आवाज द वॉयस/नई दिल्ली
भारत में जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन ने कहा कि दोनों देश जीवाश्म ईंधन के आयात पर निर्भरता कम करने और ऊर्जा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता बढ़ाने की समान चुनौती का सामना कर रहे हैं।
एकरमैन ने ‘ऊर्जा सुरक्षा के माध्यम से नवीकरणीय ऊर्जा’ विषय पर बृहस्पतिवार को आयोजित जीएसडीपी वार्तालाप श्रृंखला के 10वें संस्करण में कहा, ‘‘ भारत ने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण प्रगति की है और अब कुल बिजली उत्पादन में नवीकरणीय स्रोतों की हिस्सेदारी लगभग 26 प्रतिशत हो गई है।’’
हरित एवं टिकाऊ विकास के लिए भारत-जर्मनी साझेदारी (जीएसडीपी) का यह कार्यक्रम नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (एमएनआरई) के सहयोग से आयोजित किया गया।
फिलिप एकरमैन ने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा अब केवल जलवायु आवश्यकता नहीं, बल्कि आर्थिक और रणनीतिक आवश्यकता भी है।
उन्होंने कहा कि नवीकरणीय ऊर्जा जलवायु कार्रवाई, आर्थिक अवसर और ऊर्जा सुरक्षा का मजबूत संयोजन प्रस्तुत करती है।
जर्मनी के राजदूत ने कहा कि भारत और जर्मनी के अपने कूटनीतिक संबंधों के 75 वर्ष पूरे करने के अवसर पर इस साझेदारी के विशेष मायने हैं। दोनों देश नवीकरणीय ऊर्जा, बैटरी भंडारण, ग्रिड एकीकरण, ऊर्जा दक्षता, हरित शहरी परिवहन, जैव विविधता, जलवायु परिवर्तन शमन व अनुकूलन, सतत शहरी विकास और व्यावसायिक शिक्षा जैसे क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं।
नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा सचिव संतोष कुमार सारंगी ने ऊर्जा सुरक्षा और अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता का उल्लेख किया।