एक सदस्य वे होंगे, जो उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश हैं या रहे हैं, जिन्हें केंद्र सरकार द्वारा आयोग के अध्यक्ष के रूप में नियुक्त किया जाएगा, मुख्य निर्वाचन आयुक्त (खुद) या मुख्य निर्वाचन आयुक्त द्वारा नामित एक निर्वाचन आयुक्त, पदेन सदस्य होंगे और राज्य चुनाव आयुक्त पदेन सदस्य होंगे।’’
विधेयक में कहा गया है कि केंद्र सरकार अधिसूचना द्वारा आयोग का कार्यकाल निर्दिष्ट कर सकती है।
इसमें कहा गया है कि केंद्र सरकार, आयोग के अनुरोध पर आयोग का कार्यकाल उस अवधि के लिए बढ़ा सकती है, जिसे वह आवश्यक समझे।
विधेयक में कहा गया है कि निर्वाचन आयोग संघ शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के उस क्षेत्र के तहत आने वाले विधानसभा क्षेत्रों के लिए परिसीमन आयोग के रूप में काम करेगा, जो पाकिस्तान के कब्जे में है।’’