The coordination between women goalkeepers Savita and Bichhu is commendable, but there is a void in the men's category: Block
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
नीदरलैंड के दिग्गज गोलकीपर पिरमिन ब्लाक अनुभवी सविता पूनिया और बिछू देवी के बीच तालमेल और प्रतिद्वंद्विता के बजाय एक-दूसरे की मदद करने की भावना की सराहना करते हुए कहा कि इससे भारतीय महिला गोलकीपिंग में सुचारू बदलाव सुनिश्चित हो सकता है जबकि पुरुष टीम के साथ ऐसा नहीं है जिसे पीआर श्रीजेश की कमी खल रही है।
नीदरलैंड की पेरिस ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता टीम के सदस्य रहे 38 वर्षीय ब्लाक का मानना है कि भारत के युवा पुरुष गोलकीपरों में अभी तक टीम को अगले स्तर तक ले जाने के लिए जरूरी गुणवत्ता की कमी नजर आ रही है।
ब्लाक ने भाषा से साक्षात्कार में कहा, ‘‘मैंने पुरुष टीम का मैच भी देखा। दिग्गज पीआर श्रीजेश के संन्यास के बाद बहुत बड़ा खालीपन आ गया है। वह ऊंचे दर्जे के गोलकीपर थे। युवा गोलकीपर आए तो हैं, लेकिन उनमें भारत को अगले स्तर तक ले जाने की गुणवत्ता की कमी है।’’
ब्लाक ने कहा कि श्रीजेश की जगह लेना केवल जरूरी तकनीकी कौशल वाले गोलकीपर को खोजने से नहीं जुड़ा था।