पुणे में मुस्लिम महिलाओं के लिए खास 'रोज़ा इफ्तार पार्टी

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  onikamaheshwari | Date 12-03-2026
Female police officers and social workers, along with Muslim women, organised an Iftar party
Female police officers and social workers, along with Muslim women, organised an Iftar party

 

आवाज द वाॅयस /पुणे 

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस भलें ही गुज़र गया हो, लेकिन पुणे में इसकी गूंज और असर अब भी महसूस किया जा रहा है। महिला सशक्तिकरण को सिर्फ एक दिन के जश्न तक महदूद न रखते हुए, एक बेहद शानदार और अलग पहल की गई। रमज़ान के मुकद्दस महीने में भवानी पेठ के काशीवाड़ी इलाके में यह आयोजन हुआ। यहाँ मुस्लिम समाज की महिलाओं के लिए एक खास 'रोज़ा इफ्तार पार्टी' का एहतमाम किया गया। इसने समाज के सामने बहनचारे और गंगा-जमुनी तहज़ीब की एक खूबसूरत मिसाल पेश की है।
 

यह कार्यक्रम इंदिरा अविनाश बागवे और क्रांतिवीर लहुजी वस्ताद साल्वे एकता प्रतिष्ठान की अगुवाई में पूरे जोश के साथ संपन्न हुआ। इस इफ्तार का मकसद सिर्फ रोज़ा खोलना नहीं था। बल्कि इसके बहाने मुस्लिम महिलाओं के बीच तालीम, सेहत, राष्ट्रीय एकता और सभी धर्मों के प्रति सम्मान को बढ़ाना था। इलाके की महिलाओं ने बड़ी तादाद में इस महफिल में शामिल होकर अपना पूरा समर्थन दिखाया।
 
इस मौके पर मुक्ता फाउंडेशन की अध्यक्ष इंदिरा अविनाश बागवे और सेक्रेटरी फरज़ाना खान मौजूद थीं। उनके साथ-साथ महिला पुलिस अधिकारी रानी जाधव, हवलदार रानी राउत और कांस्टेबल आरती गायकवाड़ खास तौर पर शरीक हुईं। महिला पुलिस अधिकारियों की मौजूदगी ने महिलाओं के मन में सुरक्षा और आत्मविश्वास का एक मजबूत पैगाम दिया।
 
 
इनके अलावा सचिव मनीषा क्षीरसागर, दिलशाद शेख, कोमल बावकर इस शानदार महफिल का हिस्सा बनीं। प्रतिष्ठान की ज्योति अडागले, प्रियंका भोंडे, मालन कसबे समेत कई और महिलाओं ने भी इसमें शिरकत की। सबसे खास बात यह है कि पिछले तीन सालों से यहाँ सिर्फ महिलाओं के लिए इस इफ्तार का आयोजन किया जा रहा है। इसके पीछे की असल सोच महिलाओं के बीच एकता, प्यार और आपसी बातचीत को बढ़ावा देना है।
 
इंदिरा बागवे ने इस मौके पर साफ किया कि उनका मकसद सिर्फ त्योहार मनाना नहीं है। मुक्ता फाउंडेशन के ज़रिए इस वार्ड में सभी धर्मों की महिलाओं के लिए सिलाई और हैंडीक्राफ्ट जैसे छोटे बिज़नेस शुरू किए गए हैं। इस ज़मीनी काम की वजह से कई महिलाओं को रोज़गार के नए मौके मिले हैं। अब वे सही मायनों में आत्मनिर्भर बन रही हैं।
 

 
 

 

 
 
 
 
 

 

 
 
 
 
 
 
 
 
 

 

 
 
 

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कार्यक्रम के आखिर में वहां मौजूद महिलाओं ने इस अनूठी पहल को लेकर बहुत खुशी ज़ाहिर की। उनका मानना था कि महिला दिवस के मौके पर त्योहार की रूहानियत के साथ इस तरह एकजुट होना एक सकारात्मक शुरुआत है। समाज के हर तबके से इस बेहतरीन पहल की जमकर तारीफ हो रही है।