हैदराबाद
तेलंगाना के पूर्व मुख्यमंत्री और भारत राष्ट्र समिति (बीआरएस) के प्रमुख के. चंद्रशेखर राव (केसीआर) ने रविवार को फोन टैपिंग मामले में विशेष जांच दल (एसआईटी) की पूछताछ के बाद अपने आवास के बाहर जुटे पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं का अभिवादन किया। इस दौरान बीआरएस के कार्यकारी अध्यक्ष के.टी. रामा राव (केटीआर) भी उनके साथ मौजूद रहे। नंदी नगर स्थित आवास के बाहर बड़ी संख्या में समर्थकों ने केसीआर के समर्थन में नारे लगाए।
बीआरएस प्रवक्ता मन्ने कृष्णांक ने आरोप लगाया कि एसआईटी ने पूछताछ के दौरान प्रक्रिया संबंधी नियमों का उल्लंघन किया है। उन्होंने कहा कि आपराधिक प्रक्रिया संहिता की धारा 160 के अनुसार गवाह के बयान सूर्यास्त से पहले दर्ज किए जाने चाहिए, लेकिन 71 वर्षीय केसीआर से शाम 6 बजे के बाद पूछताछ की गई, जो नियमों के खिलाफ है। प्रवक्ता ने इसे केसीआर के संवैधानिक अधिकारों का उल्लंघन करार दिया।
कृष्णांक ने यह भी सवाल उठाया कि एसआईटी ने नोटिस देने के तरीके में भी अनावश्यक अपमान किया। उनके मुताबिक, सरकार को यह भली-भांति पता है कि केसीआर अपने निर्वाचन क्षेत्र गजवेल में रहते हैं, इसके बावजूद नोटिस नंदी नगर में दीवारों पर चिपकाए गए। उन्होंने कहा कि केसीआर एक प्रतिष्ठित नेता हैं, जिन्होंने तेलंगाना राज्य के गठन के लिए लंबा संघर्ष किया और दस वर्षों तक मुख्यमंत्री के रूप में सेवा दी है। ऐसे में नोटिस चिपकाने का तरीका अनुचित और अपमानजनक है।
बीआरएस प्रवक्ता ने जोर देकर कहा कि इन सबके बावजूद केसीआर ने कानून का सम्मान करते हुए जांच में पूरा सहयोग किया। उन्होंने बताया कि पार्टी के अन्य वरिष्ठ नेता—जैसे हरिश राव और केटीआर—ने भी पहले जांच एजेंसियों के साथ सहयोग किया था, और उसी परंपरा का पालन करते हुए केसीआर भी एसआईटी के समक्ष उपस्थित हुए।
राज्य सरकार पर निशाना साधते हुए बीआरएस ने आरोप लगाया कि फोन टैपिंग मामला जनता का ध्यान सरकार की अधूरी गारंटियों और झूठे वादों से हटाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है। प्रवक्ता के अनुसार, सरकार इस तरह की कार्रवाइयों से अपनी नाकामियों पर पर्दा डालने की कोशिश कर रही है।
पार्टी ने आगामी राजनीतिक भविष्य को लेकर भी भरोसा जताया। बीआरएस नेताओं का कहना है कि आने वाले समय में तेलंगाना की जनता एक बार फिर जनहितैषी और किसान-हितैषी सरकार चुनेगी। उनके मुताबिक, यह विश्वास जनता के साथ केसीआर के लंबे जुड़ाव और उनके शासनकाल के विकास कार्यों पर आधारित है।




