नई दिल्ली:
देश की सर्वोच्च न्यायिक संस्था, सुप्रीम कोर्ट, जल्द ही पांच नए न्यायाधीशों के स्वागत के लिए तैयार है। केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम द्वारा अनुशंसित पांच नामों को मंजूरी दे दी है। इन नियुक्तियों के बाद सर्वोच्च न्यायालय की न्यायाधीशों की संख्या नए स्वीकृत पदों के लगभग बराबर पहुंच जाएगी और केवल एक पद रिक्त रहेगा।
केंद्रीय कानून एवं न्याय राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) Arjun Ram Meghwal ने सोमवार को सोशल मीडिया मंच एक्स पर जानकारी साझा करते हुए बताया कि भारत के राष्ट्रपति ने संविधान के अनुच्छेद 124(2) के तहत पांच प्रतिष्ठित कानूनी हस्तियों को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त करने की मंजूरी प्रदान कर दी है।
नियुक्त किए गए न्यायाधीशों में Justice Sheel Nagu, Justice Shree Chandrashekhar, Justice Sanjeev Sachdeva और Justice Arun Palli शामिल हैं। इनके अलावा वरिष्ठ अधिवक्ता Venkita Subramani Mohana को भी सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश नियुक्त किया गया है।
ये नियुक्तियां उस सिफारिश के बाद हुई हैं जिसे 27 मई को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने केंद्र सरकार को भेजा था। कॉलेजियम की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश Surya Kant कर रहे थे। नवंबर 2025 में मुख्य न्यायाधीश का पद संभालने के बाद यह उनके नेतृत्व में की गई पहली बड़ी न्यायिक नियुक्ति मानी जा रही है।
इन नियुक्तियों का महत्व इसलिए भी बढ़ जाता है क्योंकि हाल ही में केंद्र सरकार ने एक अध्यादेश के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में न्यायाधीशों की स्वीकृत संख्या 34 से बढ़ाकर 38 कर दी थी। इस फैसले का उद्देश्य बढ़ते मामलों के बोझ को कम करना और अधिक संख्या में संविधान पीठों का गठन सुनिश्चित करना है।
पांच नए न्यायाधीशों के शामिल होने के बाद सुप्रीम कोर्ट में कुल न्यायाधीशों की संख्या 37 हो जाएगी। इससे अदालत में केवल एक पद खाली बचेगा। न्यायिक विशेषज्ञों का मानना है कि इससे लंबित मामलों के निपटारे की गति तेज हो सकती है और महत्वपूर्ण संवैधानिक मामलों की सुनवाई में भी तेजी आएगी।
भारत में न्यायपालिका पर लगातार बढ़ते मामलों का दबाव एक बड़ी चुनौती बना हुआ है। लाखों मामलों के लंबित रहने के कारण समय पर न्याय सुनिश्चित करना कठिन हो जाता है। ऐसे में न्यायाधीशों की संख्या बढ़ाना और रिक्त पदों को शीघ्र भरना न्यायिक सुधारों की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
कानूनी जानकारों के अनुसार, इन नियुक्तियों में वरिष्ठता, योग्यता, क्षेत्रीय प्रतिनिधित्व और न्यायपालिका में विविधता जैसे पहलुओं का भी ध्यान रखा गया है। इससे सर्वोच्च न्यायालय की संस्थागत क्षमता और मजबूत होगी तथा देश की न्याय व्यवस्था को और अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी।
नई नियुक्तियों के साथ सुप्रीम कोर्ट अब अपने विस्तारित ढांचे के लगभग पूर्ण स्वरूप में कार्य करेगा, जिससे आने वाले समय में न्यायिक कार्यप्रणाली और अधिक सुचारु होने की उम्मीद है।