the Congress's no-confidence motion was defeated by voice vote in the Chhattisgarh Assembly.
आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
छत्तीसगढ़ विधानसभा में शासन, भ्रष्टाचार और कानून-व्यवस्था जैसे मुद्दों पर लगातार करीब 14 घंटे तक चली चर्चा के बाद शुक्रवार देर रात मुख्यमंत्री विष्णु देव साय नीत भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) सरकार के खिलाफ कांग्रेस का अविश्वास प्रस्ताव गिर गया।
अविश्वास प्रस्ताव के गिरने के साथ पांच दिवसीय मानसून सत्र का समापन भी हो गया। सत्ता पक्ष ने किसानों, आदिवासियों, युवाओं और महिलाओं से जुड़े मुद्दों पर सरकार की कथित विफलताओं को लेकर कांग्रेस के 136 सूत्री ‘‘आरोपपत्र’’ को खारिज कर दिया।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय समेत कुल 17 विधायकों ने चर्चा में भाग लिया जो शुक्रवार दोपहर बाद शुरू हुई और देर रात करीब ढाई बजे समाप्त हुई।
कांग्रेस ने 136 सूत्री ‘‘आरोपपत्र’’ पेश करते हुए आरोप लगाया कि भाजपा सरकार अपने ढाई वर्ष के कार्यकाल में किसानों, आदिवासियों, युवाओं और महिलाओं की उम्मीदों पर खरी नहीं उतर सकी।
चर्चा का जवाब देते हुए साय ने अविश्वास प्रस्ताव को ‘‘खोखला, निराधार और राजनीतिक नौटंकी’’ करार दिया।
उन्होंने कहा कि यदि ‘‘झूठ और भ्रष्टाचार’’ में पीएचडी का कोई पाठ्यक्रम होता, तो कांग्रेस के सदस्य उसमें विशेषज्ञ होते।
साय ने सवाल किया कि क्या यह प्रस्ताव उन तीन करोड़ छत्तीसगढ़वासियों के खिलाफ है, जिन्होंने 2023 के विधानसभा चुनाव में भाजपा को सत्ता सौंपी और बाद में लोकसभा तथा स्थानीय निकाय चुनावों में भी पार्टी का समर्थन किया।
उन्होंने कहा, ‘‘शायद वे यह पचा नहीं पा रहे हैं कि एक गांव के आदिवासी किसान का बेटा आज मुख्यमंत्री है।’’
साय ने पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार पर कटाक्षा करते हुए दावा किया कि ‘‘राजा’’ (भूपेश बघेल) और ‘‘महाराजा’’ (टीएस सिंह देव) के बीच नेतृत्व को लेकर चली खींचतान और आपसी गुटबाजी से राज्य का शासन प्रभावित हुआ।
साय ने कहा कि उनकी सरकार की कथनी और करनी में समानता है। उन्होंने 25 लाख किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से धान खरीदी, लंबित बोनस के रूप में 3,716 करोड़ रुपये के भुगतान, सिंचाई क्षमता दोगुनी करने तथा 11,000 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को प्रशासनिक स्वीकृति देने जैसी उपलब्धियों का उल्लेख किया।