दो दशक बाद कोलकाता में पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में शामिल होंगी तसलीमा नसरीन

Story by  PTI | Published by  [email protected] | Date 01-08-2026
Taslima Nasreen to attend first public event in Kolkata after two decades
Taslima Nasreen to attend first public event in Kolkata after two decades

 

आवाज द वॉयस/नई दिल्ली

 
 विवादास्पद पुस्तक के कारण लगभग दो दशक पहले कोलकाता छोड़ने के लिए मजबूर हुईं निर्वासित बांग्लादेशी लेखिका तसलीमा नसरीन शनिवार को एक साहित्यिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए यहां आएंगी।
 
धार्मिक कट्टरवाद के विरोध में आयोजित इस कार्यक्रम में उनकी वापसी राज्य में नयी सरकार के गठन के बाद पश्चिम बंगाल के राजनीतिक बदलाव का एक सांस्कृतिक प्रतीक मानी जा रही है। वह इस कार्यक्रम में कविता पाठ भी करेंगी।
 
तसलीमा शुक्रवार को कोलकाता पहुंचीं। उन्होंने अपनी इस यात्रा को ‘‘घर वापसी’’ बताया है।
 
इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी, प्रख्यात बांग्ला साहित्यकार शीर्षेंदु मुखोपाध्याय तथा कई लेखक, कलाकारों और बुद्धिजीवियों के शामिल होने की संभावना है।
 
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) तसलीमा की वापसी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की पुष्टि के रूप में पेश कर रही है, जबकि आयोजकों का कहना है कि यह कार्यक्रम केवल साहित्य और धार्मिक कट्टरवाद के विरोध का उत्सव है।
 
भाजपा शासन में तसलीमा की कोलकाता वापसी ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता, धर्मनिरपेक्षता और धार्मिक संवेदनशीलताओं के प्रति राज्य के रुख पर बहस को फिर से हवा दे दी है।
 
भाजपा का कहना है कि यह कार्यक्रम वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस सरकारों की उस ‘‘विफलता’’ को सुधारने की दिशा में एक कदम है, जिसमें वे धार्मिक दबाव के सामने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता की रक्षा नहीं कर सकीं।
 
दूसरी ओर, वाम मोर्चा और तृणमूल कांग्रेस लगातार यह कहते रहे हैं कि 2007 में तसलीमा को कोलकाता छोड़ने के लिए कहना पूरी तरह कानून-व्यवस्था की स्थिति को देखते हुए लिया गया फैसला था, क्योंकि शहर के कुछ हिस्सों में सांप्रदायिक तनाव बढ़ गया था।
 
आयोजकों ने बार-बार स्पष्ट किया है कि शनिवार का कार्यक्रम न तो कोई राजनीतिक रैली है और न ही सरकारी आयोजन, बल्कि यह धार्मिक कट्टरवाद का विरोध करने और अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के सिद्धांत की पुनर्पुष्टि करने के उद्देश्य से आयोजित एक साहित्यिक सभा है।
 
तसलीमा ने ‘पीटीआई-भाषा’ से कहा था कि पहली बार सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए कोलकाता लौटना उन्हें ‘‘अपने ही देश लौटने’’ जैसा महसूस हो रहा है। उन्होंने उम्मीद जतायी कि यह यात्रा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और असहमति की आवाजों की सुरक्षा के महत्व को दोबारा रेखांकित करेगी।
 
उन्होंने कहा, ‘‘मेरे दिल में बंगाल कभी किसी सीमा या कंटीले तारों की बाड़ से बंटा नहीं रहा। बंगाल के पूर्वी हिस्से का दरवाजा मेरे लिए बंद है, इसलिए अभी के लिए, बंगाल का यही हिस्सा मेरा घर है।’’
 
इस यात्रा को सिर्फ निजी तौर पर घर वापसी से कहीं अधिक बताते हुए प्रसिद्ध लेखिका ने कहा कि यह उस आवाज की वापसी का प्रतीक है जिसे धार्मिक कट्टरपंथियों ने कभी दबाने की कोशिश की थी।