जम्मू में पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर जानलेवा हमला, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे गंभीर सवाल

Story by  आवाज़ द वॉयस | Published by  [email protected] | Date 12-03-2026
Deadly attack on former Chief Minister Farooq Abdullah in Jammu, serious questions raised on security arrangements
Deadly attack on former Chief Minister Farooq Abdullah in Jammu, serious questions raised on security arrangements

 

आवाज द वाॅयस/ श्रीनगर

जम्मू और कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस (NC) के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला पर बुधवार को जम्मू के रॉयल पार्क, ग्रेटर कैलाश इलाके में आयोजित एक शादी समारोह के दौरान जानलेवा हमला किया गया। इस हमले में भाग्य से किसी को चोट नहीं लगी, लेकिन घटना ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था और उच्च सुरक्षा प्राप्त नेताओं की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

हमले की पूरी घटना के मुताबिक, एक 63 वर्षीय व्यक्ति ने हथियार लेकर फारूक अब्दुल्ला के पास पहुंचने की कोशिश की और गोली चलाने का प्रयास किया। हालांकि, उनके निजी सुरक्षा दल ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हमले को नाकाम कर दिया। हमले के दौरान ओमर अब्दुल्ला, जो कि फारूक अब्दुल्ला के पुत्र और जम्मू-कश्मीर के वर्तमान मुख्यमंत्री हैं, ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर लिखा कि उनके पिता की जान बड़ी मुश्किल से बची। उन्होंने पूछा कि कैसे कोई व्यक्ति ज़ेड+ सुरक्षा के बावजूद उनके पिता के इतने करीब पहुँच गया।

ओमर अब्दुल्ला ने अपनी पोस्ट में लिखा, "अल्लाह ने कृपा की। मेरे पिता की जान बहुत बड़ी मुश्किल से बची। अभी स्थिति अस्पष्ट है, लेकिन यह पता चला है कि एक व्यक्ति हथियार लेकर उनके पास पहुंचा और गोली चलाने की कोशिश की। केवल उनके सुरक्षा दल की तत्परता और दक्षता के कारण यह हमला विफल हुआ। इस घटना ने कई सवाल खड़े कर दिए हैं, जिनमें सबसे अहम यह है कि कैसे कोई व्यक्ति ज़ेड+ NSG सुरक्षा प्राप्त पूर्व मुख्यमंत्री के इतना करीब पहुँच सका।"

जम्मू और कश्मीर प्रशासन के सलाहकार नासिर असलम वानी ने पुष्टि की कि हमले में किसी को चोट नहीं आई और आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। वानी ने कहा कि फारूक अब्दुल्ला पूरी तरह सुरक्षित हैं और इस समय आराम कर रहे हैं। उन्होंने कहा, "यह घटना बहुत गंभीर है, लेकिन अल्लाह की कृपा से किसी को चोट नहीं आई। आरोपी को हिरासत में लिया गया है और जांच जारी है।"

पुलिस ने बताया कि आरोपी की पहचान कमल सिंह, जो कि जम्मू के पुरानी मंडी का निवासी है, के रूप में हुई है। घटना के दौरान प्रयुक्त आग्नेयास्त्र भी आरोपी के कब्जे से बरामद कर लिया गया है। पुलिस ने कहा कि प्रारंभिक जांच में यह स्पष्ट हुआ है कि घटना में आतंकवाद का कोई पहलू नहीं है, लेकिन पूरी जांच के बाद ही वास्तविक कारणों का पता चलेगा।

जम्मू और कश्मीर पुलिस ने बताया कि सुरक्षा बलों ने त्वरित कार्रवाई करते हुए हमले को विफल कर दिया। पुलिस महानिरीक्षक (IGP) जम्मू ज़ोन ने मौके पर पहुंचकर गिरफ्तारी की पुष्टि की। इसके अलावा, उपमुख्यमंत्री सुरिंदर चौधरी ने भी कहा कि घटना में किसी को चोट नहीं लगी, लेकिन सुरक्षा व्यवस्था में चूक स्पष्ट है।

