लखनऊ
उर्दू भाषा के संरक्षण और विकास के लिए केवल बातें करना पर्याप्त नहीं है, बल्कि इसके लिए गंभीर प्रयास और व्यावहारिक कदम उठाने की जरूरत है। बच्चों को उर्दू पढ़ने और लिखने के लिए प्रोत्साहित करना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपनी भाषा, साहित्य और संस्कृति से जुड़ी रहे। यह बात उत्तर प्रदेश के पूर्व कार्यवाहक मुख्यमंत्री और छठे अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन के अध्यक्ष डॉ. अम्मार रिजवी ने कही।
छठे अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन के आयोजन की तैयारियों के सिलसिले में सोमवार शाम लखनऊ के अलीगंज स्थित डॉ. अम्मार रिजवी के आवास दारुल अमान में एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। बैठक की अध्यक्षता प्रोफेसर खान मोहम्मद आतिफ ने की। इस दौरान सम्मेलन के सफल आयोजन के लिए विभिन्न प्रशासनिक और संगठनात्मक पहलुओं पर चर्चा हुई। साथ ही, तैयारियों को व्यवस्थित ढंग से आगे बढ़ाने पर जोर दिया गया।
बैठक में बताया गया कि इससे पहले पांच अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन सफलतापूर्वक आयोजित किए जा चुके हैं। इन सम्मेलनों के माध्यम से उर्दू भाषा और साहित्य को बढ़ावा देने के साथ ही इसके समृद्ध ज्ञान, सांस्कृतिक विरासत और साहित्यिक परंपराओं को सामने लाने का प्रयास किया गया है। छठा अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन भी इसी कड़ी का महत्वपूर्ण हिस्सा होगा।
इस अवसर पर डॉ. अम्मार रिजवी ने उर्दू भाषा की वर्तमान स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि उर्दू के विकास के लिए केवल जुबानी दावे करने से काम नहीं चलेगा। इसके लिए व्यक्तिगत और सामूहिक स्तर पर गंभीर प्रयास करने होंगे। उन्होंने जोर देकर कहा कि उर्दू को बढ़ावा देने की शुरुआत घर से होनी चाहिए। अभिभावकों को बच्चों को उर्दू पढ़ने और लिखने के लिए प्रेरित करना चाहिए, ताकि नई पीढ़ी अपनी भाषा और तहजीब से जुड़ी रहे।
डॉ. रिजवी ने कहा कि उर्दू भारत की साझा सांस्कृतिक परंपरा, समृद्ध विरासत और आपसी सद्भाव की महत्वपूर्ण पहचान है। इस भाषा के प्रचार और प्रसार के लिए जरूरी है कि दैनिक जीवन, शिक्षा, साहित्यिक आयोजनों और सामाजिक गतिविधियों में इसका इस्तेमाल बढ़ाया जाए। उन्होंने लोगों से अपील की कि उर्दू का संरक्षण और विकास सभी की साझा जिम्मेदारी है। इसके साहित्यिक और सांस्कृतिक मूल्यों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए समाज के सभी वर्गों को आगे आना चाहिए।
बैठक में छठे अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन को सुव्यवस्थित तरीके से आयोजित करने के लिए पांच समितियों के गठन और उनकी जिम्मेदारियां तय करने पर भी विचार-विमर्श किया गया। प्रस्तावित समितियां उद्घाटन सत्र, शैक्षणिक संगोष्ठी, मुशायरा, सांस्कृतिक कार्यक्रम और मीडिया समन्वय से संबंधित कार्यों को संभालेंगी। विभिन्न कार्यक्रमों के आयोजन स्थलों और प्रशासनिक जिम्मेदारियों के लिए किन लोगों को नियुक्त किया जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय अगली बैठक में लिया जाएगा।
इस महत्वपूर्ण बैठक में प्रोफेसर खान मोहम्मद आतिफ, डॉ. इक्तिदार हुसैन फारूकी, वरिष्ठ पत्रकार प्रदीप कपूर, डॉ. हारून रिजवी, हसन काजमी, सैयद आसिम रजा, सुल्तान शाकिर हाशमी, आसिफ जमान रिजवी, अंसाराम अली, सरफराज जाहिद, प्रोफेसर अरूप चक्रवर्ती, डॉ. मूसा रजा, डॉ. आल अहमद, डॉ. मसीहुद्दीन खान, डॉ. सर्वत तकी, क्लब सलमान, डॉ. मुंतजर काइमि, जहीर मुस्तफा, अनवर जैदी, डॉ. एहतेशाम खान, जमील हसन नकवी, अबूशहमा अंसारी, डॉ. ऐनुल हसन, अतीक अहमद अंसारी, शहाबुद्दीन खान, रवि प्रकाश यादव, मिर्जा फरकान बेग, इरफान मंसूरी और मिर्जा असलम बेग सहित कई प्रमुख शिक्षाविदों, साहित्यकारों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने हिस्सा लिया।
बैठक में उम्मीद जताई गई कि छठा अंतरराष्ट्रीय उर्दू सम्मेलन भाषा और साहित्य के विकास, शैक्षणिक एवं साहित्यिक गतिविधियों को प्रोत्साहित करने तथा नई पीढ़ी में उर्दू के प्रति लगाव बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
इस बैठक की जानकारी ऑल इंडिया माइनॉरिटीज फोरम फॉर डेमोक्रेसी के प्रचार एवं प्रसार विभाग के सचिव अबूशहमा अंसारी ने दी।