ऋषिकेश।
उत्तराखंड में 23 अप्रैल से शुरू होने जा रही चारधाम यात्रा को लेकर प्रशासन ने व्यापक तैयारियां पूरी कर ली हैं। यात्रा मार्ग की संवेदनशीलता को देखते हुए टिहरी गढ़वाल जिले को तीन सुपर जोन में विभाजित किया गया है, जहां प्रत्येक जोन की निगरानी डिप्टी एसपी स्तर के अधिकारियों द्वारा की जाएगी।
टिहरी गढ़वाल की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक Shweta Chaubey ने बताया कि यह जिला चारधाम यात्रा का सबसे बड़ा और महत्वपूर्ण ट्रांजिट सर्किट कवर करता है, इसलिए यहां सुरक्षा और प्रबंधन को लेकर विशेष सतर्कता बरती जा रही है। उन्होंने कहा कि पूरे जिले को न केवल तीन सुपर जोन में बांटा गया है, बल्कि 11 जोन और 30 सेक्टर भी बनाए गए हैं, जहां पर्याप्त पुलिस बल तैनात किया गया है।
एसएसपी ने बताया कि सभी पुलिसकर्मियों को विशेष ब्रीफिंग दी गई है, जिसमें यात्रियों के साथ व्यवहार, आपात स्थिति से निपटने और सुरक्षा प्रोटोकॉल पर जोर दिया गया है। खास तौर पर यह सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं कि देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के साथ विनम्र और सहयोगपूर्ण व्यवहार किया जाए।
प्रशासन ने यात्रा के दौरान संभावित आपात स्थितियों को देखते हुए पुलिस कर्मियों को प्राथमिक उपचार (फर्स्ट एड) का प्रशिक्षण भी दिया है। इससे दुर्घटना या स्वास्थ्य संबंधी किसी भी स्थिति में तत्काल मदद उपलब्ध कराई जा सकेगी।
इस बीच, राज्य के पर्यटन मंत्री Satpal Maharaj ने जानकारी दी कि चारधाम यात्रा के लिए अब तक करीब 18 लाख पंजीकरण हो चुके हैं। उन्होंने बताया कि यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ सहित हेमकुंड साहिब के लिए भारी संख्या में श्रद्धालु पंजीकरण करा चुके हैं, जो इस यात्रा के प्रति लोगों के उत्साह को दर्शाता है।
मंत्री ने यह भी आश्वासन दिया कि यात्रा के दौरान आवश्यक सुविधाएं—जैसे भोजन और रसोई गैस—पूरी तरह उपलब्ध रहेंगी। उन्होंने कहा कि किसी भी प्रकार की कमी नहीं होने दी जाएगी और सभी व्यवस्थाएं सुचारू रूप से संचालित होंगी।
राज्य के मुख्यमंत्री Pushkar Singh Dhami ने भी तैयारियों का जायजा लेने के लिए हाल ही में केदारनाथ हाईवे और अन्य महत्वपूर्ण मार्गों का निरीक्षण किया। उन्होंने कहा कि सरकार हर स्तर पर तैयार है और देश-विदेश से आने वाले श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए जा चुके हैं।
नैनीताल में हुई समीक्षा बैठक में सुरक्षा, यातायात प्रबंधन और आपात चिकित्सा सेवाओं पर विशेष ध्यान दिया गया। संकरी पहाड़ी सड़कों और जंगल क्षेत्रों से गुजरने वाले मार्गों पर सुरक्षा बढ़ाने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि यात्रा सुरक्षित और सुगम हो सके।
चारधाम यात्रा, जिसे ‘देवभूमि’ उत्तराखंड की आस्था का सबसे बड़ा उत्सव माना जाता है, हर साल लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करती है। ऐसे में प्रशासन का यह बहुस्तरीय प्रबंधन इस बार यात्रा को और अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और सफल बनाने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
सरकार और प्रशासन ने श्रद्धालुओं से अपील की है कि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों का पालन करें और यात्रा के दौरान सहयोग बनाए रखें, ताकि यह आध्यात्मिक यात्रा सभी के लिए सुखद और सुरक्षित अनुभव बन सके।