इस हमले की निंदा करते हुए जम्मू और कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष तारीक हामिद कर्रर ने कहा कि यह घटना न केवल पूर्व मुख्यमंत्री फारूक अब्दुल्ला पर बल्कि पूरे राजनीतिक नेतृत्व और राज्य की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। कर्रर ने कहा, "ऐसी हिंसक घटनाएं बेहद परेशान करने वाली हैं और यह स्पष्ट करती हैं कि प्रदेश में कानून-व्यवस्था की स्थिति गंभीर है। जिम्मेदार अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाना चाहिए। जनता को सुरक्षा, स्थिरता और सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए, और प्रशासन की जिम्मेदारी है कि ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।"

जम्मू और कश्मीर के खेल और युवा मामले मंत्री सतीश शर्मा ने भी इसे "सुरक्षा चूक" बताया और कहा कि पूरी तरह जांच की जानी चाहिए कि हथियार समारोह में कैसे प्रवेश कर पाया। उन्होंने कहा, "ऐसी घटनाएं लगातार हो रही हैं। राजनीतिक कार्यकर्ताओं और नेताओं को पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करना प्रशासन की जिम्मेदारी है। जिन दलों ने इस देश के लिए सबसे बड़ा बलिदान दिया है, उनके नेताओं और कार्यकर्ताओं को पूर्ण सुरक्षा मिलनी चाहिए।"

घटना के तुरंत बाद दक्षिण जम्मू के पुलिस अधीक्षक अजय शर्मा फारूक अब्दुल्ला के निवास पहुंचे और उनसे मुलाकात की। उन्होंने मीडिया से कहा कि "जितनी जानकारी उपलब्ध है, वह साझा की जाएगी। इस समय किसी को चोट नहीं आई है और घटना की जांच जारी है।"

जम्मू और कश्मीर पुलिस ने स्पष्ट किया कि यह हमला आतंकवादी हरकत नहीं है। पुलिस ने कहा कि "यह एक निजी हथियार से की गई फायरिंग की घटना है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री उपस्थित थे। आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है और जांच जारी है।"

इस पूरे मामले ने प्रदेश की सुरक्षा व्यवस्था की कमजोरियों को उजागर किया है। ज़ेड+ सुरक्षा प्राप्त नेताओं के इतने करीब हमला करने की घटना ने सुरक्षा एजेंसियों और प्रशासन के लिए गंभीर चुनौती पेश की है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि ऐसी घटनाओं से केवल सुरक्षा बलों की तत्परता और प्रशासन की जवाबदेही पर प्रश्न नहीं उठते, बल्कि यह समाज में कानून और व्यवस्था की स्थिति की भी परीक्षा है।

राजनीतिक दलों और प्रशासन की प्रतिक्रिया से स्पष्ट है कि मामले की गहन जांच की जाएगी। आरोपी की मानसिक स्थिति, घटना के पीछे की मंशा और सुरक्षा व्यवस्था में हुई चूक की पूरी पड़ताल की जाएगी। सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि यदि व्यक्तिगत सुरक्षा दल और सुरक्षा प्रोटोकॉल समय पर और सटीक तरीके से कार्य करते, तो स्थिति को नियंत्रित किया जा सकता था, लेकिन इस घटना ने सुरक्षा प्रक्रियाओं में संभावित कमियों को भी उजागर किया।

कुल मिलाकर, जम्मू में हुए इस हमले ने न केवल फारूक अब्दुल्ला की सुरक्षा को चुनौती दी है, बल्कि प्रदेश में राजनीतिक और सामाजिक स्थिरता के लिए भी चेतावनी का संकेत दिया है। प्रशासन, सुरक्षा एजेंसियों और राजनीतिक दलों के लिए यह एक गंभीर सबक है कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए सख्त और प्रभावी सुरक्षा उपाय अपनाए जाएं।