नई दिल्ली
जम्मू-कश्मीर के टेरर फंडिंग मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कश्मीरी अलगाववादी नेता Shabir Ahmed Shah को ज़मानत दे दी है। उन पर Unlawful Activities (Prevention) Act के तहत जम्मू-कश्मीर को भारत से अलग करने की साज़िश रचने और आतंकवाद के लिए फंडिंग जुटाने का आरोप है। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में Vikram Nath और Sandeep Mehta की बेंच ने की।
सुनवाई के दौरान बचाव पक्ष ने अदालत को बताया कि शब्बीर अहमद शाह वर्ष 2019 से जेल में बंद हैं और मामले की सुनवाई काफी धीमी गति से चल रही है। दलील दी गई कि इस केस में कुल 248 गवाह हैं, लेकिन अब तक केवल 34 गवाहों की ही गवाही दर्ज हो पाई है। लंबी न्यायिक हिरासत और ट्रायल में देरी को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें ज़मानत देने का फैसला किया।
जांच एजेंसी National Investigation Agency (NIA) ने आरोप लगाया है कि पाकिस्तान और सीमा पार से हवाला चैनलों के जरिए धन जुटाकर उसे जम्मू-कश्मीर में अलगाववादी गतिविधियों और हिंसक घटनाओं के लिए इस्तेमाल किया गया। हालांकि अदालत ने सुनवाई के दौरान यह भी सवाल उठाया कि अभियोजन पक्ष जिन भाषणों का हवाला दे रहा है, वे 1990 के दशक के बताए जा रहे हैं, इसलिए इतने पुराने बयानों को सबूत के रूप में पेश करने के औचित्य पर भी प्रश्न किया गया। अंततः सुप्रीम कोर्ट ने लंबी हिरासत और ट्रायल में देरी को ध्यान में रखते हुए शब्बीर अहमद शाह को ज़मानत देने का आदेश दिया।





