नयी दिल्ली
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने बुधवार को पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर देश के पूर्व सैनिकों को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि उनका अडिग साहस, शौर्य और राष्ट्र के प्रति समर्पण हर भारतीय को निरंतर प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों ने न केवल अपने सेवा काल में देश की रक्षा की, बल्कि सेवानिवृत्ति के बाद भी राष्ट्रहित में योगदान देते रहे हैं।
राष्ट्रपति मुर्मू ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर एक संदेश साझा करते हुए कहा कि पूर्व सैनिक दिवस और सशस्त्र बल ध्वज दिवस जैसे अवसर हमारे लिए केवल सम्मान व्यक्त करने के दिन नहीं हैं, बल्कि यह पूर्व सैनिकों को सार्थक सहयोग और सम्मान देने की हमारी सामूहिक जिम्मेदारी की भी याद दिलाते हैं। उन्होंने कहा कि देश को अपने वीर सैनिकों और पूर्व सैनिकों पर गर्व है, जिन्होंने कठिन परिस्थितियों में भी राष्ट्र की रक्षा को सर्वोपरि रखा।
अपने संदेश में राष्ट्रपति ने विश्वास जताया कि पूर्व सैनिक भविष्य में भी पूरी निष्ठा और समर्पण के साथ राष्ट्र के हित में कार्य करते रहेंगे। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिकों का अनुभव, अनुशासन और देशभक्ति समाज और युवाओं के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभा सकती है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने आगे कहा, “पूर्व सैनिक दिवस के अवसर पर मैं हमारे सभी पूर्व सैनिकों के शौर्य, बलिदान और अनुकरणीय सेवाओं को नमन करती हूं। उनका अदम्य साहस न केवल वर्तमान पीढ़ी, बल्कि आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा देता रहेगा।”
गौरतलब है कि हर वर्ष 14 जनवरी को पूर्व सैनिक दिवस मनाया जाता है। यह दिन भारतीय सशस्त्र बलों के पहले कमांडर-इन-चीफ फील्ड मार्शल के.एम. करियप्पा की ऐतिहासिक सेवाओं के सम्मान में मनाया जाता है। फील्ड मार्शल करियप्पा 14 जनवरी 1953 को सेना से सेवानिवृत्त हुए थे और उन्हें आधुनिक भारतीय सेना की नींव रखने वाले महान सैन्य नेताओं में गिना जाता है।
पूर्व सैनिक दिवस का उद्देश्य न केवल पूर्व सैनिकों के बलिदान और योगदान को याद करना है, बल्कि उनके कल्याण, पुनर्वास और सम्मान से जुड़े मुद्दों पर समाज और सरकार का ध्यान केंद्रित करना भी है। इस अवसर पर देशभर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं, जिनमें पूर्व सैनिकों को सम्मानित किया जाता है और उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त की जाती है।
राष्ट्रपति के संदेश ने एक बार फिर यह स्पष्ट कर दिया कि पूर्व सैनिकों का योगदान राष्ट्र की आत्मा में हमेशा जीवित रहेगा और उनका साहस भारत की शक्ति का प्रतीक बना रहेगा।